कंगारूओं की सेना ने एक बार फिर विश्वकप क्रिकेट को फतह कर लिया और इस बार उन्होने इस ताज का तीसरी बार वरण किया है। पूरी प्रतियोगिता मे यह प्रश्न अनुत्तरित रहा कि क्या कोई टीम आस्ट्रेलिया को पराजित कर सकती है या नहीं ? परन्तु प्रतियोगिता के सम्पन्न होने तक भी इस प्रश्न का जवाब नहीं मिल सका। क्रिकेट के हर क्षेत्र में कंगारूओ ने अपनी श्रेष्ठता साबित की। परन्तु यह बात नहीं है कि दूसरी टीमो में आस्ट्रेलिया जैसी काबलियत नहीं है। दूसरी टीमो में भी काबलियत है परन्तु आस्ट्रेलिया ने जिस तरह से क्रिकेट को समझा है उसय तरह से किसी दूसरी टीम ने नहीं समझा है। भारतीय उपमहाद्वीप की टीमो ने १९९९,२००३ और २००७ में आस्ट्रेलियन टीम को चुन्नौती दी परन्तु फाईनल में सभी टीमो ने समर्पण कर दिया। वास्तव में आस्ट्रेलियन टीम क्रिकेट के एक स्कूल की तरह है और दुनिया में क्रिकेट खेलने वाले देशो के लिए उनका खेल अध्ययन की तरह है। यदि इसे ओर आगे जाये तो प्रबंध के छात्र भी इस टीम से सीख सकते है कि अपने श्रेष्ठतम साधनो का किस तरह प्रयोग करे।
चतुर कप्तान श्रेष्ठ खिलाडी दुनिया की कई टीमो के पास है। भारत ,श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका ओैर ईग्लैण्ड के पास विश्वस्तरीय खिलाडयों की कमी नहीं है। इसके बावजूद ये टीमे आस्ट्रेलिया जैसा वजूद नहीं रखती है। इसका कारण स्पष्ट है कि कुशल नेतृत्व ही टीम की प्रतिभा का सवोत्तम उपयोग कर सकता है। रिकी पोंटग को दुनिया का सबसे कुशल और चतुर कप्तान माना जा सकता है। पोंटिग ने फाइ्रनल से पूर्व अपने खिलाडयों के साथ बैठकर मुरलीधरन और मलिंगा से निपटने की रणनीति बनाई । इसके लिए उन्होने मुरलीधरन की गेदबाजी की विडिया क्लींपिंग भी देखी और फाईनल में मुरलीधरन की गेंदबाजी पर ही सबसे ज्यादा रन बनाये। फाईनल में टॉस जीतकर पोंटिग ने चतुराई भरा निर्णय लिया। कोई और कप्तान होता तो विकेट और नमी देखकर पहले गेदबाजी का निर्णय लेता परन्तु पोंटग ने चतुराई के साथ पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया क्योकि वह जानता था कि बारिश होने के कारण बाद में बल्लेबाजी करने वाली टीम को बार बार बदला हुआ टारगेट मिलेगा। इससे लक्ष्य हासिल करने में दिक्कत होती। इतनी बारीकी से परिस्थितियो का विश्लेषण पोंटिग जैसा कप्तान ही कर सकता है। इसके अलावा प्रेस में उनके बयान अपनी टीम के हौसना बढाने वाले होते थे। पोंटिग के प्रेस बयान अन्य किसी भी कप्तान से भिन्न होते थे।
कुशल आपदा नियंत्रण टीम के श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सभी टीमे योजना बनाती है । परन्तु आस्ट्रेलियन टीम आपदा नियंत्रण की भी योजना बनाती है। यही कारण है कि इस विश्वकप प्रतियोगिता में आस्ट्रेलिया की टीम कभी भी दबाव में नहीं आई। उनका बल्लेबाजी क्रम इस प्रकार का है कि एक विकेट गिरते ही उसके नुकसान को नियंत्रित कर लिया जाता है। यदि दो विकेट जल्दी गिर जाते है तो निम्न क्रम के बल्लेबाज उसको नियंत्रित कर लेते है और यदि पूरी टीम कम स्कोर पर आउट हो जाती है तो गेंदबाज स्थिति को संभाल लेते है। फाईनल में हेडन और पोंटिग के कम स्कोर पर आउट होते ही टीम ने उसकी भरपाई करते हुए २८१ रनो का विशाल स्कोर खडा कर दिया और ५३ रनो से विजय हासिल कर ली।* मेकग्राथ के रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए टीम प्रबंधको ने शॉन टेट को पहले ही तैयार कर दिया और आज शॉन टैट मेकग्राथ से खाली हुई जगह को भरनें के लिए पूरी तरह तैयार है। मैच की बदली हुई परिस्थितियो में भी आस्ट्रेलियन टीम अपनी रणनीति को बदलने में माहिर है। किसी भी प्रतियोंगिता के फाईनल का जीतने के लिए वे विपक्षी टीम के खेल का गहराई से अध्ययन करते है और उसके अनुसार अपनी रणनीति बनाते है। वे जितनी मेहनत मैदान में करते है उतनी ही मेहनत बंद कमरे में करते है। फाईनल में उन्हेाने मुरलीधरन, मलिंगा, जयसूर्या और महेला जयवर्द्धने के लिए विशेष रणनीति बनाई। वे जानते थे कि यदि ये खिलाडी असफल हो जाते है तो श्रीलंका को आसानी के साथ पराजित किया जा सकता है । आस्ट्रेलिया की यह रणनीति सफल रही । एक मैच के लिए मैदान के बाहर इतना काम और कोई दूसरी टीम नहीं करती है।
व्यक्तिगत श्रेष्ठ प्रदर्शन
आस्ट्रेलियन टीम का प्रत्येक सदस्य अपनी टीम के लिए शत प्रतिशन योगदान देने के लिए तैयार रहते है। प्रत्येक खिलाडी की भूमिका तय है और सभी खिलाडी अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी से निभाते है। उन्हे यह बताया जाता है कि आपका काम आपको ही करना है। इस कारण टीम के ६ खिलाडयों का स्ट्राईक रेट १०० से ज्यादा है। मैथ्यू हेडन ने प्रतियोगिता में ६०० से ज्यादा रन बनाये है। गिलकि्रस्ट ने विश्वकप में यादगार पारिया खेली है। रिकी पोटिंग ने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाई है। गेंदबाजी में मैकग्राथ ने अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है और विश्वकप का मैन ऑफ द सीरीज का खिताब जीता। ऐसा करने से टीम के दूसरे खिलाडयो को प्रेरणा मिलती है। दूसरी टीमो में एक या दो खिलाडी ही अपना शत प्रतिशत योगदान दे पाते है। ऐसा भी कह सकते है कि अन्य टीमो का प्रदर्शन एक या दो खिलाडयो के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
आस्ट्रेलियाई टीम सर्वकालिक श्रेष्ठ टीम बन गई है। यह टीम ७० और ८० के दशक की वेस्टइंडीज टीम से भी आगे निकल गई है। वेस्टइंडीज टीम केवल अच्छी क्रिकेट खेलती थी परन्तु आस्ट्रेलिया की टीम अच्छी क्रिकेट खेलने के साथ कुशल रणनीति बनाने में भी माहिर है। कंगारू टीम क्रिकेट का एक स्कूल है, ठीक उसी तरह जिस तरह चित्रकला में मुगल स्कूल और मारवाड स्कूल होते है। इसके प्रदर्शन से काफी कुछ सीखा जा सकता है।
मनीष कुमार जोशी, सीताराम गेट के सामने,बीकानेर फोन नं. ९४१३७६९०५३