बीकानेर, इतिहास में तथ्य सबसे पवित्र होते है। तथ्यों पर आधारित पत्रों का वाचन बीकानेर में ३० व ३१ मार्च को गंगाशहर के डागा व हंशा गेस्ट हाउस में होने वाले राजस्थान इतिहास कांग्रेस के २३ में अधिवेशन में होगा। अधिवेशन में बिना किसी आइडयोलॉजी से प्रभावित तथ्यों पर आधारित पत्रों का चयन किया गया है।
अधिवेशन के संबंध में शनिवार को हंशा गेस्ट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी आयोजन समिति सचिव डा. गिरिजा शंकर शर्मा ने दी। शर्मा ने बताया कि अधिवेशन में राजस्थान के विभिन्न जिलों व क्षेत्राों के साथ देश के विभिन्न इलाकों के इतिहासकार, अध्येता, शोधार्थी व विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। डा. शर्मा ने बताया कि बीकानेर में वर्ष १९७०, १९८४ के बाद यह अधिवेशन हो रहा है। तेईस वर्षों के बाद होने वाले अधिवेशन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।
आयोजन से जुडे डा.के.एल. माथुर ने बताया कि सम्मेलन में इतिहास के विविध पहलू साहित्य, कला व संस्कृति पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी। प्रस्तुत तथ्यों पर गहन चित्रा किया जाएगा।
अलीगढ विश्व विद्यालय, अलीगढ के प्रोफेसर (इतिहास) बी.एल.भादाणी ने बताया कि राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास पर विश्व के अनेक देशों में भी शोध व चर्चा होती है। अधिवेशन में इतिहास की दशा और दिशा पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न विश्व विद्यालयों व महाविद्यालयों के इतिहास के विद्वान शोध पत्रा पढेंगे। इन शोध पत्राों का प्रकाशन भी किया जाएगा। इस अवसर पर डूंगर कॉलेज की व्याख्याता डा. अनिला पुरोहित व डा.राजेन्द्र पुरोहित ने भी विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। अधिवेशन का उद्घाटन पूर्व राजमाता सुशीला कुमारी रविवार सुबह साढे दस बजे करेंगी। मुख्य अतिथि बीकानेर विश्व विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सी.बी.गैना होंगे। अध्यक्षता प्रोफेसर बी.एल.भादाणी करेंगे। अधिवेशन में करीब १५० से १७५ के लगभग प्रतिभागी के शामिल होने की स्वीकृति मिली है।