सेना की आवश्यकता के नाम पर किसानों के साथ अन्याय, मांग नही मानी तो ५६ नंदीग्राम औरः बेनीवाल
29 Nov
2007
लुणकरणसर के ५६ गांवो की भूमि को सेना के सयुंक्त शस्त्र प्रशिक्षण कि लिये अवाप्ती के विरोध मे बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने आज एक दिवसीय धरना दिया गया। इस धरने मे तकरीबन २००० किसान पहुंचे तथा धरने को लुणकरणसर विधायक वीरेन्द्र बेनीवाल, बीकानेर जिला प्रमुख रामेश्वर डुडी सहित विभिन्न गांवो के सरपंच व जनप्रतिनिधियों ने संम्बोधित किया।
बीकानेर। बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट के सामने आज लुणकरणसर के ५६ गावों से आये किसाने ने अपनी भूमि सेना को देने के विरोध मे धरना दिया। गौरतलब है कि लुणकरणसर के ५६ गांवो की भुमि को अवाप्त कर सेना के सयुंक्त शस्त्र प्रशिक्षण केन्द्र हेतु तय कि गई है और इसके लिये राज्य सरकार ने भी अपनी तरफ से एनओसी भी जारी कर दी है।
इस भुमि अवाप्ती को लेकर वहां बसे किसान खुश नहीं है और किसी भी कीमत पर वे अपनी जमीन छोडना नही चाहते है। किसानों का कहना है राज्य भर मे बहुत सी ऐसी जगह पडी है जो सेना को दि जा सकती है जो न केवल बेकार पडी है बल्कि न तो वहां इतनी आबादी है न विशेष उपजाऊपन जबकि हमारी जमीन बहुत ही उपजाऊ होने के साथ ही यहां पर सघन आबादी भी है। उन्होने कहा कि अवाप्त होने वाले लगभग सभी गांव विकसित गावों की श्रेणी मे भी आते है जहां पर सरकार अब तक करोडो रूपये लगा चुकी है और यहां पर सडक, स्कुल, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र जैसी आधारभुत सुविधाएं उपलब्ध है। इतना ही नही यहां पर बीकानेर का गौरव कहलाने वाली बेहतरनीन ऊन भी यहां चरने वाली भेडे ही देती है, विश्व प्रसिद्ध भुजिया बनाने के लिये उपयोग मे आने वाली दाल-मोठ भी इन्ही गांवो मे उगती है तथा देश भर मे जाने वाला दुग्ध भी यहां चरने वाली गायों से ही मिलता है। इतने गुणोंयुक्त इस जमीन को राज्य सरकार ने क्या सोचकर बंजर मानते हुए एनओसी जारी कर दी है।
आज हुए इस कार्यक्रम सभा के अध्यक्ष हाजी शेर खाँ मोहम्मद थे तथा किसानों का नेत्तृत्व कर रहे लुणकरणसर विधायक वीरेन्द्र बेनीवाल ने किसानो को सम्बोधित करते हुए कहा कि अवाप्त की जा रही भुमि को राज्य सरकार बंजर मान रही है जबकि हम हर साल १००० करोड की फसल लेते है तथा उच्च क्वालिटी की ऊन, उडद, मोठ और दुग्ध की विशेष पहचान है। सरकार को सेना की आवश्कता के नाम पर इन गांवो को अवाप्त किया जान यहा बसे ५०००० निवासियों के प्रति सरासर अन्याय है जिसको कभी सहन नही किया जायेगा। सरकार ने अगर समय रहते किसानो के हितो मे कोई कार्यवाही नही की तो पश्चिम बंगाल के एक नंदीग्राम की तरह यहां पर भी ५६ नंदीग्राम बन जायेगे। उन्होने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एनओसी जारी करते वक्त राज्य सरकार ने न तो यहां के सांसद से और न ही यहां के विधायक, प्रधान व सरपंच या अन्य किसी जनप्रतिनिधि से कोई बात की।
किसानो को सम्बोधित करते हुए बीकानेर जिला प्रमुख रामेश्वर डुडी ने कहा कि सरकार ने एनओसी जारी कर किसानो के प्रति अपनी संवेदनहीनता फिर से दर्शा दी है। भाजपा सरकार को निशाना बनाते हुए उन्होने कहा कि यह सरकार गोली और लाठी वाली सरकार है और किसान अपनी जमीन के लिये गोली खाने को तैयार है।
इस सभा को लुणकरणसर के प्रधान रूपाराम कुलडया, डेयरी चेयरमेन राजाराम जोहरड, डुंगरगढ के पूर्व प्रधान दानाराम भाम्भू, भोमराज आर्य, लक्ष्मण कडवासरा सहित ५६ गावों से आये अन्य सरपंचों व जनप्रतिनिधियों ने भी सम्बोधित किया और एक स्वर मे अपनी मांग रखते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर हम अपनी जमीन नही छोडेंगे क्योंकि यह हमारी माँ है। इस धरने व प्रदर्शन कार्यक्रम मे लगभग २००० हजार से अधिक किसान इकट्ठा हुए तथा अन्त मे जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। कलक्टर ने प्रतिनिध मण्डल को कहा कि किसानों की मांगो को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत मे किसानो को जब अपनी बात कहने के लिये बुलाया गया तो भीड मे से ही आयी एक महिला मंच पर आकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ जमकर बोलती रही तथा कई बार गाली-गलौच भरे अपशब्दों का प्रयोग करती रही। मणेरा गावं की यह महिला २० वर्ष पूर्व हुए ३३ गाँवों की भुमि मे से उसकी भुमि की अवाप्ति के एवज मे उसको अब तक कोई मुआवजा न देने की पीडा जाहिर करती रही।
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