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अब नहीं तो कब जागेंगे

19 Oct 2006      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

dr_b_r_joshiघटना की नियति है घटित होना। घटित व्यक्तिगत नहीं सामूहिक होता है । अतः घटना का प्रभाव संपूर्ण समाज पर समान रूप से पडता   हैं। लिंग अनुपात इस समय समाज के सामने आ रही मुख्य परिघटना है । आए दिन समाचार पत्रों चैनलों एवं मीडिया के अनेक-अनेक माध्यमों के जरिये हम लिंग अनुपात की असमानता के मुख्य कारण भूण हत्या पर कुछ न कुछ देखते, पढते और सुनते हैं।
पिछले दिनों पंजाब के पताडा कस्बे के कुंओं में दर्जन भर से ज्यादा कन्या भूण मिले। इससे पहले उदयपुर, अलीगढ में भी ऐसे वाकये सामने आयें   है ।
इन सब के मूल में है कन्या का अस्वीकार। कहने को हम भले ही मानवतावादी, नारीवादी युग में जी रहे हैं परन्तु हमारी मानसिकता आज भी रूढग्रस्त संस्कारों से बंधी है । मजे की बात तो यह है कि उत्तर-पश्चिम के वे राज्य, जो आज भारत के अन्य राज्यों के लिए विकास व प्रति व्यक्ति आय का मॉडल बने है उनमे कन्या भूण हत्या की प्रकृति सर्वाधिक पाई गई है । ये वे राज्य है जहाँ कन्या जन्म अव्वल तो होना ही पाप समझा जा रहा है, पर खुदा ना खास्ता अगर कहीं ऐसा हो भी जाय तो ये उसका गर्भवध करने में जरा भी संकोच, दया, करूणा आदि का प्रदर्शन नहीं करते। एक स्तर पर तो यह लगने लगता है मानो एक जाति के प्रति समस्त समाज एकजुट होकर उसके विरोध में खडा है ।
दहेज और बलात्कार की घटनाओं को प्रायः कन्या भूण के मूल में कारण रूप में गिनाया जाता हैं। जो कि नितान्त गलत हैं। इतिहास गवाह है कि रामायण, महाभारत से लेकर अब तक किस काल विशेष में महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा रही है । सीता, द्रोपदी सहित अनेक वृतान्त इसकी साखी भरते हैं।
लिंग अनुपात दिन-ब-दिन असमानता के ग्राफ को बढाता जा रहा हैं। इसके दोषी भी हम हैं। जो अपने आप को सभ्य समाज के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। समय रहते इस ’’तथाकथित सभ्य समाज‘‘ में कन्या भूण हत्या पर रोक नहीं लगाई तो वह दिन दूर नहीं जब समाज रूपी गाडी का चलना मुश्किल हो जाएगा।
इसके लिए राज और समाज को सभ्यक प्रयत्न  करने होंगे। वरना नुकसान अकेले समाज का होगा। हम चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इस क्रूर प्रवृति  को त्यागकर संकल्पनिष्ठ होकर लिंग असमानता को दूर करते हुए समाज के सभी क्षेत्रों में स्त्री वर्चस्व को स्वीकार कर उसके लिए सकारात्मक पहल करनी होगी। तभी हम संसार के सम्मुख अपना गौरवमयी अतीत एवं उज्ज्वल वर्तमान प्रस्तुत कर पाएंगे अन्यथा मुश्किल राहें हमारे इंतजार में हर जगह खडी मिलेगी और फिर हम  नहीं जागेंगे तो कब जागेंगे।
डाँ ब्रजरतन जोशी



Comments to this Article
i am a journlist and belong from u.p and i want to tell that ki khane ko tum kahte hain ki hmne 21 sadi me prvesh kar liya aur videsi bol chal pahnave ko bhi apna liya pr ham sayd dimag se adhunikta ko nhi apna paye vaise bete betiyon me frak krna u.p ka purana style hai, priyanka dixit (2010-11-19 08:03:34)

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