बीकानेर ऊन व्यवसाइयों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिये राज्य सरकार की वित्तीय राहत पैकेज योजना के अंतर्गत शुक्रवार को जिला उद्योग केन्द्र परिसर में संभागीय प्रोत्साहन शिविर लगाया गया। शिविर में राजस्थान वित्त निगम के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक ओम चोला सहित संभाग के अनेक अधिकारी मौजूद थे। शिविर के दौरान 2॰ करोड ऋण हेतु बीकानेर के 13, नागौर के 2 तथा हनुमानगढ 5 ऊन व्यवसाइयों ने आवेदन किये। निगम के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक ने बताया कि ऊन उद्यमियों के लिये यह शिविर आशा की किरण साबित होगा। ऊन व्यवसाइयों व वूलन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन की मंाग पर सकारात्मक कार्यवाही करने हेतु राज्य सरकार ने ऊन उत्पादक इकाइयों हेतु एकमुश्त विशेष वित्तीय राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वे इकाइयां भी निगम की सरल योजना अथवा फाइनेंशियल अगेंस्ट एसेट्स योजना के अंतर्गत ऋण ले सकती है। सरल योजना के अंतर्गत 14 प्रतिशत के स्थान पर 13 प्रतिशत तथा फाइनेसिंग अगेंस्ट एसेट्स योजना के अंतर्गत 15 प्रतिशत के स्थान पर 14 प्रतिशत ब्याज देय होगा। उन्होंने बताया कि वे इकाइयां जो कि अपने उद्योग का विस्तार, विविधकरण अथवा गुणवत्ता सुधार हेतु निगम की फास्ट ट्रेक योजना के अंतर्गत ऋण लेना चाहती है, उन्हें भी निगम 11 प्रतिशत ब्याज दर पर 1॰ वर्ष की अवधि हेतु ऋण स्वीकृत करेगा। जबकि अन्य इकाइयों हेतु 12 प्रतिशत ब्याज दर पर अधिकतम 7 वर्ष हेतु ऋण दिया जाता है। इसके अलावा ऐसी ऊन उत्पादक इकाइयां जिन्होंने अपना खाता बंद कर दिया हो या निगम की वर्तमान औद्योगिक इकाइयां यदि चाहे तो निगम की फास्ट ट्रेक ऋण योजना के अंतर्गत 11 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण ले सकता है। बैरवा ने कहा कि विशेष राहत पैकेज के तहत वे ऊन उत्पादक इकाइयां जिनके खाते विगत 3 वर्षों में स्टैण्डर्ड केटेगरी में थे किन्तु उपरोक्त शर्तें पूरी नहीं होने पर निगम की गुड बोरोवर योजनाए का लाभ प्राप्त नहीं कर सकते है। ऐसी इकाइयों को इन शर्तों में छूट देते हुए उनकी पात्रता बनी रहेगी एवं गुड बोरोवर योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के अधिकारी होंगे। निगम ऐसी इकाइयों को कार्यशील पूंजी हेतु पंजाब नेशनल बैंक तथा स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर के माध्यम से आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध करायेगा। शिविर में वूलन इण्डस्ट्री के शांतिलाल बोथरा, बृजमोहन चांडक, निर्मल पारख, जिला उद्योग केन्द्र के डी.पी. पच्चीसिया सहित अनेक ऊन व्यवसायी उपस्थित थे। बाद में उप महाप्रबंधक को ऊन व्यवसाय की वर्तमान स्थिति के बारे में भी अवगत करवाया गया। बोथरा ने बताया कि 2॰॰ से अधिक ऊन मिलों से आधे से ज्यादा का उत्पादन कम हो गया है जबकि 15 मिले बंद हो चुकी है। इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 2 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।