विश्व कप जीतना और विश्वकप विजेता टीम का सदस्य होना किसी रूमानी रोमांच से कम नहीं है। विश्वकप विजेता होना चांद सितारो के सपनो के सच होने जैसा है। चांद की रोशनी में विश्वकप की चमक में विजेता टीम के खिलाडयों के चेहरे पर गौरव की अनूभूति देखी जा सकती है। इसी गौरव की अनूभूति करने के लिए हर एक क्रिकेटर सपना देखता है और यह सपना वही पूरा कर सका है जो अपनी जिद पर अड गया हो। विश्वकप क्रिकेटका इतिहास गवाह है कि इस खिताब का वरण उसी ने किया है जो इस हासिल करने की जिद से मैदान में उतरा हो। जिद भी उन खिलाडयो ने की जिसकी जिद को बच्चो की जिद माना गया। इसके बावजूद उन्होने अपनी जिद को पूरी करने के लिए सीमित साधनो से मैदान में उतर गये और चांद सितारो की गवाही में मैदान मार लिया।
विश्वकप का खिताब १९७५ और १९७९ में जीत कर वेस्टइंडीज विश्व क्रिकेट का बादशाह बन गया था। इस बादशाह को उस समय चुन्नौत्ती देने के बारे में सोचने की भी किसी की हिम्मत नहीं थी क्योकि उस टीम में क्रिकेट की दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज ज्याल गार्नर और मार्शल जैसे गेंदबाज थे। लेकिन भारतीय क्रिकेट की कमान संभाल रहे कपिलदेव १९८३ में विश्वकप को चूमने की जिद के साथ मैदान में उतरा। कपिलदेव जिसे उस समय भारतीय क्रिकेट की कमजोर कडी माना जाता था। सुनील गावस्कर वाली की उपस्थिति में कपिल को अपनी कप्तानी क्षमता को भी साबित करना था। परन्तु कपिल ने अपने बचपन के सपने को पूरा करने की जिद ठान ली। उस समय यह जिद किस बच्चे द्वारा चांद को लेने की जिद के बराबर थी। परन्तु कपिल अकेला ही चल पडा था, उस समय की सबसे कमजोर टीम को लेकर अपनी जिद पूरी करने। उसने क्रिकेट के बादशाह को पराजित कर इस जिद को पूरा किया और पूरा क्रिकेट जगत अंचभित रह गया। कपिल से कहीं मजबूत २००३ की सौरव की टीम फाईनल में हार गई । कारण स्पष्ट है सौरव के पास उस जिद और जूनून की कमी थी। १९८७ के विश्व कप के सेमिफाईनल में पराजित पाकिस्तानी टीम १९८३ में अपने पडोसी देश के द्वारा विश्वकप जीतने से आहत थी। १९९१ में पाकिस्तानीयो ने जिद पकड ली कि उन्हे विश्वकप पर पाकिस्तान का नाम अंकित करवाना है। इसी जिद को पूरा करने के लिए उन्होने सन्यास ले चूके इमरान खान को वापिस बुलाया। जावेद मियांदाद और सलीम मलिक जैसे बूढे शेरो से युक्त उस समय की एक कमजोर टीम विश्वकप जीतने की जिद से मैदान में उतरी । १९९१ के विश्वकप के लीग मैचो में यह सबसे कमजोर टीम साबित हुई। परन्तु इमरान की विश्वकप जीतने की जिद ने इस टीम को जैसे तैसे आगे बढाया परन्तु अन्ततः इमरान ने अपने जीवन काल में विश्वकप जीतने की जिद पूरी की। अब तक क्रिकेट की दुनिया की सबसे कमजोर टीम मानी जाने वाली श्रीलंका की टीम के कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने अपने कैरियर के अंतिम दौर में १९९६ में क्रिकेट की दुनिया के सबसे बडे खिताब विश्वकप को जीतने की जिद पकड ली। १९९६ में दुनिया की सबसे कमजोर टीम के कप्तान अर्जुन रणतुंगा की यह जिद जगहंसाई जैसी थी। परन्तु रणतुंगा ने चार विश्वचैपियनो के बीच अपनी जिद पूरी की और १९९६ में विश्वकप पर अपना नाम अंकित कर दिया।
क्रिकेट के इस चमकदार ताज को धारण करने की जिद केवल कमजोर टीमो ने ही नहीं कि बल्कि १९९९ में दुनिया की सबसे ताकतवर टीम आस्ट्रेलिया को कमजोर टीमो से विश्वकप में पराजित होना नागवार गुजरा और १९९९ में आस्ट्रेलिया की टीम की जिद के आगे विश्व की सारी क्रिकेट टीमें नतमस्तक हो गई और १९९९ में दूसरी बार और २००३ में तीसरी बार विश्वकप जीत अपने आपको बादशाह साबित करने की जिद पूरी की । क्रिकेट की दुनिया के सबसे महान खिलाडी सुनील गावस्कर विश्वकप क्रिकेट मे असफल रहे परन्तु १९८७ मे उन्होने अपने आपको साबित करने की जिद पकड ली और १९८७ के विश्वकप में न्यूजीलैण्ड के विरूद्ध तेजी से शतक लगाकर विश्वकप क्रिकेट में अपने आपको साबित करने की जिद पूरी की। इसी तरह केन्या के भारतीय कोच संदीप पाटील ने केन्या को और अपनी क्षमता को साबित करने की ठान ली। केन्या का विश्वकप में एक मैच भी जीतना किसी सपने के सच होने जैसा था परन्तु उनके कोच पाटील ने चांद को छुने का सपना देखा था और इस सपने को सच करने की जिद के साथ २००३ मे विश्वकप में उतरे और टीम को सेमिफाईनल में पहचाकर पूरे क्रिकेट जगत को अचंभित कर दिया।
क्रिकेट का खेल जिद और जूनून को खेल है और जो खिलाडी एक जूनून के साथ अपनी जिद पूरी करने के लिए मैदान में उतरते है वे चांद जैसे इस ताज को धारण करने का गौरव हासिल करते है। अब एक बार फिर क्रिकेट का मैदान किसी के सपने को पूरा करने की जिद का गवाह बनेगा। विश्वकप से पूर्व आस्ट्रेलिया न्यूजीलैण्ड से लगातार तीन मैच हार चूकी है। उसकी प्रतिष्ठा गिरी है और तीन बार का चैम्पियन को अपनी प्रतिष्ठा फिर से स्थापित करने की जिद पकड सकता है। भारतीय कप्तान राहुल भी कपिल देव की तरह इस विश्वकप को जीतने की जिद पकडते दिखाई दे रहे है क्योंकि अब वे हर मामले में आक्रमक नजर आ रहे है। अब कैरेंबियन मैदान ही बतायेगा कि किस की जिद इस क्रिकेट के इस चमकदार चांद को हासिल करती है फिलहाल सभी टीमे चांद सितारो से अपनी मुराद पूरी करने की सिफारिश करवाने में जुटे है।
मनीष कुमार जोशी