बीकानेर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मुख्यालय के देशव्यापी मेडिकल बंद के आह्वान पर आज सभी निजी चिकित्सालय सोनोग्राफी सेंटर, लेबोरेटरी बंद रहे वही सरकारी चिकित्सालयों में भी चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर कर काम किया और घर पर मरीज नहीं देखे। पीबीएम चिकित्सालय परिसर में सभी चिकित्सक संगठनो ने धरना दिया। धरना स्थल पर डॉ गोपाल जोशी विधायक (बीकानेर पश्चिम ) सहित कई जन-प्रतिनिधियों ने शिरकत की। धरना स्थल पर आईएमए सचिव डॉ एसएनहर्ष ने आज के बंद को एतिहासिक बताते हुए केंद्र सरकार को चेतावनी दी की ऐसे जन-विरोधी क़ानून सहन नहीं किये जायेंगे अगर अब भी सरकार नहीं चेती तो आईएमए आंदोलन को और तेज करेगा। इस तरह के बिल लाने से आम विद्यार्थी का चिकित्सा शिक्षा से मोह भंग होगा और पहले से ही चिकित्सकों की कमी से झूझते भारत में एक बड़ा संकट खड़ा हों जाएगा। डॉ कालीचरण माथुर ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को चिकित्सा जगत के लिए काला क़ानून बताते हुए इसका विरोध एकजुट होकर करने को कहा। डॉ अबरार पंवार ने सरकार से माँग की जब स्वास्थय को राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र स्वास्थय से सम्बंधित क़ानून संसद बनाने लगी है तो पूरे देश के सरकारी चिकित्सकों के बारे में संसद एकल वेतन का क़ानून क्यों नहीं बनाती।
डॉ राहुल हर्ष ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पुरजोर विरोध करते हुए कहा की एकल डॉक्टर क्लिनिक को एस्टेब्लिशमेंट कहना ही गलत है जिन न्यूनतम मानको को इस बिल के द्वारा चिकित्सा संस्थानों पर थोपा जा रहा उससे अधिकाँश एकल डॉक्टर क्लिनिक बंद हों जाने का खतरा पैदा हों गया है और यह आम मरीजो के कतई हित में नहीं है।
मेडिकल प्रेक्टिशनर सोसायटी के डॉ राजेश जैन ने इमरजेंसी शब्द की व्याख्या माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय अनुसार चिकित्सकों पर ही छोडने की माँग की और कहा की जब कंजुमर प्रोटेक्सन एक्ट और इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट 1956 पहले से ही मौजूद है तो इन कानूनों की क्या आवश्यकता है और एक्ट में वर्णित स्टेब्लाईज शब्द का कोई स्पष्टीकरण हों ही नहीं सकता है। डॉ टीजी भटनागर ने जिला ऑथोरिटी को जो दंडात्मक यहाँ तक की बंद कर देने का अधिकार देने का विरोध किया और बिना किसी प्रशासनिक दुरुपयोग को रोकने के उपायों के इन्हें वापिस लेने की माँग की।
डॉ अज़ीज़ अहमद सुलेमानी ने कहा सरकार से आईएमए की तीनो लंबित मांगों क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को को राज्य विधान सभाओ में पारित नहीं किया जाए एनसीएचआरएच को वापिस लेने और इंडियन मेडिकल कौंसिल को बहाल करने की माँग की। धरने को डॉ एमएम बागडी, डॉ सचदेवा, डॉ सीएस मोदी आदि चिकित्सकों ने भी संबोधित किया। धरने के उपरांत चिकित्सकों ने रेली कर जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। |