महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय आयोग की शर्ते पूरी नहीं कर पाए
5 Apr
2010
बीकानेर महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की धारा 12-बी की संबद्धता हासिल करने की शर्ते पूरी नहीं कर पाए है। इस कारण इन्हें यूजीसी से सालाना मिलने वाले करोड़ों के अनुदान से वंचित होना पड़ेगा।यूजीसी नियमों के मुताबिक प्रत्येक विश्वविद्यालय के पास खुद का भवन, प्रशासनिक ढांचा, पर्याप्त विद्यार्थी तथा उन्हें पढ़ाने के लिए समुचित शैक्षणिक स्टाफ, पुस्तकालय, प्रयोगशाला आदि का होना जरूरी है। इनमें से ज्यादातर विश्वविद्यालय इन मापदंडों पर खरे नहीं उतर पा रहे। विश्वविद्यालयों के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, लेकिन उसकी बेरुखी के चलते ये खस्ताहाल है। यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में विश्वविद्यालय भयंकर आर्थिक संकट में घिर सकते हैं। करोड़ों के अनुदान से जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य संस्कृत विवि, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विवि, उदयपुर का महाराणा प्रताप विवि ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, जोधपुर का राजस्थान आयुर्वेद विवि, कोटा के राजस्थान तकनीकी विवि, कोटा विवि तथा बीकानेर का महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय वंचित हैं।यूजीसी से अनुदान की पात्रता पूरी नहीं करने वाले कुछ विश्वविद्यालयों के पास खुद के भवन नहीं है, तो कुछ के पास पर्याप्त स्टाफ। जिनके पास ये दोनों सुविधाएं हैं तो वहां पुस्तकालय, प्रयोगशाला सहित अन्य संसाधन नहीं है। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के लिए राज्य सरकार ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व सहायक प्रोफेसर के 30 पद मंजूर कर दिए हैं, लेकिन इसके पास लाइब्रेरी, लैबोरेटरी अशैक्षणिक स्टाफ जैसी सुविधाएं नहीं है। एक तरफ तो प्रदेश में बड़े पैमाने पर निजी विवि.खुल रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पुराने विवि. की दशा खराब होती जा रही है। न तो इन प्रबंधन ध्यान दे रहा है और ना ही सरकार ध्यान दे रही है।
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