बीकानेर धर्मनगरी के बाशिंदे इन दिनों आई फ्लू के निशाने पर हैं। गत दिनों हुई बारिश के बाद निमोनिया व मलेरिया के साथ आई फ्लू ने भी यहां के लोगों को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। प्रदेश में बढते स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए जहां चिकित्सा महकमा एहतियात के तौर पर प्रबंध करने में जुटा हुआ है, ऐसे में आई फ्लू के बढते संऋमण ने विभाग की चिंता बढा दी है। चिकित्सकों के अनुसार हर दिन चिकित्सालय में आई फ्लू के करीब एक दर्जन मरीज आ रहे हैं। यह संख्या केवल उनकी है, जो अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं। हकीकत में प्रतिदिन एक संऋमित व्यक्ति से पांच अन्य व्यक्ति संऋमित हो रहे हैं। यह संऋमण दिन प्रति-दिन लगातार बढ रहा है। करीब सात वर्ष बाद आई फ्लू का प्रकोप एक बार फिर शुरू हुआ है। हालांकि यह अभी शुरूआती दौर है। चिकित्सा प्रशासन ने आई फ्लू के संऋमण को रोकने के लिए लोगों को हिदायत देनी शुरू कर दी है। यहां मेडीकल स्टोर्स की दुकानों पर भी आई ड्राॅप खरीदने के लिए लोगों की भीड देखी जा सकती है। मेडिकल स्टोर्स के संचालकों का कहना है कि अधिकांश लोग अस्पताल न जाकर उन्हीं से आंखों की दवाई खरीद लेते हैं। एक दुकान से हर दिन दर्जनों आई ड्राप बिक रही है। शहर में इन दिनों गली व मोहल्ले में काले चश्मे पहने पुरूषों, महिलाओं, बच्चों व बुजुगर् को देखा जा सकता है। दरअसल इन चश्मों को पहनने का कारण फैशन न होकर आई फ्लू से बचाव है। स्कूलों में भी बच्चों को काले चश्मे में देखा जा सकता है। यह बीमारी संऋमण से फैलने के कारण लोगों को काफी सावधानी बरतनी पड रही है। हालांकि काले चश्मे केवल उन्हीं के पहने नजर आ रहे हैं, जो खुद आई फ्लू से पीडित है। चिकित्सकों के अनुसार आई फ्लू संऋमण से फैलता है, लेकिन इस रोग से घबराने की जरूरत नहीं है। यह वायरसजनित रोग है, जो बारिश के मौसम में फैलता है। तेज धूप खिलने के साथ ही इस रोग का प्रकोप स्वतः कम हो जाता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार आईफ्लू पीडित मरीज के तौलिए, रूमाल व चश्मे के उपयोग से अन्य परिवारजनों को बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन-चार दिन में इस रोग से निजात मिल जाती है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह से ही एंटीबायोटिक लेना चाहिए।