Home > Article >> Short Stories | आम का पेड
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15 Jun 2008 Add comment Mail
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एक नगर में एक सुंदर बगीचा था। एक फकीर लंबी पदयात्रा करते हुए वहां पहुंचा। एक आम के पेड के नीचे खूंटी तानकर अलमस्त फकीर सो गया। थकान से उसे गहरी नींद आ गई। बगीचे में दो-तीन बच्चे भी खेल रहे थे। खेलते-खेलते वे आम के पेड पर पत्थर मारकर आम तोडने लगे। एक पत्थर उछल कर सोए हुए फकीर पर जा गिरा। फकीर के कपाल में चोट आई। खून की धार बहने लगी। बच्चे मारे डर के चिल्लाने लगे कि अब फकीर डंडा लेकर उनकी खैर खबर लेगा। बच्चे बगीचे के कोने में दुबक गए। फकीर सहमे हुए बच्चों के पास गया और बच्ची के चरण पकड कर क्षमा याचना करने लगा। एक बच्चे ने आगे बढकर कहा-गुरूजी, क्षमा तो हमें मांगनी चाहिए आप व्यर्थ में क्यों दुखी हो रहे हो। फकीर ने विनम्रता से कहा-तुमने आम पर पत्थर फेके तो आम के पेड ने तुम्हें रसीले आम दिए। मैं तुम्हें डर के सिवाय कुछ नहीं दे पाया। काश! आज मैं भी कोई फलवाला पेड होता तो तुम्हें डराने की बजाय मीठे आम देता। बस इसी पीडा से परेशान होकर मैं तुमसे क्षमा मांग रहा हूं। बच्चे फकीर की क्ष्माशीलता से प्रसन्न हुए और उन्होंने अनजाने में हुए अपराध की क्षमा मांगी। फकीर ने रसीले आम तोडकर बच्चों को दिए और उन्हे प्रसन्नापूर्वक विदा किया।
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