Home > Article >> Short Stories | बीरबल की बुद्धिमानी
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22 Feb 2010 Add comment Mail
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अकबर बादशाह का दरबार सजा हुआ था। बीरबल दरबार में अनुपस्थित थे। तभी एक दरबारी ने खडे होकर कहा- जहांपनाह् ! आप हर काम के लिए बीरबल की सहायता लेते है। इसलिए हमें अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देने का अवसर नहीं मिलता। वैसे भी बीरबल हमसे आयु में छोटे है। फिर भी आप उसे हमसे अधिक सम्मान देते है, जबकि उस सम्मान के हकदार हम है।
बादशाह बोले - तुम लोगों की सोच गलत है। बीरबल बहुत बुद्धिमान है, बुद्धिमत्ता में उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता। इसी वजह से मैं हर बात उससे ही पूछता हूं। दरबारियों को बदशाह की यह बात अच्छी नहीं लगी, पर वे चुपचाप बैठ गए। सबको चुप बैठा देखकर बादशाह बोले - अगर तुम लोगों को इस बात का घमंड है कि तुम लोग ज्यादा चतुर हो, तो आज तुम सभी की चतुराई की परीक्षा होगी, जो पास हो जाएगा उसे बीरबल की जगह मिल जाएगी। अक्ल की परीक्षा के लिए बादशाह ने दो हाथ लंबी एक चादर मंगाई। बादशाह ने दरबारियों से कहा- देखों मैं लेट जाता हूं और तुम लोग बारी-बारी से इस चादर से मेरा जिस्म ढंकने की कोशिश करना। ध्यान रहे कि जिस्म का कोई भी हिस्सा खुला नहीं रहने पाए। यह काम जो कोई कर लेगा, उसे बीरबल का स्थान मिल जाएगा। बादशाह लेट गए। सभी दरबारी बारी-बारी से चादर ओढाने की कोशिश करने लगे। कोई भी दरबारी यह काम नहीं कर सका।
जब कोई भी दरबारी बादशाह को नहीं ढक सका तो वे उठ खडे हुए और बोले - अगर इस वक्त यहां बीरबल होते तो वह अवश्य ही अच्छी तरह से मेरा जिस्म ढंक देते। जब आप यह मामूली सा काम ही नहीं कर पाए, तो बडा काम कैसे कर पाएंगे ? अब बादशाह ने बीरबल को बुलाने का हुक्म दिया।
बीरबल आकर अपनी जगह पर अदब से बैठ गए। बादशाह ने उन्हें अपने पास बुलाया। चादर उनके हाथ में देकर सारी बात बताई। बादशाह लेट गए। बीरबल ने जब देखा कि चादर बहुत छोटी है, तो उसने बादशाह से कहा- समझदार आदमी वह है जो उतने ही पांव लंबे करता है जितनी लंबी चादर होती है। इसीलिए कहा गया है - तेते पांव पसारिए, जेती लांबी सोर। यानी उतने ही पैर फैलाएं जितनी बडी चादर हो। यह सुनकर बादशाह ने समझदार दिखने के लिए पांव समेट लिए। बीरबल ने बादशाह के पूरे शरीर को चादर से ढंक दिया। बादशाह ने दरबारियों से कहा-देखी आपने बीरबल की चतुराई, चुगलखोर दरबारियों का सिर शर्म से झुक गया।
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| | | Comments to this Article | | very nice, Sheetal (2010-05-24 14:38:05) | | | Very good., Panchanan Das (2010-06-10 18:37:04) | | | very good, rajan chavan (2010-06-18 17:09:10) | | | its nice story, Amit (2010-06-23 15:51:36) | | this is very nice story .............
Rgrds
A.S.Luhar, Arjun Solanki 9988062037 (2010-07-28 21:12:41) | | | great, ankyit (2010-07-31 12:52:27) | | AWESOME!!!!!!!!!!!!!!!! STORY VERY NICE
, sushant (2011-05-17 06:18:10) | |
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