शांति और आनंद नैतिकता और प्रमाणिकता से ही मिल सकते हैं - कमल मुनि
30 Apr
2007
सोमवार को समता भवन में अपने प्रवचन में कमल मुनि ने कहा कि गया हुआ समय पुनः लौट कर नहीं आता। अतः जीवन के हर पल को उन्नत बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाना चाहिए।
बांसवाडा, ३० अप्रैल। श्री जैन श्वेताम्बर तेरह पंथ के दसवे आचार्य महाप्रज्ञ के सुशिष्य कठोर तपस्वी कमल मुनि ने कहा कि शांति और आनंद नैतिकता और प्रमाणिकता से ही प्राप्त किये जा सकते हैं। सोमवार को समता भवन में अपने प्रवचन में कमल मुनि ने कहा कि गया हुआ समय पुनः लौट कर नहीं आता। अतः जीवन के हर पल को उन्नत बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाना चाहिए। अहिंसा, संयम और तप के जरिये ही शांति और आनंद मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मकान अच्छा है लेकिन व्यक्ति का अरमान अच्छा नहीं है। ऐसे में दुःख तो आएंगे ही। उन्होंने कहा कि दरअसल व्यक्ति जीने की कला जानता ही नहीं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने कहा था कि व्यक्ति को पराधीन नहीं स्वाधीन होना होगा। मगर आज व्यक्ति भौतिक सुखों की दौड में विभिन्न वस्तुओं पर आश्रित हो गया है जो पराधीनता का प्रतीक है। स्वाधीनता का तात्पर्य स्वयं का कार्य स्वयं करना है। उन्होंने कहा कि गुरू बिना ज्ञान नहीं और ज्ञान बिना कल्याण नहीं। उन्होंने कहा कि कांटो में रहकर भी फुल खुश रहते हैं ऐसे ही गुरू कृपा पाए व्यक्ति में अपार बल होता है। उन्होंने कहा कि साधु और संत धर्म के प्रचार के लिए घुमते हैं। इस अवसर पर राजेन्द्र मेर, दिनेश कोठारी, शम्भूलाल हिरन, पन्नालाल लालवानी, कानसिंह राका, अजीत जैन, विनोद जैन, सुनील जैन सहित अनेकों श्रद्घालु उपस्थित थे। प्रवचन में बडी संख्या में महिला श्रद्घालु उपस्थित थी। मुनिश्री का मंगलवार को प्रवचन गोकुल विहार कॉलोनी में होगा।
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