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घडसाना का किसान आन्दोलन ः एक नजर
29 Oct 2006

पानी के लिये जूझ रहा है धरतीपुत्र हठधर्मी है सरकार। निष्ठुर है प्रशासन। सिक रही है राजनैतिक रोटियाँ मर रहे है किसान। आवाक है जनता। आखिर क्या हो रहा है घडसाना में आईये जानते है ऑंखो देखा हमारे प्रबंध संपादक श्याम नारायण रंगा की नजर से


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गंगानगर का घडसाना इलाका वर्तमान में पानी की आग में जल रहा है। यह क्षेत्र पिछले लम्बे समय से किसान Dead Body at 6 DD Villageआन्दोलन को झेल रहा है। पिछले माह की सोलह तारीख को किसानों पर प्रशासन ने लाठीचार्ज किया था। इस लाठीचार्ज में कईं किसान घायल हुए। किसानों ने सोलह तारीख को प्रशासन के कफ्र्यू को तोड दिया था और इसी का परिणाम था कि किसानों पर लाठीचार्ज हुआ। इसी लाठीचार्ज में घायल हुए चंदूराम जाट की पिछले दिनों मौत हो गई। चंदूराम के पिता का आरोप है कि सरकारी अस्पताल मे उसके बेटे का ईलाज करने से मना कर दिया गया था और जबरदस्ती छुट्टी दे दी गई और इसी कारण चंदूराम की मौत हो गई। वहीं प्रशासन का कहना है कि चंदूराम के पिता अपनी ईच्छा से छुट्टी दिलवाकर लाए हैं और उसकी मौत का जिम्मेवार प्रशासन नहीं है।

चंदूराम की मौत को आज छह दिन हो चुके हैं लेकिन उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। किसान संघर्ष समिति के नेताओं का कहना है कि प्रशासन की गलती व लाठीचार्ज के कारण ही चंदूराम की मौत हुई है। इस कारण चंदूराम को शहीद का दर्जा दिया जाए। किसानों की मांग है कि चंदूराम के परिवार को मुआवजे के तौर पर पाँच लाख रूपये दिए जाए और उसके परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए।

इस मुद्दे को लेकर वर्तमान में घडसाना में काफी तनाव का माहौल है। किसान संघर्ष समिति व काँग्रेस के नेता चंदूराम के शव को लेकर घडसाना में डेरा डाले बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार संवेदनहीन है और किसानों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं काँग्रेस इस मुद्दे को लेकर राजनैतिक फायदा उठाने का पूरा प्रयास कर रही है। काँग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ बी डी कल्ला, पूर्व सांसद शंकर पन्नू, प्रदेश काँग्रेस के उपाध्यक्ष रघ शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ चंद्रभान, पूर्व मंत्री हीरालाल इंदौरा सहित प्रदेश के करीब एक दर्जन काँग्रेसी नेता घडसाना में डेरा डाले बैठे हैं। काँग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व राजस्थान के प्रभारी के वी कृष्णमूर्ति भी घडसाना आ चुके हैं। काँग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन दिया है कि वसुंधरा सरकार को बर्खास्त किया जाए। काँग्रस का कहना है कि पिछले सत्रह दिनों से घडसाना में कफ्र्यू है और सरकार कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने में नाकाम रही है। इस नाकाम सरकार को राज करने का कोई अधिकार नहीं है। काँग्रेस ने केन्द्रीय गृहमंत्री को भी स्थिति से अवगत करवाया है। इस प्रकार काँग्रेस पूरे आक्रामक रूख में है।

किLeaders at 6 DD Village of Gharsanaसानों की यह समस्या पानी की नहीं है। किसान अपनी जमीन को देखकर रो रहे हैं। जिस उम्मीद के साथ किसानों ने जमीन खरीदी थी व जो सोचकर किसानों ने अपना रूपया लगाया था आज उसका वह प्रतिफल नहीं मिल रहा है। किसानों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया हे। सिंचाई के लिए उपयुक्त पानी नहीं मिल रहा है। किसान आंदोलित इसी लिए हैं। किसानों का कहना है कि जो समझौता राज्य सरकार ने एक साल पहले अजमेर जेल में किसान नेताओं के साथ किया था उसे लागू किया जाए। किसानों का आरोप है कि सरकार अपने वादे को पूरा नहीं कर रही। किसान मरने मारने पर उतारू है।

वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन ने आंदोलन से निपटने के लिए पूरी तैयारी करली ह। संभागीय आयुक्त विनोद कपूर, पुलिस महानिरीक्षक लक्ष्मण मीणा, गंगानगर कलेक्टर कजीलाल मीणा, गंगानगर की पुलिस अधीक्षक विनीता ठाकुर स्वयं हालातPolice Force at Gharsana पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन ने पिछले दिनों सोलह तारीख की घटना के बाद सेना भी बुलाई थी जिसे अब हटा लिया गया है। प्रशासन ने एस टी एफ के जवान, आर ए सी के जवान व अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर रखा है। हथियारों से लैस पुलिस के जवान भी तैनात किए गए ह। ऑंसू गैस के गोले व वज्र वाहनों की भी व्यवस्था की गई है। संभागीय आयुक्त का कहना है कि प्रशासन किसी भी सूरत में टकराव नहीं चाहता। लेकिन अगर किसी ने कानून हाथ में लेने की कोशिश की तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पानी में लगी आग कब शांत होगी यह तो कहा नहीं जा सकता लेकिन इतना अवश्य लग रहा है कि सरकार अपनी हठधर्मिता पर है तो किसान भी अपनी जिद्द पर। चंदूराम का अंतिम संस्कार कब होगा यह न तो किसान जानता है और न ही सरकार।
 

क्या है किसानों की माँगे आईये जानते हैं:
चंदूराम को शहीद का दर्जा दिया जाए। मृतक के परिवार को पाँच लाख का मुआवजा दिया जाए और आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए।
जेल में कैद किसान नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए और किसानों के पुराने व नए सभी मुकदमें वापस लिए जाए।
अजमेर जेल में जो समझौता सरकार ने किया था उसे हूबहू लागू किया जाए।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए व मुकदमे दर्ज किए जाए।
चंदूराम का पोस्टमार्टम किसी अन्य डॉक्टर से करवाया जाए।



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