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अरहर उत्पादकता पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
30 Jun 2007

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One day workclass come off on Arhar Procreantबांसवाडा, 3॰ जून। अरहर उत्पादकता 15॰ फीसदी तक बढाने के उद्देश्य को लेकर शनिवार को स्थानीय सूचना केन्द्र में एक दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अरहर फसल का उत्पादन 15॰ फीसदी तक बढाने के लिये तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए उप निदेशक कृषि सत्यदेव सिंह ने प्रमाणित बीज, बीज उपचार, बुवाई के समय उर्वरक उपयोग, कीट नियंत्रण एवं अरहर फसल के क्षेत्रफल को बढाने की जानकारी दी। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की जानकारी कृषकों तक पहुंचाने व सिफाशि अनुरूप उर्वरकों का उपयोग कराने की जरूरत बताई। सिंह ने सौ फीसदी बीज उपचार के बारे में समस्त कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा तैयार की गई कार्य योजना अनुसार निजी व सरकारी संस्थाओं पर बीज उपचार के लिये कृषि पर्यवेक्षकों को अपनी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। सिंह ने बताया कि अरहर उत्पादन बढाने के लिये जिले में पचास हैक्टयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 52 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है जिसमें सघन प्रचास कर अरहर उत्पादन को बढाने के लिये विभिन्न कारकों को अपनाने के लिये आवश्यक आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाकर इंसानों को तकनीकी जानकारी के लिये साहित्य वितरण, कृषक गोष्ठियों का आयोजन, प्रदर्शनी आदि कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। उन्होंने अरहर की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारकों की जानकारी देते हुए बताया कि अधिकांश कृषक प्रमाणित बीजों का उपयोग नहीं करने, उर्वरकों के साथ बीज मिलाकर बोने, जिप्सम व सल्फर खादों का उपयोग, बीज उपचार, समय पर पौध संरक्षण, रसायनों का उपयोग नहीं करने, मिलवा खेती करने आदि कारणों से अरहर की पैदावार प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए जिले में अरहर की पैदावार जो वर्तमान में 45॰ किग्रा प्रति हैक्टयर है को बढाकर 7॰॰ किग्रा तक पहुंचाने की तकनीकी जानकारी कार्यशाला में दी। कार्यशाला में 15॰ फीसदी अरहर उत्पादकता का प्रोजेक्ट तैयार कर तकनीकी जानकारियां दी गई। सहायक निदेशक कृषि बागीदौरा ने बताया कि यदि कम लागत में पौध की बीमारी व कीट नियंत्रण करना है तो बीज उपचार ही एक मात्र माध्यम है। उन्होंने जिले के समस्त कृषि पर्यवेक्षकों से सौ फीसदी बीज उपचार के लिये कीटनाशी रसायन विभिन्न विक्रेताओं के माध्यम से कृषकों को उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिये। कार्यशाला में जिले के समस्त सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक उपस्थित थे।




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