Friday, 25 May 2018
khabarexpress:Local to Global NEWS

काॅरपोरेट कबड्डी: भविष्य निर्माण करने वालों के लिये मंत्र किताब

काॅरपोरेट कबड्डी: भविष्य निर्माण करने वालों के लिये मंत्र किताब

तकनीक, पत्रकारिता और व्यवसाय मे मेरे अनुभवों के आधार पर मंै इस पुस्तक का समीक्षात्मक दुष्टिकाण रखना चाहुं तो मै सर्वप्रथम इस किताब कोे शीर्षक से समझने का प्रयास करना चाहुंगा।  
शीर्षक चयन से तो उभकर सामने आना चाहिये कि एक बड़ा समूह कैसे अपने आप को अपने क्षेत्र मे टिकाये रखता है लेकिन पुस्तक पढ़ने बैठते हो तो समझ मे आता है कि यह पुस्तक आम इन्सान के किसी बड़े समूह मे रहकर काम करने के प्रैक्टिल तरीके कौनसे होते है उसकी बारिकियों से अवगत करवाती है। 


अर्थात काॅर्पोरेट दुनिया के विविध पक्षों की ना होकर उसके मानव संसाधन विभाग के अन्तर्गत कार्य करने की एक प्रायोगिक व्यवस्था कैसी होती है, और उस व्यवस्था मे नया कर्मचारि केे टिके रहने व शीर्ष पर पंहुचने की मंशा रखने वाले के लिये सुन्दर सरल, प्रेरणादायक उदाहरणों के तौर तरीके या शीर्षक तथा किताब के आवरण सज्जा के अनुसार कह सकते है दावं पेंच बताये गये है।


लेखक की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो यहां इस सदन मे बैठे लगभग सभी जानते है कि आप प्रबंधन क्षेत्र के  व्याख्याता है, इससे भी आगे बढ़ते हुए अपने ओजस्वी विचारों, क्रियाकलापों तथा तथ्यात्मक अध्ययन, संवाद अदायगी के  बेजोड़ गुणों के बूते एक मोटीवेशनल गुरू और लाइफ कोच जैसी विद्या के पारंगत इन्सान है, जिसके लिये वे प्रतिष्ठित भी है।


बीकानेर अथवा  पश्चिमि राजस्थान या पूरा राजस्थान ही कह लो, यहां पर प्रायः नाट्य, नीति-रिति, जीवनचर्या, कैरेक्टर, सामाजिक ताने बाने, महिलाआंे आदि पर ही लेखन हुआ है और खूब हुआ है, लेकिन इसी क्षेत्र मे रहकर इसी क्षेत्र को तकनीकी पक्ष से उभारने के लिये कोई खास पुस्तक लेखन कार्य नही हुआ है, यह पुस्तक हिन्दी भाषी युवाओं को प्रगतिवाद सोच से रोजगारोन्मूख  करने का बहुत बड़ा सम्बल प्रदान करती है। यह पुस्तक मात्र व्यापार या रोजगार क्षेत्र हेतु तकनीकी लेखन भर नही वरन् साहित्य के मुख्य उद्देश्यों मे शामिल चरित्र निर्माण का प्रेरणात्मक दस्तावेज भी है।

लेखक डाॅ बिस्सा द्वारा पुस्तक कार्पोरेट कबड्डी मे मूल रूप से सौ से ऊपर पृष्ठों मे कहानियों, सन्दर्भो, उदाहरणों और अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से कुल 51 आलेख कलमबद्ध किये गये है जो हमे व्यक्तित्व, ड्रेसिंग सेंस, बाॅडी लैंग्वेज, लड़ाई, दुख, सम्बन्ध, योग्यता, मशीनीकरण, टेम्परामेंट, विपदा प्रबंधन, मूल्य सवंर्द्धन, नेत्तृत्व, बृद्धि उपयोग, बदलाव,  जैसे व्यक्त्वि निर्माण के गुणों को इजाफा करने का पाठ पढाते है वहीं कबड्डी मे होने वाले दांव पेंचों की ही तरह अन्य गुणों जैसे बेहतरीन कम्युनिकेशन, भोज तथा उपहार की राजनिति,  स्वतः मदद के लिये आगे बढ़ कर कार्य करने के दावपेंचों को सीखने की समझाईश करते नजर आते है तो इसके उलट आत्मविश्वास और विनम्रता मे अतिवादिता, बलि के बकरे न तलाशे, डेढ़ होशियारी, चापलूस, तिरस्कार,  प्रवृत्त्ति छोड़ देने के नुस्खों से आपको इस खेल मे नैतिक बल से टिकाये रखने का उदाहरण बनते नजर आते इससे आगे बढ़ते हुए इस खेल को जीतने के लिये मुर्दा शान्ति, छिपी समस्या को देखना उसका समाधान, वन मिनिट थैरेपी, प्रभावी कम्युनिकेशन, निडरता, सूचना, ज्ञान और समाधान, रोना ना रोना, समयोचित बदलाव जैसे विशेष दावं पेंच अर्थात गुण को प्रभाविक शैली मे प्रस्तुत किये है।


राजस्थानी भाषा मे बोले जाने बहुत सारे शब्दों, कहावतों, मुहावरों को इस हिन्दी पुस्तक मे जगह देकर राजस्थानी भाषा की समृद्धता, मिठास, व्यंग्य क्षमता की झलक भी इस पुस्तक मे मिलती है जिससे की राजस्थान के लोगों के मैनेजमेंट को अपनी खुद की भाषा मे सीखने का अवसर मिलेगा।
इस पुस्तक को पढ़ा तो बहुत से ऐसे विषय सामने आये जिनको मैने एक नियोक्ता के रूप मे समझने का प्रयास किया और स्वयं अपने दैनिक प्रकल्पों के नजदीक पाया जैसे भाई भतीजावाद, बाॅस के मददगार बनिये, वन मिनिट थैरेपी आदि।

यह पुस्तक मोटे कागज के फ्लैप और हार्डबाउण्ड कवर तथा सहज पठनीय फोन्ट संख्या मे मुद्रित है।  फ्लैप के अन्दरूनी हिस्से मे किताब मे लिख्तिा कंटेंट के बारे मे लिख रखा है तथा बैक पेज पर लेखक का परिचय किताब की अहमियत बढ़ाता है। 
पठनीय दुष्टिकोण से हम कह सकते है कि लेखक ने इस पुस्तक मे कार्पोरेट दुनिया मे काम करने के हर एक तौर तरीके, सोच-विचार, गुणों-दुर्गुणों को सिलसिलेवार अध्ययन व मनन करने के बाद बहुत सीधी सरल भाषा मे आम पाठक , कैरियर एस्पायरेंट के लिये यह पुस्तक लिखि  है।  


दो तीन बाते रखना चाह रहां हू कि जिसमे एक जगह पर अच्छाई का शोर विषय बहुत अति जैसा प्रतित होता है, अभी एक नया टर्म चल रहा है अच्छाई की मार्केटिंग अर्थात अच्छाई का समुचित प्रचार प्रसार होना उचित होता है। 


दुसरी बात जो रखना चाहुंगा कि किताब का एक उपशीर्षक जो कि इसके मूल पक्ष को उजागर कर सकता हो, जोड़े जाने की गंुजाइश रखता है जिससे कि इसके जरूरतमंद पाठकों तक सुगमता से पहचान करवाई जा सके, हालांकि आवरण ग्राफिक के माध्यम से इसको झलकाने की कोशिश की है मगर टैग लाइन या नैरेटिव शीर्षक इसका बेहतर कैटेगराइजेशन कर सकता है।

 

मेरे आधे अधुरे ज्ञान के साथ मै अपनी वाणी को विश्राम देते हुए मैं कहना चाहुंगा कि एक चीज जो इस पुस्तक को खास बनाती है वो है इसकी सीमित शब्दों के बावजूद एक कहानी/सन्दर्भ फिर उसके बाद  सीखने योग्य तथ्यों को सीधे-सपाट शब्दों बिन्दुवार प्रस्तुति और सीखने की बात।
यह इस किताब की उपलब्धि है कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति जिसको अभी डाॅ गौरव बिस्सा जी को साक्षात सुनने का अवसर नही मिला है, वह इन्सान इस पुस्तक को पढ़ते हुए अपने जीवन मे इस कमी को पूरा कर सकता है।

 

250 रूपये की कीमत पर उपलब्ध यह पुस्तक कलासन प्रकासन से प्रकाशित हुई है और क्रय करने के लिये आप डाॅ गौरव बिस्सा से मोबाइल नम्बर 9414475264 पर सम्पर्क कर सकते है।