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दौड लगा रहे चांदी के सिक्के
30 Sep 2009

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बीकानेर, दीपावली पूजन और उपहार में देने के लिए चांदी के सिक्कों की मांग त्योहारों पर बढ जाती है। हर वर्ष दीवाली फेस्टिवल पर ग्राहक इनकी खरीदी में ज्यादा रूचि लेते हैं। लेकिन इस बार सिक्कों के बढते भाव ने न केवल ग्राहकों बल्कि कारोबारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी है।
सिक्कों में फिलहाल मांग कमजोर है। सितम्बर माह में ही इनमें 10 फीसदी से अधिक की तेजी आ चुकी है। पुराना कलदार (सिक्का) 425 से 430 रूपए के आसपास बिक रहा है। इसी प्रकार लक्ष्मी गणेश की मूर्ति वाले सिक्कों की कीमत 250 रूपए से बढकर 275 से 280 रूपए पर आ गई है। बाजार में सोने के सिक्के भी 1 से 10 ग्राम वजन में उपलब्ध है। इनकी कीमत 1800 से शुरू होकर 16700 रूपए तक बताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि चांदी के भाव 26000 रूपए पर पहुंचने से सिक्के भी महंगे हो गए। ढलाई केन्द्रों पर तेजी के चलते रिटेलरों को भी महंगे सिक्के खरीदना पड रहा है। सितंबर में चांदी के भावों में तीन हजार रुपये प्रति किलो की वृद्धि आने से व्यापारियों को अब चिंता सताने लगी है।
अब इसमें गिरावट आ गई है। बताते हैं कि रिटेलरों की खरीदी के समय चांदी के भाव आसमान पर थे, इसलिए सिक्कों में भी तेजी बनी हुई है। सराफा कारोबारी गोपाल सोनी कहते हैं कि सोने की बजाय चांदी के सिक्कों की मांग हर साल बढती जा रही है। उनका कहना है कि इस बार चांदी में तेजी का असर जेवरों के अलावा सिक्कों पर भी आया है।
सिक्कों के बढती मांग के बीच पुराने कलदार सिक्कों का उठाव त्यौहारों पर कम होता है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि कलदार का वजन पुराने तोले के हिसाब से 11 ग्राम ६६० मिलीग्राम होता है, जबकि नए लक्ष्मी, गणेश वाले सिक्के 5 और 10 ग्राम वजन के होते हैं। कलदार का मूल्य 42000 रूपए सैकडा होलसेल में बताया जा रहा है जबकि 5-10 ग्राम वाले सिक्कों की कीमत 15000 से 28000 रूपए के बीच में है।
चांदी के सिक्के पहले 100 फीसदी चांदी के बने होते थे, लेकिन अब इसमें चांदी की शुद्धता में कमी आने लगी है। बाजार में 80 फीसदी तक के सिक्के भी विऋय हो रहे हैं। ऐसे सिक्के थोडे समय बाद काले पडने लगते हैं। दीवाली पर होने वाली पूजन में जेवरातों के अलावा चांदी के सिक्कों का अपना महत्व होता है। ग्राहक अपनी अपनी आर्थिक क्षमता के हिसाब से सिक्के खरीदकर इनका पूजन करते है।

क्या कहते हैं सर्राफा व्यवसायी
सिक्कों में इस साल तेजी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उठाव फिलहाल कमजोर है। दशहरा बाद ही ग्राहकी का रूख दिखेगा। - महेश सोनी, महेश ज्वैलर्स
चांदी के सिक्कों का उठाव बाजार में कमजोर है। लोग देख रहे हैं कि इनके भाव थोडे कम हो जाए। तेजी रही तो दीवाली पर सिक्कों की मांग कम रहेगी।- बाबूलाल सोनी, मूलजी ज्वेलर्स
पूजन और उपहार में सोने-चांदी के सिक्के देने का चलन बढता जा रहा है। तेजी -मंदी का मांग पर ज्यादा असर नहीं होता, क्योंकि बाजार में हर रेंज में सिक्के उपलब्ध है। - राधेश्याम सोनी, सराफा कारोबारी




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