बीकानेर, सारी सृष्टि की हर गतिविधि में कला का समावेश है। ज्ञात, ज्ञान व गे तीनों का एक साथ जब विघटन होता है तो ब्रहन चेतना बनती है। यह चेतना ही संसार के सारे ज्ञान को धारण करती है ये उद्गार संवित सोमगिरि जी महाराज ने स्पिक मैके व रामपुरिया विधि कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को शुरू हुई दो दिवसीय फंड पेन्टिग कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किये। विशिष्ट अतिथि राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यवाह के अध्यक्ष डॉ महेन्द्र खडगावत ने कहा कि लुप्त हो रही इस संस्कृति के लिए हर वर्ग का इससे जुडना आवश्यक है क्योंकि यह राजस्थान की बेहतरीन कला है। स्पिक मैके व रामपुरिया विधि कॉलेज का यह प्रयास सराहनीय है। चित्रकार सत्यनारायण जोशी ने कहा कि लोकदेवता पाबू जी राठौड से यह कला तालुक्क रखती है। फंड शैली राजपूत व मुगल शैली से प्रभावीत है। इसमें साइड पोज होना विशेष बात है। कार्यक्रम में डॉ बिट्ठल बिस्सा स्पिक मके के राज्य सचिव दामोदर तंवर ने विचार रखें। कार्यशाला में पचास संभागी भाग ले रहे है।