KhbarExpress www.khabarexpress.com
Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now | My Favourites (new)
Search Photo  
RSS 24 November 2009
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City | Cartoon | Video News |
Free News on your website
6
Jan
विकास के साझीदार सब बनें
Add comment    Mail     Print    Write to Editor

Dr. B.R.joshiभारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और जातियों का संगम है। इसके बारे में कहा भी जाता है कि यही विविधता हमारी भावात्मक एकता को अखण्ड बनाती है। लेकिन जब तक यह बात सामाजिक संरचना में मजबूती से व्यावहारिक रूप में पूरी होती नहीं दिखाई देगी। तब तक इसे आधार मानकर चलना भी ज्यादा समझदारी नहीं होगी।
मुद्दा चाहे प्रधानमंत्री उठाए अथवा कोई अन्य पार्टी पर सच्चाई यह है कि देश में निवास कर रहे बहुसंख्यक मुसलमान पिछडे हुए है। जबकि हम इस तथ्य से भी भली परिचित है कि जब तक समाज के अंतिम आदमी तक विकास की भागीरथी नही बहेगी तब तक समग्र विकास की रूपरेखा के बारे में सोचना भी बेमानी है। अब अगर कोई इस सामाजिक असंतुलन को समझकर इसे दूर करने की कवायद कर रहे चाहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हो तो किसी को क्या हर्ज हो सकता है? पर भाजपा सहित अन्यान्य राजनीतिक पार्टियों को लग रहा है कि उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में चुनाव की तिथियाँ नजदीक आ रही है। अतः सरकार (विशेषकर कांग्रेस)  अपनी तुष्टीकरण की नीति को जारी रखने के क्रम में विशेष मतदाता वर्ग को रिझाने का लुभावना प्रयास कर रही है।
सच्चर समिति की रिपोर्ट ने अपनी रिर्पोट में काफी भ्रांतियों को दूर करते हुए यह खुलासा किया है कि उनकी स्थिति अन्य समुदायों की अपेक्षा शिक्षा, स्वास्थय, रोजगार आदि अनेक मोर्चो पर काफी कमजोर है। सामाजिक संतुलन को कायम रखने की कवायद को साप्रदायिक करार दिया जाना अनुचित ही है। जबकि भाजपा ने तो पुनः हिन्दुत्व का ’ट्रम्पकार्ड‘ इस्तेमाल कर सीधे सीधे समाज को संाप्रदायिक आग में झोंकने की राह आगे बढ रही है।
कग्रेस के हम में एक तथ्य यह भी है कि उसकी संप्रग नीत सरकार में उसके सहयोगी दल  लोजपा, राजद आदि तो बहुत पहले से ही इसकी वकालात कर रहे है। इसलिए संप्रग सरकार व कांग्रेसी पार्टी इसे एक चुनावी मुद्दा भी बनाए तो आश्चर्य की बात नहीं है फिर रही मुस्लिम संप्रदाय की बात जो परम्परागत रूप से कांग्रेस का वोट बैंक रहा भी है। अतः राजनीति की दृष्टि से देखा जाए तो कांग्रेस उनमें अपनों खोया आधार ढूंढे तो गलत भी नहीं है।
शायद इन्ही कारणों से प्रेरित होकर डॉ. मनमोहनसिंह ने अंतरराष्ट्रीय दलित अल्पसंख्यक सम्मेलन के मंच से भी विकास की मुख्य धारा में मुसलमानों को बराबर का हिस्सेदार बनाने की बात पर जोर दिया।
समय के साथ अब इस्लामिक सोच में भी भारी परिवर्तन आया है। धार्मिक मुद्दे अब उनके लिए पहले की तरह बडी चीज नहीं रहे है। अब बेहतर शिक्षा, बेहतर रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति उनकी चाहना बढी है। उनमें आया यह बदलाव समाज के लिए शुभ संकेत है।

डॉ. ब्रजरतन जोशी
संपादक




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

Be the first to comment on this Article

 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 
Search hindi - English word definition online at PleagianDictionary.com
Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
Hindi To English and Enlish to Hindi Dictionary Developed by Pelgian Softwares, Bikaner (Rajasthan) India
Education Special

All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares