एक राजा के सात रानियां थी। संतान न होने के कारण राजा बहुत दुःखी रहता था। आवेश में उसने सभी रानियों को बुलवा भेजा। राजा ने कहा,’तुम सातों में से एक-न-एक को एक वर्ष के अंदर मां बनना होगा। ऐसा ना हुआ तो मैं तुम सातों को महल से बाहर निकाल दूंगा। सभी रानियां एक दूसरे का मुंह ताकने लगी।
कुछ ही दिनों बाद रानियों को एक उपाय सुझा। सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि राजा को खबर कर देते है कि छोटी रानी के बच्चा होने वाला हैं। बडी रानी ने राजा को यह समाचार भिजवा दिया। महल में खुशियां मनाई जाने लगी। किन्तु छोटी रानी परेशान हो उठी। प्रसव का समय हो गया। बडी रानी ने एक तरकीब ढूंढ निकाली। वह एक बिल्ली के बच्चे को ले आई और एक दासी को कुछ पैसे दिए, ताकि वह राजा से कहे लडकी पैदा हुई हैं। दूसरी बात यह तय की गई कि एक पंडित को पैसे दे कर पटाया जाए और उसके द्वारा राजा को यह कहलवाया जाए कि बारह वर्ष तक लडकी पर पिता का साया नहीं पडना चाहिए।
सभी को दोनो सुझाव जंच गए। अगले दिन दासी के हाथ राजा को खबर भेज दी गई कि कन्या हुई हैं। राजा सुनकर खुश हुआ। जब राजा ने कहा कि वह रानी और अपनी बेटी को देखने जा रहा है तो बडी रानी ने कहा, ’महाराज! जाने से पहले पंडितजी से सलाह अवश्य कर लें। पता नहीं, बच्ची के ग्रह कैसे हैं? पंडित ने राजा से वहीं कहा जो पहले से तय किया गया था। वह बोला,’राजन! आफ ग्रह इस बच्ची से टकराते हैं। अच्छा होगा यदि आप बारह वर्ष तक अपनी पुत्री से न मिलें।‘ राजा ने कहा,’भाई! मैं तो उसकी सलामती के लिए सब कुछ ही दिन बाकी थे तो राजा ने बडी रानी को बुलवाया और उससे कहा, ’रानी! अब बारह वर्ष बीतने में कुछ दिन ही बाकी हैं। इतनी लंबी अवधि मैनें बहुत मुश्किल से गुजारी हैं। पंडितजी से बात करती हूं‘ इतना कह कर चली गई। बडी रानियों ने सभी रानियों को बुलाया। सभी एक साथ मिलकर सोचने लगी। छोटी रानी को उपाय सुझा, उसने कहा कि पंडितजी से यह कहा जाए कि बारह वर्ष से पहले-पहले शादी कर देनी जरूरी हैं।
राजा ने मंत्रियों को अच्छे वर की तलाश करवाई। विवाह की तिथि निश्चित कर दी गईं। विवाह से कुछ दिन पहले अपने होने वाले दामाद को बडी रानी ने अपने पास बुलाया ओर सारी कहानी सुनाते हुए बोली, ’बेटा, हम बडी मुसीबत में फंस गए हैं। तुम चाहो ंतो हमारी मदद कर सकते हों‘ ’तुम राजा से यह कह दो कि वह दामाद का मुंह देख सकते हों, किन्तु लडकी का मुंह तीन वर्ष तक यह देख सकते। तुम्हारी मां को भी पंडित द्वारा यह कहलवा दिया जाएगा कि वह तीन वर्ष तक बहू का मुंह नहीं देख सकती, क्योंकि ऐसा करना उसके घर के लिए अशुभ होगा। इस प्रकार तुम हम सातों रानियों को मुसीबत से बचा सकतें हों।‘
लडका बडा नेक ओर दयालु था। उसे मुसीबत में फंसी रानियों पर दया आई। उसेन बडी रानी को वचन दिया कि वह वहीं करेगा जो रानी चाहती हैं। शादी बडी धूमधाम ये की गईं। डोली मे बिल्ली के बच्चें को विदा कर दिया गया। लडके ने मां से कह दिया कि बहू के लिए अलग चबूतरा बनवाया जाए, क्योंकि कोई भी तीन वर्ष तक उसका चेहरा नहीं देख सकता।
एक दिन त्यौहार पर लडके की मां ने दुखी होकर अपने बेटे से कहा, ’लोगों के घर बहू आने से रौनक आ जाती है, सास को सुख मिलता हैं। लेकिन मैं अभागिन ऐसी हूं, जिसे न तो बहू का स्पर्स देखने को मिला और न ही उसका कोई सुख।‘ बिल्ली चुपचाप सुन रही थी। अगले दिन जब उसकी सास बाहर गई तो पीछे से बिल्ली ने सारे घर को बुहार डाला, फिर पूंछ पर पोंछन बांधकर सारे घर में पोंछन लगा डाली। इतना करके वह अपने चबूतरें पर वापस लौटी तो घर भर को साफ-सुथरा देख कर राजकुमार की मॉ आश्चर्यचकित हो गईं। सोचने लगी, आखिर झाडू-बुहारी कौन कर गया?
एक दिन जब बिल्ली घर की सफाई कर रही थी तो शिवजी और पार्वती उधर स निकले। पार्वती ने बिल्ली को सफाई करते देखा तो रूक गई। पार्वती ने बिल्ली से ऐसा करने का कारण पूछा। पार्वती के पूछने पर बिल्ली बोली, ’राजा की संतान न होने के कारण रानियों की जान खतरे में थी। मेरे पति ने बडी कुर्बानी की हैं। मुझसे विवाह कर मुझे अपने घर ले आए। पार्वती को दोनो पर दया आई। उन्होंने नारियल तेल में भस्म मिला कर बिल्ली को देते हुए कहा,’इसे अपने बछन पर चार दिन मलने से सभी दुःख दूर हो जाएंगें। बिल्ली ने ऐसा ही किया। वह सुन्दर लडकी बन गईं। उसने अपनी एक टांग को छोडकर सारे शरीर में चार दिन तक तेल मला। चौथे दिन शाम को जब लडका लौटा तो बिल्ली के स्थान पर एक सुंदरी को देखकर आश्चर्यचकित हुआ। इस पर सुंदरी ने कहा, ’मैं। ही आपकी पत्नी बिल्ली हूं। शिव-पार्वती ने मुझे दर्शन दिए। उनसे मैंने अपनी सारी राम कहानी कही। अब मैं बिल्ली से स्त्री बन गई हूं। जब लडके को सुंदरी की इस बात पर विश्वास न हुआ तो सुंदरी ने अपनी वह टांग दिखाई जिस पर उसने तेल नहीं मला था। बिल्ली बोली,’यह अंग मैनें आपकी तसल्ली के लिए ही छोडा हैं। लडका बडा ही खुश हुआ। दूसरे दिन वह राजमहल पहुंचा। उसने सातों माओं को सारी कथा सुनाई। उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इसके बाद राजा को कन्या का मुंह दिखाने का निर्णय ले लिया गया। राजा अपनी रानियों सहित दामाद के घर पहुंचा। वहां अपनी रूपवती कन्या को देखकर वे सब फूले न समाए।