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बोध कथा

20 Jun 2008      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

कई मूर्ख एक साथ टोली में रहते थे। वे परस्पर एक-दूसरे की बात का विश्वास करते तथा साथ-साथ ही बाहर भ्रमण करने जाते थे। एक बार वे अपने स्थान से दूर किसी गांव को जा रहे थे कि रास्ते में एक नदी थी। उन्हें नदी पार करके दूसरी और जाना था, किन्तु उनमें से किसी को भी तैरना नहीं आता था। वे नदी के किनारे खडे हो गए और सोचने लगे कि अब क्या किया जाए? आश्चर्य! सबको एक ही साथ एक ही विचार आया।
उन्होंने सोचा कि यहां नदी के किनारे पानी बडा उथला है। जैसे-जैसे नदी में आगे बढेंगे, पानी घुटनों तक आएगा और बीच में पानी अवश्य ही गहरा होना चाहिए। यानी कि बीच में पानी हमारे सिर के ऊपर से बह रहा होगा। फिर आगे कम होता जाएगा। घुटनों तक हो जायेगा। दूसरे किनारे पर जल पुनः उथला होगा। विचार करने पर वे सभी इस परिणाम पर पहुंचे कि जल का औसत स्तर केवल घुटनों तक होगा।
प्रसन्नता से उन्होंने एक-दूसरे के हाथ पकडे और नदी में आगे बढे। और वे सब डूब गये।
नदी पार करते समय औसत किसी को भी नही निकालना चाहिए। कहने का तात्पय। यही है कि पतन की ओर ले जाने वाली समस्त बुराइयों का हमें विवके होना चाहिए और उनसे प्रतिक्षण बचते रहना



Comments to this Article
badi sadi huyi katha hai., neha (2009-11-27 20:03:43)
Nice story
Lage raho...., Rupesh (2009-08-07 22:12:22)
it's too good, shubham (2009-09-21 13:19:50)
Yeah kya tha, Rohit (2010-01-06 10:58:35)
well done! keep going, deepali (2010-01-22 17:01:08)
what stupid try to write in english u fool, deepa (2010-01-22 17:03:17)
sach me ye ek soch ne layak bodh katha hai , aashish991 (2010-01-30 19:18:11)
HA HA HA DUB KE MARGAE. SALE PAGAL, SACHIN (2010-02-08 19:38:37)
actualy Ensan ke pass SadVivek hona bahut zaruri hai, shri (2010-04-30 15:39:55)
nisc Sotry, saurabh Chavan Pune (2010-05-18 17:43:35)
good story, chika (2010-06-03 16:19:33)
good joke
, raaj (2010-05-30 15:05:25)
REALLY INSPIRED, RA VI YADAV REWARI (2010-06-05 16:23:20)
Bat ye nahi k Katha kaisi Hai!
Uske Mahatva ko samjna Chahia., Prashant Patel, A'Bad (2010-06-11 17:31:50)
Nice story but i didnt like, Ban (2010-08-23 03:51:17)
Ek bar ki Galti bhi Insan ko bhari pad sakti hai.Bahut soch kar kadam badhayen.Very nice katha., K.R.Maurya (2010-11-19 10:14:10)
thik thi !!!!
, nilesh (2010-12-30 12:02:23)
kuch bhi karne se pahale kisi gyani insan se puchana chahiye., pavan (2011-01-02 10:24:08)
nice stoey my friend, dhiru (2011-02-15 02:18:40)
Nice and simple story with really good moral. Moral stories are simple(badi sadi huyi katha for many people who can't understand those morals behind those stories) but have good teacings. , Anu (2011-02-20 09:57:50)
good teaching
, Jagtar (2011-03-07 09:38:34)
Bhahot Khub, Firoj Shaikh (2011-05-17 02:05:16)
एक बोध कथा जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । दर्शन...शास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ... उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी़ बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ... उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ... आवाज आई ... फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये h धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये , फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ... फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ .. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा .. सर ने टेबल के नीचे से चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित थोडी़ सी जगह में सोख ली गई ... प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया – इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो .... टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं , छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है .. अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ... ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ... यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछेपडे़ रहोगे और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय नहीं रहेगा ... मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ , घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ... टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है ... बाकी सब तो रेत है .. छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे .. अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया कि " चाय के दो कप " क्या हैं ? प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसीने क्यों नहीं किया ... इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये , Nishant Srivastava (2011-06-06 12:07:24)
Nice story, Laxman (2011-06-18 10:55:38)
wonderful story by children , Lokesh Bramhankar (2011-09-02 04:47:01)
Very nic story., Ankita rani mishra. (2011-10-28 05:41:01)
very nice story, rajnish (2012-01-21 07:54:46)

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