भारतीय क्रिकेट टीम का दक्षिणी अफ्रीकी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय टीम दो महत्वूपर्ण एकदिवसीय मैचो की प्रतियोगिताओ में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद देश में कडी आलोचनाओ को झेल रही है। आगामी विश्वकप के मध्यनजर भारतीय टीम का यह दौरा टीम से ज्यादा कप्तान राहुल द्रविड और कोच ग्रेग चैपल के लिए अग्नि परीक्षा साबित होगा क्योंकि भारतीय टीम के खराब प्रदर्शन की वजह कप्तान और कोच के गलत निर्णय बताये जा रहे है। भारत और दक्षिण अफ्रीका का क्रिकेट इतिहास के अनुसार दक्षिण अफ्रीका का दौरा भारत कें लिए हमेशा मुश्किलो से भरा रहा है। इस लिहाज से भी कप्तान ओैर कोच के लिए यह दौरा कठिन चुन्नौति साबित होगा।
दक्षिण अफ्रीका एक ऐसा देश है* जिसके साथ भारत के मधुर राजनैतिक संबध है और भारत ही पहला देश है जिसने उसके उपर से प्रतिबंध हटने के बाद सर्वप्रथम क्रिकेट सीरीज खेली। प्रतिबंध हटने के बाद भारत ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका को मान्यता दिलाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के प्रयासो से ही दक्षिण अफ्रीका को १९९१ के विश्वकप में शामिल किया गया। दक्षिण अफ्रीका के विश्वस्तरीय और आधुनिक सुविधाओ से युक्त क्रिकेट मैदान भारतीय क्रिकेटरो को आकर्षित करते है। मो. अजहरूद्दीन,एस. तेदुलकर और कपिल देव इन मैदानो पर अपनी बल्लेबाजी के जौहर दिखा चूके है। परन्तु इन मैदानो पर भारत के हिस्से में जीत बहुत कम आई है। दक्षिण अफ्रीकी मैदानो पर भारत ने ९ टेस्ट मैच खेले है और इसमें ४ मे हार मिली है और अभी तक एक भी टेस्ट नहीं जीत पाया है। इसलिए भारत इस बार दक्षिण अफ्रीकी मैदानो मे अपनी पहली टेस्ट विजय प्राप्त करना चाहेगा और एकदिवसीय मैचो में १६ मैचो में मात्र ३ जीत ही हासिल कर सका है तथा १२ में हार मिली है। इसलिए आंकडे बताते है कि भारत के लिए दक्षिण अफ्रीकी मैदान कांटो से भरे हुए रहे है। यहां भारत के लिए सफलता काफी मुश्किल से मिलती है। अजहररूद्दी और सौरव के नेतृत्व में भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर चुकी है। विश्वकप २००३ के फाईनल में पहुचने वाली सौरव की टीम भी दक्षिण अफ्रीकी मैदानो की पहेली सुलझा नहीं पाई । अब यह जिम्मेवारी राहुल द्रविड की टीम पर है।
राहुल की टीम मलेशिया में डीएलएफ कप और भारत में चैम्पियंस ट्राफी में असफल रह चुकी है। उनके पास इस असफलता को धोने का अवसर दक्षिण अफ्रीका के विरूद्ध है। परन्तु यह अवसर कठिनतम अवसर है। लगातार दो प्रतियोगिताओ में हार से टीम का मनोबल निम्नतम स्तर पर है। टीम चारो तरफ से आलाचनाऐं झेल रही है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका पर पार पाना टेढी खीर होगा। भारत को अपने खिलाडयों की प्रतिभा का उचित उपयोग करना होगा। भारतीय टीम प्रतिभाशाली खिलाडयो से युक्त है परन्तु उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। भारत के बल्लेबाजी क्रम को सुधारना होगा। फार्म से बाहर चले रहे बल्लेबाजो के लिए पवेलियन सबसे उपयुक्त जगह होगी। वसीम जाफर का भी सही उपयोग होना चाहिए। द्रविड को भी फार्म में आने के लिए प्रयास करना होगा। दक्षिण अफ्रीका की तेज विकेटो पर भारतीय बल्लेबाजो को अपनी ताकत दिखानी होगी तभी भारतीय अपने अभियान में सफल हो सकेगें। दूसरी गेंदबाजो में इरफान और मुनाफ पटेल के लिए दक्षिण अफ्रीकी विकेटे स्वर्ग साबित हो सकती है। यदि वे इन विकेटो पर सफल रहे तो भारत दक्षिण अफ्रीकी मैदानो पर अपना रेकार्ड सुधार सकती है। दक्षिण अफ्रीकी टीम चैम्पियंस ट्राफी में अच्छे प्रदर्शन के बाद उत्साह से लबरेज है और इस कारण वह भारत पर हावी रहेगा परन्तु ंभारतीयों को समझ लेना चाहिए कि सिकंदर वही है जो मैदान में अच्छा प्रदर्शन करे और जीत हासिल करे। मैदान में जीत कर भारतीय टीम आकडो को झूठा साबित कर सकती है।
भारतीय टीम इस समय दबाव और तनाव से गुजर रही है और इससे उबरना ही उसकी प्राथमिकता होगी। टीम यदि सकारात्मक सोच के साथ मैदान में उतरेगी* तो काफी कुछ हासिन कर सकती है। भारतीय टीम के पास दक्षिण अफ्रीका को पराजित करने की क्षमता है परन्तु उस क्षमता प्रदर्शित करवाना कोच का काम है । बहरहाल भारतीय क्रिकेट प्रेमी विश्वकप से पूर्व दक्षिण अफ्रीका में भारतीय टीम से एक बडी जीत की उम्मीद कर रहे है।
मनीष कुमार जोशी
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