ज्योर्तिविद् पण्डित राजेन्द्र किराडू के आचार्यत्व में बीकानेर के गोकुल चौराहे पर स्थित सूरदासाणी बगेची में दो सितम्बर से भैरव महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। आज पत्रकार वार्ता में प्रेस को संबोधित करते हुए लालबाबा ने बताया कि यह कार्यक्रम तीन दिन तक चलेगा।
पण्डित रमणलाल किराडू के पुत्र, विख्यात राष्ट्रीय संत, भैरव उपासक संत श्री लालबाबाजी के सानिध्य में एवं ज्योर्तिविद् पण्डित राजेन्द्र किराडू के आचार्यत्व में बीकानेर के गोकुल चौराहे पर स्थित सूरदासाणी बगेची में दो सितम्बर से भैरव महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। आज पत्रकार वार्ता में प्रेस को संबोधित करते हुए लालबाबा ने बताया कि यह कार्यक्रम तीन दिन तक चलेगा। लाल बाबा ने बताया कि दो साल पहले सूरदासाणी बगेची में श्री सियाणा भैरवनाथ की नवग्रह युक्त मूर्ति की स्थापना की गई थी। उस समय दो साल पहले मूर्ति की पिण्ड पूजा की गई और पिछले साल इसी मूर्ति की प्राण पूजा की गई और अब तीसरे साल प्रतिष्ठा पूजा की जाएगी और
इस तरह इस चमत्कारी भैरव मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य सम्पन्न होगा।
बाबाजी ने बताया कि यह मूर्ति काफी चमत्कारी मूर्ति है और इसका नित्य पूजन करने से ग्रह दोष, कालसर्प दोष, मांगलिक दोष दूर होते हैं। बाबाजी ने बताया कि इस तरह की मूर्ति बीकानेर के अलावा गोवाहाटी और फलौदी में भी स्थापित की जा चुकी है और अब यह विशेष चमत्कारी मूर्तिर् बम्बई में स्थापित की जाएगी। बाबाजी ने बताया कि यह सारा कार्य भगवान सियाणा भैरवनाथ और मेरे गुरू रेवती रमण जी गोस्वामी के आदेश व इच्छा से हो रहा है। जब बाबाजी से पूछा गया कि सियाणा भैरव व कोडाणा भैरव दोनों का मिलन आप क्यों करवाते है तो बाबाजी ने बताया कि दोनों भैरव आपस में भाई भाई है और दोनों द्वारपाल हैं इसलिए इनका पूजन साथ साथ होना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य यज्ञाचार्य ज्योतिर्विद् पण्डित राजेन्द्र किराडू ने बताया कि पहले दिन भैरवपुरश्चरण पाठात्मक पाठ और तेलाभिषेक का आयोजन किया जाएगा और दूसरे दिन प्रातः नौ बजे पंचामृत अभिषेक का आयोजन होगा। पण्डित राजेन्द्र किराडू के अनुसार तीसरे दिन अष्टगंध अभिषेक एवं एक कुण्डीय महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। अष्टगंध में कस्तुरी का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाएगा। किराडू के अनुसार इस दौरान दशांश हवन का भी आयोजन होगा। राजेन्द्र किराडू ने बताया कि अंतिम दिन सोने के वर्क से भगवान भैरवनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस पूरे आयोजन के दौरान सोलह यंत्रों की सोलह चौकियाँ बनाई जाएगी। पूरे आयोजन में एक सौ इक्यावन वेदपाठी ब्राह्मण हिस्सा लेंगे और प्रतिदिन करीब ग्यारह सौ आहुतियाँ दी जाएगी। किराडू ने बताया कि अंतिम दिन पूर्णाहूति होगी जो अनवरत तीन घंटे चलेगी और शुद्ध देशी घी का प्रयोग किया जाएगा। तीन भैरव स्रोत के पाठ अनवरत जारी रहेंगे।
इस दौरान सात सितम्बर को एक संगीतमय शाम भैरवनाथ के नाम का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के विख्यात कलाकार अपने सुरों से भगवान भैरवनाथ की स्तुति करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फिल्म व टीवी के मुख्य कलाकार गौरव चानणा होंगे और विशिष्ट अतिथि के रूप में आशीष नागपाल, निर्मल रूँगटा, पूर्व पर्यटन मंत्री नरेन्द्र कंवर, शिवाड के महाराजा राजराजेश्वरसिंह युवरानी व युवराज पन्ना, जनार्दन कल्ला, माणिकचंद सुराणा, आलोक मधडा, राजेश टावरी, डी पी गौतम उपस्थित रहेंगे।