पैतृक एवं श्रेत्रीय व्यवसाय रोजगार की खान-कल्ला
30 Dec
2009
ईश्वर आईडियल सोसायटी फॉर हूमन वेलफेयर एण्ड रिसर्च संस्थान बीकानेर द्वारा 30 दिवसीय व्यवसाय कौशल विकास कार्यक्रम का समापन समारोह एवं पूर्व में आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अनुवर्तन सत्र तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यवसायी श्रीलाल व्यास ने बताया कि युवाओं को जीविकोपार्जन हेतु उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में स्व रोजगार को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए। व्यास ने बताया कि उधमिता एक ऐसी जीवन शैली है जिसे अपना कर कोई व्यक्ति नवाचार उपक्रमों द्वारा सामाजिक उत्थान में यक्ष भूमिका का निर्वहन कर सकते है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अनिल कल्ला, प्रबंध निदेशक थार सिरेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने बताया कि प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली मूल्य आधारित थी जिसमें शिक्षा का उदेश्य मानव मात्र का कल्याण एवं विकास होता था जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में देश, काल एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन होकर व्यावसायिक परिवेश के अनुकूल पीढी तैयार करना हो गया है जिससे शिक्षा अपना मर्म खोती जा रही है। कार्यक्रम के प्रमुख प्रशिक्षक डॉ गिरिराज किराडू, एसोसिएट प्रोफेसर अभियांत्रिकी महाविधालय बीकानेर ने बताया कि बचपन से ही उधमिता को एक संस्कार के रुप में दिया जाना चाहिए। डॉ गिरिराज ने बताया कि आज कि सबसे बडी समस्या यह है कि परिवार जन बच्चों को स्नेह वश अति संरक्षण प्रदान कर उनको दैनिक कि्रयओं में आत्मनिर्भर बनने से रोक रहे है जिससे जीवन की शुरुआत में ही वे पराश्रित होकर स्वावलम्बन जैसे गुणों से वंचित हो रहे है जो उधमिता विकास में सबसे बडी बाधा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागी तृप्ति, मोक्षी, केशव, वीर, राघव, सुमित, चेतन, अनुराधा व अमिता ने मनमोहक प्रस्तुतियां प्रदान कर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ गिरिराज किराडू, डॉ बिठल बिस्सा, प्रो एस एल रंगा, प्रो राकेश हर्ष, डॉ प्रकाश आचार्य , एन डी व्यास, सुधीश शर्मा (सीए), विजय मोहन व्यास को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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