एक बार बतायो संत घूमते-फिरते किसी अमीर आदमी की दावत में जा पहुंचे। दावत में आसपास के गांवों के कई बडे रईस लोग शरीफ हुए। मेजदान अमीर आदमी ने अपने यहां बतायो संत को फटेहाल देखा तो मन ही मन और सोचा कि इस आदमी को यहां देखकर आने वाले लोग क्या कहेंगे? अमीर मेजदान लाल-पीला हो गया और उसने वतायो संत को वतायो संत ने अपने चचेरे भाई शेख अली के कीमती कपडे पहने और वे भाई की घोडीं पर सवार होकर उसी दावत में शामिल होने के लिए फिर चल दिए।
इस बार बतायो संत का बडा आदर-सत्कार हुआ। अमीर आदमी ने सोचा-एक और बडे आदमी ने उसकी दावत कबूल की है। फिर क्या था। चिलमची में वतायो के हाथ धुलाए गए। उनके आगे बिरयानी खाने की बजाय, चम्मचें भर-भरकर अपनी कमीज और पजामे पर डालते गए। दावत उडा रहे लोग आश्चर्य से उनकी ओर देखने लगे। वे बहुमूल्य वस्त्रों को संबोधित करते हुए बोले-तुम खाओ। मेहमानी तुम्हारी हो रही है। खूब खाओ। मुझे तो इन्होंने यहां से धकेल कर बाहर निकाल दिया था। सारी बात जब लोगों के समझ में आई तो सभी ने संत से माफी मांगी।
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