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बैंकों में रही हडताल, करोडों का लेनदेन प्रभावित
21 Jun 2010

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बीकानेर राजस्थान बैंक का आईसीआईसीआई बैंक में विलय के विरोध में सभी बैंकों के कर्मचारियों व अधिकारियों ने राज्य व्यापी हडताल का खासा असर देखने को मिला। इसके चलते बैंकों में लेनदेन नहीं हुआ और करोडों के चैक अटक गए। बैंक में भी सन्नाटा छाया रहा। राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाईज यूनियन एवं राजस्थान प्रदेश बैंक वर्कर्स आर्गेनाईजेशन के आह्वान पर की गई हडताल के विरोध में बैंक कर्मियों ने जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। जुलूस कलक्ट्रेट का चक्कर लगाते हुए जिला कलक्टर कार्यालय के समक्ष पहुंचा और केन्द्र सरकार के इस फैसले पर विरोध दर्ज करवाते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कॉ.वाई.के. शर्मा ने कहा कि बैंक कर्मियों दी बैंक ऑफ राजस्थान लि. को आनन-फानन में सेबी के निर्देशों, प्रवर्तक की हिस्सेदारी पर लगी रोग के बावजूद, विदेशी अधिपत्य वाली आईसीआईसीआई बैंक में किये जा रहे विलय के खिलाफ बैंक ऑफ राजस्थान के 42॰॰ कर्मचारियों व अधिकारियों तथा 2॰ लाख ग्राहकों के संघर्ष को गतिमान और धारदार बनाया जाना आवश्यक हो गया। दी बैंक ऑफ राजस्थान लि. के कर्मचारियों और अधिकारियों ने 4 व 5 जून को दो दिन की अखिल भारतीय हडताल करके इस विलय पर अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराया है और देश मे विभिन्न आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किये हैं। यह आंदोलन बैंक ऑफ राजस्थान में परिचालित एआईबीईए, आईबीओसी एवं एनओबीडब्ल्यू से सम्बद्घ फैडरेशन मिलकर कर रहे हैं, जहां 1॰॰ प्रतिशत कर्मचारी-अधिकारी लामबंद हैं। आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन ने देश भर में आंदोलनकारी कर्मचारियों-अधिकारियों को विभिन्न तरीकों से आतंकित करने के प्रयास आरंभ कर दिये हैं, जो यदि विलय होता है, तो उसके बाद की तस्वीर इंगित कर रहे हैं। जहां एक ओर कर्मचारी-अधिकारी इस विलय के खिलाफ निर्णायक लडाई लड रहा है, वहीं जनप्रतिनिधि, व्यवसायिक संगठन, श्रमिक संगठन, ग्राहक, प्रबुद्घजन इस आंदोलन को अग्रणी बन रहा है। यह लडाई विदेशी धावे और स्वदेशी को बचाने के बीच की बन गई है, प्रदेश के गौरव को बचाने की बन गई है। बैंक ऑफ राजस्थान एम्पलाइज यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्याम सुंदर पुरोहित ने बताया कि बैंक के प्रवर्तक पी.के. तायल की लालची प्रवृत्ति की वजह से हमें यह संघर्ष करना पड रहा है अन्यथा सन् 1943 का बैंक और लगातार लाभ की ओर अग्रसर बैंक जिसकी करोडों रुपयों की अचल व चल सम्पत्तियां है और ग्राहक बैंक के कर्मचारियों की सेवा से पूर्ण संतुष्ट है, ऐसे में विलय का प्रश्न ही नहीं उठता। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं सेबी की जांच की धीमी गति भी इसके लिये जिम्मेदार है। रिजर्व बैंक में कुछ समय पूर्व शेयरों में पारदर्शिता की कमी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने प्रवर्तक पी.के. तायल पर 25 लाख का जुर्माना लगातार इतिश्री कर ली, अगर कडी कार्यवाही होती तो तायल बैंक के विलय का प्रस्ताव नहीं कर पाते। इसी विलय को लेकर हमारे अस्तित्व की लडाई है जिसे किसी कीमती पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। यूनाइटेड फोरम के आह्वान पर पूरे देश में बैंक ऑफ राजस्थान में 22 व 23 जून को पूर्ण हडताल रहेगी। रैली को साथी शिव शर्मा, राधेश्याम व्यास ने भी संबोधित किया।




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