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स्वदेशी व लघु उद्योगों के लिए नया पैकेज शीघ्र-मुख्यमंत्री
30 Oct 2007

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि स्वदेशी एवं लघु उद्योग के लिए एक से आठ दिसम्बर के बीच राज्य में नया पैकेज लाया जा रहा है और दिल्ली की तर्ज पर लघु उद्योगों के विकास के लिए नई पॉलिसी बनाने का कार्य चालू कर दिया है।


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जयपुर, ३० अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि स्वदेशी एवं लघु उद्योग के लिए एक से आठ दिसम्बर के बीच राज्य में नया पैकेज लाया जा रहा है और दिल्ली की तर्ज पर लघु उद्योगों के विकास के लिए नई पॉलिसी बनाने का कार्य चालू कर दिया है।
 श्रीमती राजे मंगलवार को जोधपुर के पोलो मैदान में आयोजित आठ दिवसीय स्वदेशी मेले के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। सांसद श्री राजनाथ सिंह ने इस मेले का उद्घाटन किया तथा अध्यक्षता पूर्व सांसद श्री महेश शर्मा ने की। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण दवे, राजस्व मंत्री श्री रामनारायण डूडी ,विधानसभा उपाध्यक्ष श्री राजनारायण विश्नोई, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लोकेश कुमार शेखावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
 मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देने और विकास करने की राज्य सरकार की सोच रही है। स्वदेशी और लघु उद्योग का काम सबसे जुडा हुआ है। हम बुनियादी तौर पर इसके लिए नीचे से नींव को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढना चाहती है इसीलिये नया पैकेज लाकर दिल्ली में लघु उद्योगों की तरह राजस्थान में भी नीति बनाने का कार्य चालू कर दिया है। उन्होंने कहाकि लघु उद्योगों के क्षेत्र में आने वाली महिलाओ को एक प्रतिशत ब्याज दर में छूट भी दी जाएगी। उन्होंने स्वदेशी एवं लघु उद्योगों के महत्व पर चर्चा की और कहाकि राजस्थान में खादी व कोटा डोरिया को लेकर एक अनूठा नया कार्य किया है। कोटा व जयपुर में दस्तकारों ,बुनकरों के स्कूलों को शुरू किया व उनको बीमा करवाने मे मदद की। लघु उद्योग के क्षेत्र में १० ग्रामीण हाट व दो अरबन हाट बनाने के साथ ही ९० मेले व प्रदर्शनियां लगायी गई। इसके साथ ही ४३ हजार से अधिक दस्तकारों को पहचानपत्र व नौ हजार क्रेडिट कार्ड जारी किए गए।
 श्रीमती राजे ने कहा कि पहली बार जब उनको दस्तकारों ने साडी भेंट की तो उसे पहनकर दुनिया व देश को बताया कि यह काम हमारे राजस्थान के बुनकरों का है। बीकानेर के बुनकरों ने भी कहा कि आज उनको मिले प्रोत्साहन से वे जहां से शुरू हुए थे आज कहीं ऊंचाई तक पहुंच गए। वहां बुनकर सीताराम ने तो उनको यहां तक बताया कि दुबई जाते हुए रास्ते में हवाई जहाज में ही उनका सब हस्तनिर्मित स्वदेशी माल की बिक्री हो गई। उन्होने कहाकि राज्य सरकार के प्रोत्साहन देने से ही आज बुनकरों व दस्तकारों को प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है और जो प्रशिक्षित होकर बाहर जा रहे हैं उनको ब्याज अनुदान भी दिया जा रहा है। जोधपुर में ग्वारगम व हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए शोध केन्द्र की आधारशिला भी रखी है। इसको जल्दी शुरू करवाने के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक है।
 मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजस्थान को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रयासों में कोई कमी नहीं रखेंगे । उन्होंने कहाकि पूर्व सरकार की तरह हम यह नहीं कहते कि हमारे पास पैसा नहीं है । हमारी सरकार में पैसों की कमी नहीं है। मन में इच्छाशक्ति होनी चाहिए । आज हमारा राज्य बीमारू प्रदेश को तेजी से आगे निकालकर देश के अग्रणी राज्यों में खडा किया है। हमारा प्रदेश देश के एक नम्बर पर हो जाएगा उसकी हमें खुशी होगी । श्रीमती राजे ने कहा कि यह कभी नहीं कहा कि वे नम्बर एक मुख्यमंत्री हैं। उनका प्रयास तो राजस्थान को देश के पहले नम्बर पर लाने का है। उन्होंने कहाकि राजस्थान में गत चार वर्षो में ढाणी से गांव और शहर तक कोई कमी महसूस नहीं होने दी और सडक ,शिक्षा ,पानी, बिजली, चिकित्सा जसी मूलभूत सुविधाओं के साथ विकास के कार्य करवाएं। जोधपुर में हमने एम्स की आधारशिला रखी मगर अब जरूरत केन्द्र सरकार को कार्य करने की हैं। जिले में पेयजल के लिए हजारों करोड की परियोजना के काम हो रहे हैं तो शहर में भी कोई कमी नहीं रखी है।
 स्वदेशी मेले के उद्घाटनकर्ता सांसद श्री राजनाथसिंह ने कहा कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के प्रभाव के बावजूद भी स्वदेशी की प्रासंगिकता बढ गई है। स्वदेशी का भाव हर व्यक्ति में होना चाहिए इससे स्वावलम्बन सार्वभौमिकता का भाव रहेगा। दुनिया के अन्य देशों में भी स्वदेशी भाव देखने को मिलते हैं। महात्मा गांधी ने भी ग्राम स्वराज्य, रामराज्य के साथ स्वदेश की बात कही थी। हमें उनके भावों को छोडना नहीं है । उन्होंने कहाकि देश के विकास का ऐसा मॉडल होना चाहिए जिसमें हमारी संस्कृति, परम्पराएं व स्वदेश की भावना आगे बढे। स्वदेशी हमारे देश की व्यवहारिक अभिव्यक्ति है। स्वदेशी भाव से ही महान भारत का निर्माण हो सकता है। देश मे वेश, भाषा, तत्वदर्शन, विचार हर चीज में स्वदेशी का संदेश जाना चाहिए।
 उन्होंने कहा कि हमारे देश में जिस दिन हर चीज स्वदेशी हो जाएगी उस दिन से यह देश विश्व का नेतृत्व करेगा। मगर ऐसा करने के लिए सचमुच की इच्छाशक्ति की जरूरत है। इसके विचार व्यवस्था ,नेतृत्व व सभी स्वदेशी होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आठ वर्षो तक गेहूं का आयात तक नहीं किया गया तथा वर्तमान में यह फैसला किया गया है कि दूसरे देशों से गेहूं आयात करेंगे। कृषि उत्पाद किसी भी सूरत में दूसरे देशों से आयात नहीं होने चाहिए बल्कि इसके स्थान पर किसानों के उत्पाद की कीमत बढनी चाहिए ताकि वह और दूने उत्साह से काम कर सकें।
 उन्होंने कृषि पर जोर देते हुए कहाकि किसानों की स्थिति पर ध्यान दिया जाए तो देश कभी पिछड नहीं सकता। शेयर मार्केट व इस तरह की अन्य चीजों की अपेक्षा थोडी सी चिंता भी अगर किसानों की कर ली जाए तो उनके फटेहाल होने या आत्महत्या करने की स्थिति का सामना ही नहीं करना पडे। राजस्थान के हस्तशिल्प की चर्चा करते हुए श्री राजनाथसिंह ने कहाकि यहां की हस्तशिल्प कला ने न केवल देश-विदेश में ख्याति अर्जित की है बल्कि लाखों लोगों को रोजगार सुलभ करवाया है। यहां तक कि राज्य के बाहर से भी लोग हस्तशिल्प का प्रशिक्षण लेने आते हैं जिससे ५ लाख से ज्यादा को रोजगार मिला है।
 समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद डा. महेश शर्मा ने कहाकि भूमंडलीकरण की चर्चा के बीच स्वदेशी मेला हमारी अर्थ व्यवस्था में स्वदेशी का तत्व प्रभावी है। हम परस्पर आवलंबी नहीं होंगे तब तक आगे नहीं बढ सकते। स्वदेशी मंच पर यहां विके्रता ,उपभोक्ता व स्वदेशी उत्पाद तीनों का संगम है। हम स्पर्द्धसित हों पर आज ताकत मेनुपलेशन की बन गई है। आज हमारी छाछ व देशी शर्बत की तुलना अगर कोला पेयों से की जाए तो जीतेंगे हमारी छाछ व शर्बत ही मगर केवल ‘स्टेटस सिंबल‘ के नाम पर मूल्य रचनाओं को ध्वस्त कर दिया जाता है। सांसद श्री शर्मा ने कहाकि भारतमाता रत्नगर्भा है तथा हमारी प्राकृतिक संपदा पर विदेशियों का अधिकार दुर्भाग्यशाली है। उन्होंने स्वदेशी जागरण को मूलमंत्र बताते हुए कहाकि दतोपंत ठेंगडी ने स्वदेशी मंच का आधार रखा। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि है तथा किसान की ताकत ही हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती बन सकती है।
 स्वदेशी मेला के संयोजक सांसद श्री जसवंतसिंह विश्नोई ने कहा कि स्वदेशी मेला स्वदेशी भावना को बढावा देने का सशक्त मंच है। करीब साढे पांच सौ स्टालों में पूर्णतः स्वदेशी माल है तथा विदेशी माल बेचने की अनुमति तक नहीं दी गई है। हमारे उद्यमी मेहनती हैं तथा यहां के टैक्सटाईल ,ग्वारगम आदि नंबर एक पर हैं। उन्होंने नगर विकास न्यास के विकास कार्यो व गौरव पथ निर्माण की चर्चा की।
 इस अवसर पर सांसद श्री राजनाथसिंह एवं मुख्यमंत्री ने देवस्थान विभाग की ओर से लटियाल माता मंदिर फलौदी के विकास के लिए तेरह लाख तथा गौतम ऋषि समाज को बतीस लाख रूपये की राशि के चैक भेंट किए । उन्होंने राज्य सरकार की किसान जीवन कल्याण योजना के तहत आठ महिलाओं को ५ लाख ७२ हजार रूपये की राशि के चैक उपलब्ध करवाएं।
 समारोह में विधायक श्रीमती सूर्यकांता व्यास, श्री बाबूसिंह राठौड, श्री मोहन मेघवाल, श्री बन्नेसिंह राठौड, श्री जोगाराम पटेल, डॉ. जालमसिंह रावलोत, जिला प्रमुख श्रीमती अमिता चौधरी व जैसलमेर के श्री सल्ले मोहम्मद, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष श्री मदनमोहन माथुर, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव श्री घनश्याम ओझा तथा विभिन्न उद्योगों के संगठनों के पदाधिकारी व उद्योगपतियों सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। समारोह के स्वागताध्यक्ष नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र गहलोत ने आभार व्यक्त किया।




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