एक व्यकित को अपने किसी कार्य सें संतष्टि नही होती थी। उसे ऐसा लगा करता था कि कही न कही त्रुटि रह गई है।
एक बार वह बेंजामिन फ्रेंकलिन के पास गया और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताया।
उस व्यकित की समस्या सुनकर फ्रेकलिन बोले, संसार में यदि कोंई बडी गलती है तो वह है- निठल्ला बैठना। जो व्यक्ति यह गलती नही करता, उससे यदि छोटी मोटी गलतियां हो भी जाए तो बुरी बात नही है। व्यक्ति को सदैव कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।
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