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शिक्षा इंसानियत की तरक्की में सहायक हो-राज्यपाल

29 Dec 2007
राज्यपाल श्री एस. के. सिंह ने कहा है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे इन्सानियत की तरक्की हो। शिक्षा को बढावा देना अच्छी बात है लेकिन यह भी बात ध्यान में रखनी चाहिए
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जयपुर, २९ दिसम्बर। राज्यपाल श्री एस. के. सिंह ने कहा है कि  शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे इन्सानियत की तरक्की हो। शिक्षा को बढावा देना अच्छी बात है लेकिन यह भी बात ध्यान में रखनी चाहिए कि उससे मानव समाज में चाहे वे किसी भी वर्ग, धर्म या विचार के मानने वाले हों उनमें आपसी सद्भाव बढे। इससे सम्पूर्ण मानव समाज को लाभ होगा और सभी की तरक्की होगी।
 राज्यपाल आज यहां जामिया-तुल-हिदाया, जयपुर के प्रांगण में आयोजित भारतीय मूल के अमेरिकन फेडरेशन आफ मुस्लिम्स के तत्वावधान में १६वें अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन एवं गाला अवार्ड समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे भीतर आत्म सम्मान, आत्म निर्भरता और आत्म त्याग की भावना का विकास करना आवश्यक है। अगर यह तीनों चीजें विकसित हो जाए तो समाज और देश के व्यापक हित में होगा और ऐसा करके हम अपने आपको शिक्षित कर सकते हैं।
श्री सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में दो तरल पदार्थों पीने के पानी और तेल की कमी से भविष्य की चिन्ताएं बढ रही हैं। तेल उत्पादक देशों को इन चुनौतियों के प्रति गहराई से समझना होगा और मानव समाज के सुरक्षित भविष्य के संदर्भ में सोचना होगा।
राज्यपाल ने भारतीय मूल के अमेरिकन फैडरेशन आफ मुस्लिम्स द्वारा भारतीय मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक तरक्की में रुचि लेने और शिक्षा को बढावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों और विशेष रूप से दिए जा रहे सहयेाग की सराहना की तथा सुझाव दिया कि उन्हें एड्स, चिकित्सा सेवाओं, जल संसाधन आदि क्षेत्रें की बजाय शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपना ध्यान केन्दि्रत करना चाहिए जो कि बहुत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रतिभाशाली छात्र-छात्रओं को आगे बढने के अवसर देने के लिए नगद पुरस्कार देने से अधिक फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस्लामिक नजरिया रखने वाले और शिक्षा में उत्कृष्ट स्थान रखने वाले छात्रें को हमारे विश्वविद्यालयों में एक सप्ताह के लिए भेजकर उनके विचारों का आदान-प्रदान का कार्यक्रम सार्थक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि भारतीय उप महाद्वीप के अब्दुस सलाम और डा. मोहम्मद युनूस को अपनी प्रतिभा के बल पर नोबेल पुरस्कार मिले हैं लेकिन अब्दुल सतार को पाकिस्तान में अहमदिया और कादियान होने के कारण नागरिक सम्मान नहीं मिला।  
उन्हने कहा कि इस्लाम के जीवन मूल्य, इंसानियत, एक दूसरे के प्रति सहयोग और मिलकर तरक्की करने और उसमें सभी को भागीदार बनाने वाले हैं। उन्हें अंगीकार करने की आवश्यकता है।     
राज्यपाल ने मुसलमानों में अशिक्षा की चर्चा करते हुए कहा कि सच्चर कमेटी के सुझावों पर अमल हुआ तो शिक्षा का लाभ अधिकाधिक लोगों को मिल सकेगा लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय उप महाद्वीप के पडोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी निरक्षरता बहुत है। यह चिंता का विषय है और इस दिशा में  हमें वैश्विक दृष्टि से  सोचना होगा।               
राज्यपाल ने आंध्रप्रदेश की स्वयंसेवी संस्था ‘फीड‘ के चेयरमेन श्री गयासुद्दीन बाबूखान को आफमी सर सैयद अवार्ड से सम्मानित किया।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल पंडित नवल किशोर शर्मा ने कहा कि आज भी देश में गरीबी और अशिक्षा है। लगभग २६ करोड लोग गरीबी रेखा के नीचे जीते हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए लोगों को अपनी मानसिकता बदलने और उसके अनुरूप शिक्षा की महती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में मुस्लिम समुदाय बहुत तादाद में है जिसमें राजस्थान भी शामिल है। हमें उम्मीद है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के बाद कुछ राहत मिलेगी। उन्हने कहा कि इस समुदाय की सहायता के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आने की आवश्यकता है ताकि वे सही रूप में अपनी योजना बनाकर पेश कर सकें और इस समुदाय को लाभ दिला सकें। पण्डित शर्मा ने सुझाव दिया कि जकात का एक बडा हिस्सा अल्पसंख्यकों की तालीम पर खर्च किया जाना चाहिए क्योंकि इन्सान सबसे बडी दौलत है और उसको मजबूत बनाये जाने की जरूरत है।
हरियाणा के राज्यपाल डॉ. ए. आर. किदवई ने अपने सम्बोधन में कहा कि आजादी के बाद शिक्षा मंत्रलय ने विज्ञान एवं तकनीकी की बुनियाद पर  नए भारत का निर्माण करने का संकल्प लिया और परमाणु ऊर्जा केन्द्र, चिकित्सा एवं उच्च तकनीकी शिक्षा जैसे क्षेत्रें के विकास के लिए प्रयास किया। मंत्रलयों से अलग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन किया गया। इसी का परिणाम है कि देश और दुनिया में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विकास में भारतीयों की बडी भागीदारी है और उन्होंने प्रतिष्ठित स्थान बनाया।
डॉ. किदवई ने कहा कि अर्थ व्यवस्था की दृष्टि से भारत तीन वर्षों में तेजी से बढने वाला देश बन गया है और २०२० में इसकी गणना बडे देशों में होने लगेगी तथा २०४०-४५ में भारत का स्थान चीन और अमेरिका के समान होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि आजादी की तरक्की के साथ हमें उत्पादन और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में निरन्तर योगदान को बढाना होगा।
इससे पूर्व केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री रामविलास पासवान ने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ सद्भाव और सामाजिक न्याय के लिए वैचारिक तरीके से लडना होगा। हमारे देश की संरचना में हिन्दू-मुस्लिम, सिक्ख, इसाई और बौद्धों आदि को देखते हुए अल्पसंख्यकों और दलितों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न न हो, इस दृष्टि से सोचना होगा।
श्री पासवान ने अल्पसंख्यकों और दलितों की समस्याओं के निदान के लिए सभी से सहयोग की अपील करते हुए उनके अधिकारों की रक्षा करने में सहभागिता निभाने की अपील की।
इस अवसर पर यातायात मंत्री श्री युनूस खान, जामिया-तुल-हिदाया के हजरत अब्दुल रहीम मुजद्दीदी, ‘अफमी‘ के अध्यक्ष डा. शाकिर मुखी, भावी अध्यक्ष श्री अली कुरेशी और ट्रस्टी ए. एस. नाकादार के अलावा विश्व के विभिन्न देशों एवं भारत के विभिन्न प्रान्तों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
 इस अवसर पर राज्यपाल श्री एस. के. सिंह, श्री नवल किशोर शर्मा एवं डॉ. ए. आर. किदवई ने प्रतिभावान छात्रें को पुरस्कृत किया।



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