Sunday, 01 November 2020

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उपभोक्ता रखे आंख कान नाक खुली


15 मार्च  विश्व उपभोक्ता दिवस पर विशेष

Rajendra Kumar Sharmaवर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति इस सांसारिक जीवन में जन्म से ही किसी न किसी प्रकार से किसी न किसी का उपभोक्ता है। इसलिये उपभोक्ताओं को सामान एवं वस्तु से संबधित आने वाली पेरशानियों से बचानें के लिए ही भारतीय संसद द्वारा  उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक 9 दिसम्बर 1986 को पारित किया गया। इस अधिनियम के लाभ भारत के जम्मू कश्मीर क्षेत्र को छोडकर प्रत्येक क्षेत्र के निवासियों को प्राप्त है। इस अधिनियम में उपभोक्ता से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो वस्तु या सेवा कीमत देकर अथवा कीमत देनें का वचन देकर क्रय करता है। ऐसी वस्तुओं की किसी प्रकार की खराबी या कमी के लिये उपभोक्ता मंच में अपनी शिकायत प्रस्तुत की जा सकती है। अर्थात आज के  दौर में उपभोक्ताओं द्वारा ली जाने वाली सेवाओं या वस्तुओं में यदि कोई सेवा प्रदाता किसी प्रकार की कमी कारित करता हैं तो उपभोक्ता उसके विरूध राहत पाने का अधिकारी है। यह अधिकार उपभोक्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 ही प्रदान करता है। यह एक ऐसा अधिकार है जो उपभोक्ताओं को उनके हितो की पूर्ति के लिये दिया गया है।
किसी वस्तु या सेवा प्रदाता से परेशान हुआ उपभोक्ता व्यक्ति इस अधिनियम के अनुसार अपनी शिकायत साधारण पेपर पर अंकित कर जिला मंच में भेज सकता है जिसके लिए पिडित पक्षकार को परिवाद पत्र में अपना पूर्ण नाम पता एवं विक्रेता का पूर्ण नाम पता तथा वस्तु की कमी का कारण उल्लेखित करते हुए अपने को हुए नुकसान या क्षति का पूर्ण विवरण देना होता है। इसके साथ ही शिकायत कर्ता को क्र्रय की गई वस्तु का बिल एवं अंकित तथ्यों के समर्थन में एक शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होता है। इस उपभोक्ता मंच में परिवाद प्रस्तुत करने से पूर्व उपभोक्ता/शिकायत कर्ता के लिए यह आवश्यक है कि उसने ऐसी सेवायें राशि अदा कर प्राप्त की हो । यदि उपभोक्ता ने किसी प्रकार की सेवायें निशुल्क उपहार स्वरूप प्राप्त की है तो वो इस अधिनियम के तहत उपभोक्ता नहीं है और उपभोक्ता मंच में उसे किसी प्रकार की शिकायत करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। 
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम/कानून के तहत कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए अपने को हुई क्षति के लिये अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकता है। यदि उपभोक्ता यानि पिडित व्यक्ति का नुकसान  20   लाख रूपयें तक का है तो उसे अपनी शिकायत जिला उपभोक्ता मंच में प्रस्तुत करनी चाहिये। ऐसे जिला मंच प्रत्येक जिला स्तर पर कार्यरत है। यदि नुकसान 20 लाख रूपये से अधिक का परन्तु एक करोड तक का है तो शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत राज्य उपभोक्ता आयोग में दर्ज करानी होंती है। इसी प्रकार एक करोड से अधिक का नुकसान या क्षति होने पर शिकायत कर्ता को अपनी शिकायत राष्ट्रीय आयोग में दर्ज करवानी होती है।  उपभोक्ताओं के लिये इस अधिनियम में वस्तु की कीमत एवं दावा राशि के अनुसार शुल्क का निर्धारण भी किया गया है। अर्थात एक लाख रूपये की दावाकृत राशि के लिये एक सौ रूपये और दो से पांच लाख रूपये के लिये दौ सौ रूपये की राशि का शुल्क पोस्टल आर्डर के माघ्यम से जमा करवाना होता है। तभी परिवादी का परिवाद दर्ज होता है। पिडित पक्षकार अर्थात उपभोक्ता अपनी शिकायत या परिवाद पत्र वाद कारण पैदा होने की तिथि से 2 वर्ष की अवधि में ही प्रस्तुत कर सकता है। यहां यह बात भी उल्लेखित करनी आवश्यक है कि सेवा प्राप्तकर्ता उपभोक्ता सेवा में कमी होने की सूचना या शिकायत स्वयं या किसी पंजीकृत संस्था द्वारा 15 March, Consumer Day - e-Cardक्षेत्राधिकार के अनुसार अपनी शिकायत प्रेषित कर सकता है।
किसी वस्तु की शिकायत जहां वह क्रय की गई वहां या जहां उपभोग की गई या जहां वस्तु विक्रता या सेवा प्रदता निवास करता है वहां शिकायत प्रस्तुत की जा सकती है। उपभोक्ता मंच में शिकायत पीडित पक्षकार द्वारा या उसके अधिकृत  प्रतिनिधी या स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन द्वारा या समिति जो पंजीकृत हो, के माध्यम से दर्ज करवा सकता है।
आज के दौर में अनेक सेवा प्रदाता संस्थान है जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में शामिल है जैसे बिजली, जल, टेलिफोन, बीमा, बैंक, नगरपालिका, परिवहन, रेल, डाक, तार, हवाई जहाज, मोबाइल प्रदाता, आदि। जिनसे सेवा में कोई कमी कारित होती है तो उपभोक्ता को अधिकार ह कि उनके विरूध सेवा में कमी की शिकायत क्षेत्राधिकार अनुसार संबंधित उपभोक्ता मंच में कर सकता हैं। जिला उपभोक्ता मंच के आदेश की अपील 30 दिवस में राज्यआयोग में ओर राज्यआयोग की अपील राष्ट्रीय आयोग में की जा सकती है। संबंधित पक्षकार को अपील के अभाव में सक्षम मंच के आदेश की पालना करनी आवश्यक है। यदि बिना अपील किये जिला मंच के आदेश की पालना नहीं की जाती है तो इस अधिनियम में  सेवा प्रदाता को सजा एवं जुर्माने से दण्डित किये जाने एवं पारित आदेश की पालना में संपति कूर्की का प्रावधान है। यदि उपभोक्ता मंच में कोई झूठी शिकायत दर्ज करवाता और ऐसी शिकायत झूठी एवं परेशान करने वाली साबित होती हैं तो शिकायत कर्ता पर भी 10000 रूपये तक का हर्जाना लगाया जाकर विपक्षी पक्ष विक्रता या सेवा प्रदाता को दिलाया जा सकता है।
आज विश्व उपभोक्ता दिवस पर उपभेक्ताओं को अपने अधिकारो की रक्षा के लिये इस क्रांतीकारी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम रूपी शस्त्र का लाभ प्राप्त करना चाहिये यह लाभ तभी मिल सकेगा जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागृत एवं शिक्षित होगा और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए को तैयार होगा। आज के समय में उपभोक्ता को  सामान क्रय करते समय सचेत रहना चाहिए और क्रय की गई वस्तु का बिल अवश्य लेना चाहिए यदि कोई गारान्टी या वारान्टी कार्ड हो तो उसे भी लेना नहीं भूलना चाहिए । बिल नहीं लेने की भूल तो कभी भी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि बिल के अभाव में आप किसी वस्तु के विक्रता को साबित नहीं कर पाओगे। आज विश्व उपभोक्ता दिवस पर उपभोक्ताओं को यह संकल्प अवश्य लेंना चाहिये  कि उपभोक्ताओं को ग्राहक बनते समय क्रेता सावधान के सिद्धान्त की पालना अवश्य करनी चाहिये। अर्थात उपभोक्ताओं को दैनिक जीवन में उपभोग की वस्तु क्रय करते समय अपने कान बंद और ऑंखे  खुली रखनी चाहिये ताकि  उपभोक्ता अच्छी और गुणवता युक्त वस्तु क्रय कर लाभ उठा सके।  उपभोक्ता इस बात का ध्यान रखें कि किसी को परेशान करने के लिये मिथ्या परिवाद पेश ना करें और उपभोक्ता अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अनुसार अपने अधिकारों का समुचित लाभ उठायें। मेरा तो आज के प्रतिस्पर्दातात्मक समय में देश के उपभोक्ताओं से यही कहना है कि वे अपने अधिकारों के प्रति स्वंय जागरूक होकर उनकी रक्षा करें तभी भारत सरकार द्वारा बनाया गया यह कानून उनकी रक्षा कर सकेगा। इसलिये तो कहा गया है कि जागो ग्राहको जागो।

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