श्रद्धा से नतमस्तक हुए श्रावक-श्राविकाएं, उमड पडा आस्था का ज्वार
बांसवाडा (वागड विजन) ज्योतिष सम्राट एवं तीर्थ प्रेरक मुनिप्रवर ऋषभविजय जी मा.सा. एवं मुनिश्री रजतविजयजी मा.सा. ने सोमवार सांय बांसवाडा शहर में मंगल प्रवेश किया।
महाराणा प्रताप सरि्कल उदयपुर रोड पर बडी संख्या में श्रृद्धालुओं ने मुनि द्वय की भव्य अगवानी की। जैसे ही मुनियों का काफिला महाराणा प्रताप सरि्कल पहुंचा वैसी ही श्रृद्धालुओं ने जय जय गुरु देव, गुरुजी हमारों अन्तरनाथ हमने आपो आशीर्वाद के गगन भेदी जयघोष किए। बाद में उपस्थित श्रृद्धालुओं ने मुनिश्री द्वय से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके पश्चात श्री श्रीमाल सेठिया श्वेताम्बर जैन समाज एवं अन्य श्रृद्धालुओं ने भव्य शोभायात्रा के साथ महाराजश्री को नगर मंगल प्रवेश कराया और गाजे-बाजे पर नमस्कार महामंत्रा की धुन और जयघोषों की गूंज के साथ शोभा यात्रा विद्युत नगर, माही कॉलोनी, मोहन कॉलोनी, कलेक्ट्री चौराहा, नई आबादी होते हुए निर्माणाघीन दादावाडी पहुंची । इससे पूर्व में रास्ते भर अनेक श्रृद्धालुओं ने अक्षत वर्षा कर द्वय मुनियों की आगवानी की ।
दादावाडी पहुंचने पर मुनि प्रवर ऋषभविजय जी मा.सा. एवं मुनिश्री रजतविजयजी मा.सा. का दादावाडी समिति के अध्यक्ष बापूलाल जैन, सेठिया समाज के संरक्षक बसन्तलाल सेठिया, समाज के अध्यक्ष नाथूलाल, महावीर सेठिया, नटवरलाल सेठिया, मदनलाल सेठिया आदि ने भव्य अगवानी की।
दादावाडी पहुंचने पर द्वय मुनिश्री ने चिन्ताहरण पार्श्वनाथ भगवान एवं दादा गुरुदेव श्रीमद् राजेन्द्रसूरिश्वर मा.सा. दर्शन किए। इसके पश्चात द्वयमुनियों ने निर्माणधीन दादावाडी का अवलोकन किया और बाद में शोभायात्राा पाला रोड, र्कोकरी मार्केट,सदर बाजार, आजाद चौक होते हुए महासती पैलेस पहुंची ।
मुनिश्री के आगमन से छायी खुशी की लहर
मुनि प्रवर ऋषभविजय जी मा.सा. के ऐतिहासिक चातुर्मास के पश्चात एक बार पुनः बांसवाडा आने पर जिले भर के श्रृद्धालुओं में खुशी की लहर छा हुई है। सोमवार को उनकी अगवानी के लिए न केवल शहर बल्कि जिले के आस-पास के कस्बों से श्रृद्धालुगण मुनिश्री की अगवानी के लिए पहुंचे और उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।
लगभग तीन किलोमीटर की शोभायात्राा में बडी संख्या में बच्चे, महिलाएं, युवा एवं बुजुर्ग श्रृद्धालुगण सम्मिलित थे। बच्चों एवं युवाओं का जोश देखते ही बनता था। शोभायात्राा के पूरे मार्ग में इन्होंने जय-जय गुरु देव, गुरुजी हमारो अन्तरनाथ हमने आपो आशीर्वाद के गगद भेदी जयघोष किए ।
शोभायात्रा के मार्ग में अनेक स्थलों पर तोरण द्वार मंगल का संदेश दे रहे थे वहीं रास्ते भर श्रृद्धालुओं ने जगह जगह मुनिश्री का गवरी कर श्रृद्धा की अभिव्यक्ति कर रहे थे।
संकल्प हुआ साकार
ज्योषित सम्राट एवं तीर्थ प्रेरक मुनिप्रवर ऋषभविजय जी मा.सा. ने अपने ऐतिहासिक चातुर्मास के दौरान बांसवाडा की निर्माणाधीन दादावाडी के कार्यों को पूर्ण कराने का संकल्प लिया था ।
उल्लेखनीय है कि लगभग दो दशकों से अधिक समय से दादावाडी निर्माण कार्य अधूरा ही था। श्रीश्रीमाल सेठिया श्वेताम्बर जैन समाज के अथक प्रयासों के बावजूद यह निर्माण कार्य सपना बन कर रह गया था ।
मुनि प्रवर के चातुर्मास के पूर्व ही यह संकल्प लिया था कि बांसवाडा के चातुर्मास के दौरान निर्माणाधीन दादावाडी का कार्य पूर्ण करवाया जाएगा और शीघ्र ही प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
ज्योषित सम्राट एवं तीर्थ प्रेरक मुनि प्रवर ऋषभविजय जी मा.सा. ने जो संकल्प लिया, उसे साकार एवं मूर्त रूप देने के लिए मुनिश्री का मंगल प्रवेश समाज के लिए सौगात बन कर आया।
यह उल्लेखनीय होगा कि आगामी १४ अप्रेल से पांच दिवसीय दादावाडी जिन मंदिर का प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होगा ।