बेणेश्वर एनीकट ने बदली है आदिवासियों के आस्थाधाम की तस्वीर आस्थाओं को सम्मान, वागड प्रयाग को मिला एनीकट का वरदान Regional Hindi Regional News, Regional Latest News, Regional Hindi News, Regional English News, Business News">
बेणेश्वर एनीकट ने बदली है आदिवासियों के आस्थाधाम की तस्वीर Regional Hindi News : khabarexpress.com : The news portal of North India
खबरएक्सप्रेस 31 जनवरी/ माही और सोम-जाखम नदियों के संगम तट पर अवस्थित लाखो जनजाति जनों की अगाध आस्था के केन्द्र बेणेश्वर धाम टापू पर इस वर्ष आयोजित होने वाला राष्ट्रीय जनजाति मेला इस श्रद्घाधाम की बदली हुई तस्वीर के साथ मनाया जा रहा है । धाम की बदलने वाली तस्वीर का सूत्रधार बनने वाला जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा बनाया गया साढे चार करोड लागत का एनीकट अपनी बांहों में विशाल जल राशि समेटे आने वाले श्रृद्घालुओं का स्वागत करने को तत्पर है। एनीकट का लोकार्पण गुरूवार को प्रदेश की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे द्वारा किया जाएगा। इस विशाल एनीकट के माध्यम से राज्य सरकार ने इस स्थान से जुडी लाखों आदिवासी जनों की आस्थाओं का सम्मान किया है वहीं इस मनोहारी तीर्थ के नैसर्गिक परिवेश को निखारते हुए पर्यटन विकास की संभावनाओं को तलाशा है। हर वर्ष मेंले में शिरकत करने वाले श्रृद्घालुओं के लिए यह एक आश्चर्य मिश्रित सुखद अनुभव प्रदान करने वाला दृश्य होगा जब सात वर्ग किलोमीटर विशाल क्षेत्र में फैली नीली स्वच्छ जल राशि के अवलोकन से इस धाम पर वे एक नवीन निर्माण की दूरदर्शितापूर्ण योजना के साकार स्वरूप का दर्शन करगे। प्रदेश के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री कनकमल कटारा के भागीरथ प्रयासों से प्रदेश की मुख्य मंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया द्वारा वनवासीजनों को वरदान रूप में दिया गया यह एनीकट अपने आप म एक ऐतिहासिक निर्माण है जिससे यह स्थल जहां पर्यटन मानचित्र पर उभर कर आएगा और माही नहर के पानी को तरसते इस क्षेत्र के 2500 हेक्टर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा भी मुहैया करवाई जा सकेगी। जनजाति क्षेत्रीय विकास मद से चार करोड 59 लाख रूपयों की लागत से बनाये गये इस एनीकट के निर्माण के लिए कार्यकारी एजेन्सी सद्गुरू फाउंडेशन के तीन कुशल इंजीनियरों के निर्देशों में निर्धारित योजनानुसार 300 श्रमिकों के अहर्निर्श परिश्रम के परिणाम के रूप में यह एनीकट अपने निर्माण के स्वप्न के साथ के साथ जुडी दृढता को स्वयं अभिव्यक्त कर रहा है। गत वर्ष हुई भारी वर्षा एवं इस दौरान माही में बहकर आती प्रचण्ड जल राश् के समक्ष अटल स्वरूप में खडे इस एनीकट की गुणवत्तायुक्त निर्माण व दृढता स्वतः ही प्रमाणित हो गई है। सद्गुरू फाउंडेशन के डॉ. राकेश पाण्डे द्वारा बेहद अनोखे ढंग से डिजाइन किए गए इस एनीकट को पूरी गुणवत्ता व दूरदर्शिता के साथ निर्मित किया गया है और इसके निर्माण में पर्याप्त मशीनरी और इस कार्य के सिद्घहस्त श्रमिकों का सहारा लिया गया है जिससे यह एनीकट क्षेत्र के लिए उपयोगी बन सकें। एनीकट की कुल भराव क्षमता 350 मिलयन क्यूबीक फिट है और इस भराव क्षमता से लिफ्ट परियोजनाओं के माध्यम से 2400 हेक्टर से अधिक क्षेत्र को सिंचित किया जा सकता है। 367 मीटर लम्बाई वाले इस एनीकट की चौढाई भूसतह पर 9.50 मीटर है जबकि उपरी भाग में यह 1.50 मीटर है जबकि इस एनीकट की नींव 15.50 मीटर चौडाई में भरी गई है। गौरतलब है कि इस ऐतिहासिक निर्माण में सामान्य एनीकटों से हटकर कुछ नवीन तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया है और यह पूर्णतया आधुनिकतम तकनीक युक्त एनीकट है। इस धाम पर आने वाले श्रद्घालुओं को अधिक और स्वच्छ जल हरदम प्राप्त हो इस दृष्टि से इस ऐनीकट म कुल 74 छोटे-मोटे गेट लगाए गए हैं। गंदले पानी को निकालने और सामान्य एनीकटों के पेंदें मे जमने वाली मिट्टी और बडे पत्थरों की समस्या से निबटने के लिए इस एनीकट के निचले स्तर पर स्लूइस ड्रेन के रूप में 30 छोटे गेट लगाए गए है जो वर्षा ऋतु के आरंभिक दौर में नदी में पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और अन्य गंदगी को निकाल देंगे व इसकें पेंदे में मिट्टी और यह गंदगी जम नहीं पाएगी। इन ड्रेन के निर्माण से जहां इस एनीकट की भराव क्षमता भी बनी रहेगी वहीं एनीकट से ज्यादा शुद्घ पानी प्राप्त होगा। इसी प्रकार आपदा स्थिति से निबटने के लिए जहां एनीकट के उपरी भाग में 44 गेट अन्य लगाए गए हैं वहीं एनीकट के एक छोर पर भूसतह पर तीन विशाल पाईप भी लगाए गए है जो आपदा स्थिति में इस एनीकट का पानी किसी भी क्षण निकालने के लिए तैयार रहेंगे। इस समस्त 74 गेटों को खोलने के लिए विशेष प्रकार का हाइड्रोलिक सिस्टम भी बनाया गया है। इस एनीकट के निर्माण से आस पास की कृषि भूमि को सिंचित करने के लिए 77.05 लाख 7 लिफ्ट सिंचाई सुविधाऐं विकसित की जा रही हैं जिनसे 325 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी तथा 250 जनजाति काश्तकारों को कृषि विकास का आधार प्राप्त होगा। इसी प्रकार 8 कि.मी लंबे 300 मीटर चौडे जलाशय में नौकायन, जल क्रिडाओं व अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास को आधार मिलेगा तथा सदानीरा सुरम्य झील से पेयजल सुविधा व बोतल बन्द पानी की व्यावसायिक गतिविधियों को भी विकसित किए जाने की संभावनाएं है। सरकार की इस महत्त्वकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने से निश्चित ही इस जनजाति अंचल के निवासियों को राहत प्राप्त होगी।