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16 May 2008
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23
Dec
चीते के बेटे-बहू 
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किसी  गॉव में गरीब पति- पत्नी रहते थे उनके कोई संतान नही थी उनके पास एक इंच भी जमीन नही थी वे रोज वन मे जाते कंदमूल खाते और अपनी कुटिया में सो जाते जगंल ही उनके जीने का सहारा था कुछ दिनो बाद पत्नी के पांव भारी हो गए  पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया पत्नी ने पति को आवाज दी सुनते हो बेटा जन्मा है अब हम क्या करे?
गरीब ने कहा-घर में एक दाना नही है न कपडे लते है हम इसे पालेगे कैसे? पत्नी ने कहा ठीक है इसे जंगल में छोड देते है। इसके भाग्य में जो लिखा होगा वही होगा। वे दोनो बच्चे को छोड कर घर चले गये।  बच्चे के रोने की आवाज सुनकर एक चीता वहंा आया और उसे अपनी मांद में ले गया। वह उसका अपने बच्चे की तरह पालन-पोषण करने लगा।
वह बच्चा बडा हुआ तो चीते को उसके ब्याह की चिंता हुई। एक दिन चीते ने लडके से पूछा तुम्हारे लिये एक लडकी ले आउ

सकुचाते हुए लडके ने कहा जो आपकी मरजी अगर आप मेरी शादी करना चाहते है तो कोई लडकी ले आये। चीता किसी के उधर आने का इतंजार करने लगा।एक लडकी आई।चीता उसे उठाकर घर की तरफ चल पडा। रास्ते में वह अपने पर काबू न कर पाया और उसका आधा कान खा गया। वह उसे लेकर घर पहुंचा और कहा बेटे मै तेरे लिये लडकी लाया ह पसंद कर लो।
लडके ने बाहर देखा अरे इसका तो एक कान गायब है। वह बोला पिताजी मुझे आधें कान वाली लडकी पसंद नही है।
इस तरह चीता कई लडकियो को लाता और अपनी बुरी आदत के कारण किसी के कान किसी के हाथ या नाक खा जाता।
आखिर एक दिन लडके ने कहा कि मुझे पूरे सुदंर शरीर वाली लडकी चाहिए।
इस बार चीता दुल्हन को सही सलामत घर लाया उसने पूरी सावचेती बरती । बेटे से उसका ब्याह कर दिया गया और सुख चैन से रहने लगा।
एक रोज सब्जी काटते हुए बहु की उंगली कट गयी । उसने पतियों से खून पोछ दिया। खून की गंध पाकर चीता वहॉ पहुचा और खून चाटने लगा। उसने सोचा यदि खून इतना स्वाद है तो मांस कितना स्वाद होगा वह उसको खाने की सोचने लगा। पति-पत्नी समझ गये कि चीते की नीयत मे खोट है। वह उन्हें खायेगा।
उसी रात दोनो वहा से भाग गए और चीते को उनका कहीं पता नही चला। उनके पांवों के सहारे वह उनके पीछे पीछे गया लेकिन वे दोनो अब जंगल छोडकर नगर मे बस गए। सुख शांती से रहने लगे। चीता अपनी बुरी हिंसक आदत के कारण हमेशा के लिए अपने बहू बेटे से दूर हो गया। अब वह अकेले पडे-पडे पछता रहा था।




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