डिजिटल मनोरंजन कारोबार की दुनिया में एक नया आयाम, एक साल में २००० टाईटल्स के अधिकार खरीदने का लक्ष्य, दुनिया की सबसे बड़ी भारतीय मनोरंजन लायब्रेरी की योजना
मुंबई, २९ अगस्त, २००७: बिग फिल्क्स डॉट कॉम जो रिलायंस एडीए का ही एक भाग है, ने आज ऑन-डिमांड मूवी सेवा की शुरूआत किए जाने की घोषणा की। इसके तहत भारतीय फिल्म जगत की हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, पंजाबी और कन्नड़ फिल्में डाउनलोड की जा सकेगी। इन फिल्मों की गुणवत्ता भी बेहतरीन रहेगी । दर्शकों के पास इस बात का विकल्प होगा कि वे या उचित मूल्य चुकाकर डाउनलोड करके हासिल करें या मुफ्त देखें। इस पोर्टल पर कई आकर्षक और सुविधाजनक और मूल्य आधारित मनोरंजन विकल्प दिए गए हैं ताकि भारतीय सिनेमा के शौकीन विदेश में बसे भारतीयों और भारतीय दर्शकों को उनकी पसंद की मनोरंजन सामग्री बगैर किसी कठिनाई के घर बैठे मिल सके। कंपनी द्वारा ऑन लाईन होम डिलीवरी के माध्यम से और नेटवर्क दुकानों के माध्यम से किराए पर फिल्में देने सेवा भी शुरु की जा रही है। सितंबर माह में देश के १० बड़े शहरों में यह सेवा शुरु कर दी जाएगी।
बिग फ्लिक्स डॉट कॉम बेहतरीन गुणवत्ता वाली वीडिओ सामग्री के साथ अपना दायरा उत्तरी अमरीका, यूके, कनाडा, मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और आस्ट्रेलिया तक फैलाना चाहती है ।
यह जानकारी देते हुए रिलांयस एंटरटेनमेंट के अध्यक्ष श्री राजेश साहनी ने कहा कि बिग फ्लिक्स डॉट कॉम भारतीय फिल्म उद्योग के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके माध्यम से हम लाखों करोड़ों घरों तक उनकी पसंद की फिल्में पहुँचाना चाहते हैं। हमने यह अनुभव किया है कि विकसित अर्थव्यवस्था के इस दौर में लोगों की आमदनी का स्तर बढ़ने के साथ ही घरेलू मनोरंजन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। हॉलीवुड की एक फिल्म थिएटरों में प्रदर्शन की तुलना में घरों में होम थिएटर के माध्यम से ज्याजा राजस्व कमाती है , जबकि भारत में इसका उल्टा है। इसका कारण है हमारे यहाँ होम एंटरटेनमेंट का व्यापक विकास और असरकारक नहीं होना है।
इस उपक्रम के माध्यम से हम एक ऐसा बिज़नेस मॉडल बनाना चाहते हैं कि एक मल्टी चैनल डिस्ट्नीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर ब्रॉड बैंड, इंटरनेट और होम डिलीवरी और रिटैल दुकानों के जरिए हर तरह के उपभोक्ताओं को उनकी पसंद के मनोरंजक कार्यक्रम उपलब्ध करा सकें। दूसरा, हमारा मानना है कि बिग फिल्क्स डॉट कॉम दुनिया भर में भारतीय मनोरंजन जगत का मुख्य केंद्र बन कर उभरेगी। आज नेट पर प्रतिदिन १ अरब लोग आते हैं, और ब्राड बैंड के निरंतर विकास को देखते हुए हमारे पोर्टल के माध्यम से भारतीय फिल्म उद्योग को अमरीका, कनाडा, यूरोप, जापान और यहाँ तक कि दक्षिण अमरीका तक के दर्शकों तक सीधे पहुँचने का मौका मिलेगा।
श्री साहनी ने कहा कि इस उपक्रम से हमारे इस विश्वास की पुष्टि होती है कि दुनिया भर में भारतीय मनोरंजन सामग्री की जबर्दस्त मांग है, और इसको विश्वव्यापी स्तर पर पहुँचाया जाना चाहिए, इस मामले में ये तथ्य हमारे सामने आए हैं:
अमरीका का दक्षिण एशियन बाज़ार किसी भी स्थानीय या गैर सामुदायिक समूह में सबसे असरकारक समूह है
अमरीका में ८८ प्रतिशत लोग भारतीय वेब साईट देखते हैं ७७ प्रतिशत से अधिक एशियन-भारतीयों के घरों में कंप्यूटर है जो अमरीका के राष्ट्रीय औसत से ३५ प्रतिशत अधिक है
ऑन लाईन भारतीयों के लिए इंटरनेट पहली वरीयता बन चुका है, ६० प्रतिशत भारतीय प्रतिदिन नेट पर जाते हैं और विगत ३० दिंनों में ६६ प्रतिशत लोगों ने भारतीय वेब साईट पर उपस्थिति दर्ज कराई है। वे औसत अमरीकी से दुगुना कमाते हैं।
पिछली जनसंख्या की गणना के अनुसार भारतीयों की आमदनी ६८, ७७१ अमरीकी डॉलर है। जहाँ तक शिक्षा के स्तर का सवाल है, इनमें से ६१ प्रतिशत के पास कॉलेज स्तर की डिग्री है ।
इनमें से ८१ प्रतिशत तकनीकी कामकाज और वेब साईट के अभ्यस्त हैं, और ८१ प्रतिशत के पास अपने घरों में ब्रॉड बैंड सुविधा है। इस तरह यह संख्या ३० से ५० लाख लोगों की हो जाती है, हम कह सकते हैं कि यह संख्या अपने आप में पर्याप्त है।
बिग फ्लिक्स डॉट कॉम के मुख्य ऑप्रेटिंग ऑफिसर श्री कमल ज्ञानचंदानी ने कहा कि लगभग २.५ करोड़ आप्रवासी भारतीय, जिनमें छात्र और कामकाजी लोग शामिल हैं, दूसरे देशों में रह रहे हैं, जो नियमित रूप से भारतीय मनोरंजन कार्यक्रमों को देखना पसंद करते हैं, जो उनको अपने घर और देश से जोड़े रखते हैं और भारतीय संगीत और फिल्में उनकी पहली पसंद है। भारतीय दर्शक बड़ी संख्या में हैं मगर वे अलग- अलग जगहों पर बिखरे हुए हैं और परंपरागत थिएटरों या फिल्म वितरण के माध्यम से उन तक पहुँचना बेहद मुश्किल है। दूसरी ओर पायरेसी की वजह से मांग और पूर्ति का संतुलन भी बिगड़ा है। ऑन लाईन मूवी डाउन लोड सेवा दुनिया के अलग-अलग कोनों में बैठे दर्शकों के लिए एक अनुपम सौगात की तरह होगी, वे आसानी से अपनी पसंद की फिल्म अपने घर में देख सकेंगे, इसके लिए उनको थिएटर की तलाश में कहीं आना-जाना भी नहीं पड़ेगा। हम इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं कि इंटरनेट पर नई फिल्म के प्रदर्शन के माध्यम से अब हम पायरेसी को काफी हद तक रोकने में सफल होंगे और वैधानिक तरीके से तुलनात्मक प्वाइंर्ट्स के माध्यम से कीमत का निर्धारण भी किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि फिल्मों का ऑन लाईन वितरण फिल्म निर्माताओं के लिए एक तरह से अतिरिक्त पैसा कमाने का जरिया हो जाएगा।