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20 July 2008
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7
Jan
क्रिकेट को गांधी की जरूरत 
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आस्ट्रेलिया ने भारत को सिडनी टेस्ट में 122 रनो से पराजत कर दिया। यह टेस्ट खराब अंपरायरिंग के लिए जो याद किया जायेगा साथ ही भारतीय खिलाडी हरभजन सिंह को नस्लभेदी टिप्पणी का दोषी करार देने के विवाद के लिए भी याद किया जायेगा। आस्ट्रेलियाई खिलाडयों द्वारा पिछले कई सालो से लगातार रंगभेदी टिप्पणीयो का मुद्दा उछाला जा रहा है जबकि वास्तव में सबसे ज्यादा नस्लभेदी कार्य उनके खिलाडयों द्वारा ही किया जाता है। हरभजन को इस मामले में दोषी दिया जाना इसका ही एक उदाहरण है। आस्ट्रेलियाई खिलाडी भारतीय उपमहाद्वीप के खिलाडयों को अपमानित करने का काई अवसर नहीं छोडते है। अब वे सभी हदे पार कर चुके है। यह मामला इतना आगें बढ गया है कि अब क्रिकेट को भी गांधी को जरूरत महसूस होने लगी है।

आस्ट्रेलियाई क्रिकेट रो द्वारा भारत दौर के समय नस्लभेद का मुद्दा उछाला गया था तब पोंटिग ने कहा था कि भारतीय द६ार्को द्वारा एंड्रयू साईमंडस पर नस्लभेदी टिप्प्पणी की गई थी। इसके बाद पोंटिग ने स्वदे६ा लौटकर अपने दे६ा के क्रिकेट  प्रेमियो को भारत के विरूद्ध इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करने की नसीहत देकर उन्हे उकसाने का प्रयास किया और सिडनी टेस्ट में पोंटिग और साईमंडस ने अपनेी काली करतूत का कारनामा दिखा दिया अर्थात सब कुछ पूर्व नियोजित था। श्रीलंका के आस्ट्रेलिया दौरे के समय मुरलीधरन पर आस्ट्रेलियाई क्रिकेट  प्रेमियो द्वारा नस्लभेदी टिप्पणी की गई। इससे पूर्व आस्ट्रेलियाई भारतीय मूल के ईग्लैण्ड के स्पिनर मोंटी पनेसर पर भी इस प्रकार की टिप्पणी की गई थी। ग्रेग चैपल ने भी गत 14 नवम्बर को एक बयान देकर अपने ऊपर पूर्व में हुए हमले का कारण नस्ल भेद बताकर मामले को गर्माने का प्रयास किया। आस्ट्रेलियाई क्रिकेट र नस्ल भेद का मुद्दा उछालकर अपनी गल्तियों को छिपाने का प्रयास कर रहे है। श्रीलंका के दौर से पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेट  अर्जुन रणतुंगा ने मुरली को सलाह दी थी कि वो आस्ट्रेलिया नहीं जाये क्योंकि आस्ट्रेलियाई उन्हे अपमानति कर सकते है। आस्ट्रेलियाई क्रिकेट रो ने मुरली को इस बार भी अपमानित करने का कोई अवसर नहीं छोडा। मरलीधरन पर एक बार फिर चूकर होने का आरोप लगाया गया। रिकी पोंटिग समय समय पर भारतीय क्रिकेट रो पर भी टिप्पणी करते रहे है। हाल ही में उन्होने अनिल कुंबले और भारतीय कप्तानो पर भी टिप्पणी की । सिडनी टेस्ट में उन्होने जिस तरह मेदान में अंगुली से ई६ाारे किये । इससे पोंटिंग की नस्ल भेदी मानसिकता झलकती है। पोंटिंग मोंटी पनेसर को छोडकर अन्य किसी ईगिल६ा क्रिकेट र अथवा न्यूजीलैण्ड के किसी क्रिकेट र पर टिप्पणी नहीं करते है। इसके अलावा भारत में हुई चैम्पियंस ट्राफी जीतने पर मंच से बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पंवार को धक्का देने  के बावजूद पोंटिग को शर्मिदगी नहीं हुई और माफी मांगने की केवलमात्र औपचारिकता निभाई ।
आस्ट्रेलिया निःसन्देह दुनिया की श्रेष्ठ क्रिकेट  टीम है पर इससे उसे मनमानी की छुट नहीं दी जाती है। नस्ल भेद के कारण दक्षिण अफ्रीका दो द६ाक से भी ज्यादा का क्रिकेट  वनवास भोग चुका है। आस्ट्रेलिया इस बात को जानता है और इस कारण दूसरो पर नस्ल भेद के आरोप लगाकर स्वयं बचना चाहता है। दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध अंदरूनी परिस्थितियो के कारण लगा था परन्तु वर्तमान में यह मुद्दा सीधा क्रिकेट  से जुडा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। यदि इस पर जल्दी लगाम नहीं लगी तो यह मुद्दा अनियंत्रित हो जायेगा और क्रिकेट  दो धडो में बंट सकती है। दक्षिण अफ्रकी में नस्लभेद के विराध के द्वारा राजनीति शुरू करने वाले गांधी जैसे महापुरूष की आव६यकता आज क्रिकेट  को महसूस हो रही है। क्रिकेट  का वर्तमान मुद्दा प्रतिबंधो और आरोप-प्रत्यारोप द्वारा नहीं सुलझ सकता है। इसके लिए एक गांधी को क्रिकेट  में आना होगा। इस मुद्दे का निस्तारण गांधवादी तरीके से ही समझाया जा सकता है। गांधीवादी तरीके से ही सब पक्षो को समझाया जा सकता है।
इस साल के अंत में भारतीय टीम आस्ट्रेलिया जा रही है उस समय एक बार भी फिर
 यह मुद्दा चर्चा मं रहेगा। इससे  पूर्व इस पर लगाम लगाना आव६यक है। इसके लिए किसी क्रिकेट से जुडे व्यक्ति को गांधी बनकर आगे आना होगा क्योंकि क्रिकेट  में नस्लभेद का मुद्दा गांधीवादी तरीके से ही सुलझ सकता है अन्यथा यह मुद्दा शीघ्र ही विकराल रूप  ले लेगा।


Manish Joshi, Bikaner




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