Home > Article >> Immidiate Comments | एशिया के सबसे बडे गाँव को लगी नजर
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21 Apr 2008 Add comment Mail
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एशिया के इस सबसे बडे गाँव को लगता है किसी की नजर लग गई है। दुर्घटना दर दुर्घटना ने शहर को स्तब्ध कर दिया है। शहर का व्यक्ति डरा डरा सा रहता है कि कहीं कोई दुर्घटना की खबर न आए। घर में बडे बुजुर्गों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। ऑफिस व काम पर गए अपने परिवार के सदस्य की जरा भी देर होने पर फोन व मोबाईल की घंटिया सुनाई देने लगती है या फिर वह व्यक्ति स्वयं ही अपने घर फोन कर देता है कि मै बस थोडी ही देर में आ रहा ह। पिछले एक सप्ताह में हुई पैंतीस मौतों ने शहर के आम आदमी को हिलाकर रख दिया है। शहर के युवा ललित से बात करने पर उसने बताया कि उसके दोस्तों की पिछले एक महीने से पिकनिक पर जाने की इच्छा है लेकिन शहर में हो रही दुर्घटनाओं के कारण शहर से बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही वहीं दूसरी तरफ घरवालों से साफ मना कर दिया है कि कहीं पर नहीं जाना। शहर की के एक युवा पवन पुरोहित ने बताया कि पहले होली के बाद गोपाली की मौत व बाद में कुछ दिन पहले ही हुई गुण्डा महाराज की मौत ने बारहगुवाड चौक को हिलाकर रख दिया है। ये दोनों ही बारहगुवाड के रहने वाले थे और दोनों की मौत सडक दुर्घटना में ही हुई है। इसी तरह परिवार के सदस्य एक साथ कहीं जाने से भी डर रहे हैं क्योंकि पिछली दुर्घटनाओं में एक ही परिवार के कईं सदस्य एक साथ काल के ग्रास में समाए है। नत्थूसर गेट के बालू महाराज ने बताया कि होना वहीं है जो उपर वाले ने लिख रखा है लेकिन अपनी सुरक्षा करना सबसे बडा उपाय है। पास ही बैठे घेटड महाराज ने बताया कि उन्होंने मौहल्ले में साफ तौर पर घोषणा कर दी है कि कोई भी व्यक्ति बिना काम के घर से बाहर नहीं निकलेगा। इस तरह आज बीकानेर शहर का हर नागरिक खौफजदा है।
वहीं दूसरी तरफ बीकानेर का प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया है उसे इस बात से कोई लेना देना नहीं कि जनता की क्या हालत है। आज भी गंगानगर रोड व जयपुर रोड अंधाधुंध दौडते वाहन व ओवरलोड वाहन आपको नजर आ जाएंगे। देखते हैं बीकानेर के लोगों का खौफ कम होता है या प्रशासन की शर्म।
Shyam Narayan Ranga |
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