एक बच्चा था जिसका नाम राजा था। उसे रोज ५ रूपये का नोट मिलता था। स्कूल के बाहर एक चने बेचने वाली बुढया बैठती थी। राजा उससे रोज ५ रूपये के चने खरीदता था। एक दिन जब राजा ने उससे चने लिये तो उसने चने के साथ ५ रूपये भी वापस कर दिये। शायद उसने समझा कि ५ रूपये के नोट के स्थान पर १० रूपये का नोट था या फिर उस दिन चना खरीदने वालो की भीड ज्यादा थी। इस वजह से उससे गलती हो गई। राजा ५ रूपये पाकर बहुत खुश हुआ और मम्मी के हाथ में ५ रूपये रखकर पूरी कहानी बतायी। मगर तब हैरान रह गया, जब उसने मॉ को दुखी देखा। मॉ ने कहा,‘बेटा ये तुम्हारी ईमानदारी की परीक्षा थी जिसमे तुम हार गये,लेकिन अब भी कुछ नही बिगडा तुम उसे तुरंत पैसे वापस कर दो। राजाको बात समझ नही आई पर उसे पैसे वापस करने जाना पडा जब उसने पैसे वापस किये तो उसने चने वाली के आंखो मे एक विशेष चमक देखी उसने राजा को खूब सारी दुआएं दी राजा को अब सारी मॉ की बात समझ आ गई। उस दिन उसने जाना कि असली पूंजी ईमानदारी और सदगुण ही है।
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