जयपुर, २९ दिसम्बर। आयुर्वेद एवं भारतीय औषध विभाग के प्रमुख शासन सचिव तथा कोटा जिले के प्रभारी सचिव श्री तपेन्द्र कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निर्धारित सीमा में कार्य पूर्ण करने पर इसकी समय-समय पर गुणवत्ता नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा जांच करायें। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए कार्य के परिमाण के अनुसार अधिक संख्या में श्रमिक व साधन लगाये जायें।
प्रभारी सचिव शुक्रवार को कोटा के टैगोर हॉल में आयोजित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक में अध्यक्षता करते हुए विभागीय कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में जिला कलक्टर श्री अभय कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
उन्हने कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि विशेष रूप से सडक निर्माण के समय स्लीप लेन व इण्डिकेटर आदि लगाये जावें जिससे कि आमजन को कम से कम असुविधा का सामना करना पडे। ऐसे कार्यों से दुर्घटनाएं नहीं हों इसके लिए संबंधित ठेकेदार से शर्तों के अनुरूप आवश्यक सुरक्षा उपाय किया जाना सुनिश्चित किया जावे।
प्रमुख शासन सचिव ने आमजन से जुडे विभागों विशेष रूप से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, विद्युत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे विभागों के अधिकारियों को संवेदनशील होकर कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने मध्यान्ह पोषाहार कार्यक्रम तथा आंगनबाडी केन्द्रों के प्रभावी संचालन पर बल देते हुए इन कार्यक्रमों की संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये। प्रमुख शासन सचिव ने कोटा शहर में विशेष रूप से पेयजल प्रबंधन को सुदृढ करने के लिए किये जा रहे कार्यों को संबंधित विभागों में आपसी समन्वय व तालमेल से पूरा करने तथा सडकों के कार्यों पर विशेष रूप से ध्यान देने की भी आवश्यकता प्रतिपादित की।
ग्रामीण क्षेत्रें में पहुंचे प्रभारी सचिव
जिले के प्रभारी सचिव श्री तपेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को जिले के सांगोद उपखण्ड के ग्राम कुराड, खजूरी, देवली एवं आवां में जिला कलक्टर के साथ पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा मौके पर किये गये कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
प्रभारी सचिव ने इन गांवों में जनप्रतिनिधियों, सरपंचों तथा नागरिकों के साथ जनसामान्य से जुडे विभागों के संबंध में विस्तार से विचार विमर्श किया। प्रभारी सचिव ने इन क्षेत्रें में पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति की स्थिति, सडक निर्माण कार्यों, टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना, स्वास्थ्य केन्द्रों में बीपीएल के लिए दवाइयों की उपलब्धता, आंगनबाडी केन्द्रों का संचालन, खाद-बीज की उपलब्धता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अन्त्योदय, अन्नपूर्णा एवं बीपीएल गेहूं का वितरण तथा हैण्डपम्पों की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा उपखण्ड अधिकारी व विकास अधिकारी भी साथ थे।