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| RSS | Tuesday, February 14, 2012 |
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जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अतः जल जीवन की वह ईकाई है जिसमं जीवन छीपा है। वर्तमान में इस जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जल की कमी ने मानव जाति के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। जल के लिए दुनिया के कईं राष्ट्रों में हालात विकट... हाल ही में राहुल गाधी ने उत्तरप्रदेष की एक चुनावी सभा में प्रष्न खड़ा किया है कि यूपी के युवा कब तक महाराष्ट्र जाकर भीख मांगते रहेंगे। चुनावी सियासत में इस प्रष्न पर भारी बवाल मचा हुआ है। कोई यह यूपी का अपमान बता रहा है तो कोई इसे युवाओं का अपमान कह रहा है परन्तु वास्तव में अगर गौर किया जाए तो वर्तमाान समय में यह एक बड़ी समस्या है कि इस देष का युवा बेराजगार है और वह रोजगार की तलाष में यहा वहा दर दर की ठोकरें खा रहा है। हालात ऐसे पैदा...
अभी हाल ही में कुछ दिन पहले अण्णा हजारे ने अनशन किया और मान गए और अब बाबा रामदेव अनशन कर रहे हैं। ये सब अनशन और आंदोलन और धरना प्रदर्शन जो हमारे देश में होते हैं वे सिस्टम के खिलाफ होते हैं और सब लोग मिलकर सारा दोष सरकार व सरकार चलाने वाले नेताओं पर मढ देते हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार के प्रदर्शन कर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं। इन सब प्रदर्शनों को देखकर ऐसा लगता है कि...
हमारे समाज में और आस पास के माहौल में काफी दोहरे मह वाले लोग रहते हैं। लोग कहते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं। व्यक्ति के कहने और करने में बिल्कुल भिन्नता रहती है। यही प्रवृति आज समाज में सारी और दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ये समझ पाना मुश्किल हो गया है कि कौन कैसा है और पता नहीं कब किस रूप में सामने आ जाए। चारों... वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध का बिगुल क्या बजाया, सभी लोग अपना अपना समर्थन दे रहे है। ऐसा लग रहा है ऊपर से लेकर नीचे तक सबने ठान ली है कि अब भ्रष्टाचार मुक्त होना ही है। सरकार भी हिल गई है, हजारे साहब की बाते मानने की ओर है लगता है जैसे बस आजकल मे ही भ्रष्टाचार एकदम से समाप्त हो जायेगा। सोच कर ही मन मे सुकुन आ रहा है कि...
एक समय था जब लोग समूह में और परिवार में रहना पसंद करते थे। जिसका जितना बडा परिवार होता वो उतना ही सम्पन्न और सौभाग्यशाली माना जाता था और जिस परिवार में मेल मिलाप होता था और सम्पन्नता होती थी उसके पूरे क्षेत्र में प्रतिष्ठा रहती थी। यह ऐसा समय था जब समाज में परिवारों का बोलबाला था और समाज में सम्पन्नता की निशानी परिवार की प्रतिष्ठा से लगाई जाती थी। उस दौर में व्यक्ति की प्रधानता नहीं थी...
भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 के अन्तर्गत बजट पेश किया जाता है। इसके अनुसार शासकीय आय व्यय का लेखा जोखा सरकार संसद के पटल पर प्रस्तुत करे।
भारत में बजट पद्धति की शुरूआत करने का श्रेय ब्रिटीश भारत के पहले वायसराय लार्ड केनिंग को जाता है जो 1856 से 1862 तक भारत के वायसराय रहे।
भारत का पहला बजट जेम्स विल्सन ने वायसराय...
वर्तमान में भारत का जो राजनैतिक दृश्य है उसे देखकर यह लगता है कि हमारे देश में एक केन्द्रीय नेतृत्व का अभाव है। एक ऐसा नेता जिसकी राष्ट्रव्यापी क्षवि हो और जिसे छ लाख गाँवों में भी वैसी ही पहचान मिली हो जैसी इस देश के गुने चुने महानगरों में। एक ऐसा नेतृत्व जिसकी आवाज आम आवाम के दिलो दिमाग पर असर करे और जिसका प्रभाव आमजन तक हो।
एक समय था जब इस देश में महात्मा गाँधी, पंडित... बीकानेर एक ऐसा शहर जहाँ परम्पराओं का निवास है, जहाँ के लोग अपनी संस्कृति और अपने रिवाजों के लिए जाने जाते हैं और उन्हीं रिवाजों और परम्पराओं में से एक है बीकानेर में रहने वाले पुष्करणा समाज के लोगों का सामूहिक विवाहोत्सव - सावा। जी हाँ, सावा परम्परा!
सावा जिसमें पुष्करणा समाज की सैकडों शादियाँ एक ही दिन सम्पन्न होती है। इस परम्परा के अंतर्गत के समाज के लोग एक दिन निश्चित कर अपने बेटे बेटियों की शादियाँ उसी दिन सम्पन्न कर देते हैं।... वेलेन्टाइन विशेष
वेलेन्टाइन डे मना, था मैं भी तैयार।
चला प्यार की ओट में, करने नया शिकार।।
देख इक सुन्दर लडकी।
भावना मेरी भडकी।।
मैंने लडकी से कहा, देकरके इक फूल।
आजा मेरी माधुरी, मैं तेरा मकबूल।।
मेरे सपनों की रानी।
बनाएँ प्रेम कहानी।।
नाना जी उसने कहा, खूब पडेगी मार।
लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में जनता द्वारा शासन को सुचारू चलाने के लिए एक तंत्र का निर्माण किया जाता है और आमजन अपने इस तंत्र से उम्मीद करता है कि वह आमजन की परेशानी को समझे और उसको दूर करने के उपाय करे। लेकिन जब राज चलाने वाला यही तंत्र राज काज में विफल हो रहा हो तो आमजन किसकी तरफ देखे और फिर किससे उम्मीद करे। वर्तमान में जो हालात है उस पर गौर करें...
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। विश्व के सबसे बडे इस लोकतंत्र मे तंत्र का निर्माण लोक द्वारा किया जाता है और जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए शासन का निर्माण होता है। परन्तु वर्तमान में जो तस्वीर नजर आती है उससे ये लगता है कि लोक अपने तंत्र का निर्माण तो करता है परन्तु निर्माण के बाद यही लोक इस तंत्र में इतना उलझ जाता है कि अपने ही बनाए जनप्रतितिनिधियों से वो एक मुलाकात... कितने रावण मार दिए कितने अभी बाकी है कल विजयादशमी का त्यौंहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक, अमर्यादित शक्तियों पर मर्यादित शक्ति के प्रतीक इस त्यौंहार को हर साल बडे उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाता है। इस दिन रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतलों का दहन कर तालियाँ बजाई जाती है और अगले दिन भारत भर के समाचार पत्र रावण के मरने, रावण का दंभ खत्म होने जैसी खबरों को प्रमुखता से छापते हैं।अयोध्या में राममंदिर बनेगा या नहीं अथवा वहाँ मस्जिद बनेगी या नहीं यह एक ज्वलंत मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। भारत की हर पार्टी का नेता इस मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रहा है। किसी पार्टी को लगता है कि मंदिर बनने से उसका आधार मजबूत होगा तो किसी को लगता है कि मस्जिद बनने से उसकी आवाज बुलंद होगी तो कोई पार्टी जैसा है वैसा ही रहने देने में अपना फायदा देख रही है। मतलब ये कि मंदिर और... Some things never change like poor’s condition, whether it is democracy or republic but the condition of poor have never changed. Hear I mean to those thousand of people whose hard earned is rotten by government’s negligence. Where the poor in our country are forced to sleep empty stomach by rising prising day by day of food, there the valuable grain is rotting like a litter lying on the road. , rot of grain is the result of unnecessary hoarding of grain by government that will cost the country around Rs 17,000 crore... मनुष्य एक सामाजिक प्राणी ह। इस नाते वह भावानाओं के साथ जीता है और भावनाओं में ही खुद को अभिव्यक्ति करता है। जब से मनुष्य से समुदाय में रहना सीखा है तब से उसने रिश्तों को बनाना और निभाना भी सीखा है। कुछ रिश्ते मनुष्य के जंन्म के साथ ही उससे जुडे रहते हैं और कुछ रिश्ते मनुष्य खुद अपनी समझ से बनाता है या यूं कहे की बन जाते हैं। ऐसा ही एक रिश्ता है दोस्ती या मित्रता।
क्या है दोस्ती या कौन है... कहाँ गया वो बचपन, छिन गया वो बचपन
ये वो शब्द है जो आजकल गली मौहल्लों में सुनने को नहीं मिलते है। इन शब्दों के साथ बच्चों का बचपन निकलता था और बच्चे इस तरह के सैकडों शब्दों के साथ अपना बचपन भरूपर जीते थे। आजकल ये शब्द सुनने को नहीं मिलते हैं। हमने विकास के साथ क्या पाया और क्या खोया कि अगर गणना करें तो बच्चों के हिस्से से हमने उनका बचपन छीन लिया है और उनके बचपन... With increasing affluence and socioeconomic changes, India, like the rest of the world, is witnessing an obesity epidemic, especially in children and adolescents. According to one study, the percentage of overweight/obese children in Delhi has increased from 16% in 2002 to about 24% in 2006.
There is every reason to believe that this figure would have gone up further by now. In fact according to the latest study (mentioned below), obesity among both adolescent girls and boys in Delhi, has increased according to the measurement of parameters like BMI (body mass index), WC... The Central government on Friday took one more step forward in the Constitution amendment that would, if passed, bring in 33 per cent reservation for women in the Lok Sabha and the State Assemblies.
As usual it has been always a tough task for men to make a safe place for women in the each and every walk of life except home. Today it is the most wanted answer for men that “should women deserve to get reservation or not? This question is humming... World Sleep Day, 19 March
Sleep is a basic human need, much like eating and drinking. It is crucial for our overall health and well being. Research shows that we spend up to a third of our lives sleeping. Good quality and restorative sleep is essential for day-to-day functioning. Studies suggest that sleep quality, as well as quantity, impacts our life. On an average, a normal adult needs 7-8 hours of good sleep. In teenagers this may go up to 9 hours, while the elderly can do with 5-6 hours of it. World Sleep Day is on... Special on Womens Day - 8th March
In the 21st century almost all celebrate 8th March that is called “WOMEN’S DAY” on this day the whole world celebrates the economic, political and social achievements of women’s past, present and future. Really it is itself a women’s achievement. I am thank full to all them who donate at least one day to women ,because rest of the days are for men. That’s why there is no man’s day. Today in India it is celebrating where off course... सनातन काल से हम कलयुग में आ गए और इस लम्बी अवधि में हमारे लिए सन्तोष की बात यह है कि हमने हर युग में जगत जननी नारी को पूजनीय माना है और आज भी इस सत्य को हम स्वीकार करते हैं कि नारी बिना हम कुछ भी नहीं है। इसके बावजूद कटु सत्य यह भी है कि दुनिया की आधी आबादी समाज में अपना वह मुकाम हासिल नहीं कर पाई है जिसकी वे हकदार है। यह समाज के लिए चिन्तनीय है कि घर और अब बाहर भी सत्ता की कमान आधी आबादी के हाथ में... अभी हाल ही में जयराम रमेश तथा आर. के. पचौरी का विवाद अखबारों की सुर्खिया रहा है। आई.पी.सी.सी. की रिपोर्ट के अनुसार सन् 2035 तक हिमालयी ग्लेशियर पिघल जायगे परन्तु दूसरी अन्य रिपोर्ट के अनुसार आई.पी.सी.सी. की रिपोर्ट असत्य एवं तथ्यों से परे है। बाद में आई.पी.सी.सी. ने अपनी रिपोर्ट के बारे में कहा कि यह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है तथा इसके लिये उसने अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से क्षमा याचना भी की। उधर राज्य सभा में अरूण जेटली ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण एजेन्सियॉ ऑकडों में... Haiti, a small Caribbean country, had to experience the nature’s fury when on January 13; a strong earthquake with a magnitude of 7.3 rocked its capital Port au Prince. This earthquake is being termed as one of the deadliest natural disasters ever happened. The epicentre of this quake was just 25 kilometres away from the capital, Port au Prince with a focus at just 13 kilometres below the surface. Hitherto, the earthquake in 16th century China was termed as... Reducing greenhouse gases may not be enough to slow global warming A new research by a scientist at the Georgia Institute of Technology has determined that reducing greenhouse gases may not be enough to slow down global warming, and policymakers would need to address the influence of global deforestation and urbanization on climate change. The scientist in question is Georgia Tech City and Regional Planning Professor Brian Stone. According to Stone, as the international community meets in Copenhagen in December to develop a new framework for responding to climate change, policymakers need to give serious consideration to broadening the range of management strategies beyond greenhouse gas reductions alone. According to Stone's research, slowing the... |
भाजपा विधायक के नेतृत्व में कलेक्ट्रट पर प्रदर्शन प्यार पर रहा पहरा, प्रेमियो को बनाया मुर्गा विवाहिता ने लगाया देह शोषण का आरोप 55 पांडुलिपियो को 3 लाख 86 हजार की सहयोग राशि घोषित 35 हजार परिक्षार्थी व 11 परीक्षा केन्द्र बढे राजस्थानी फिल्मों को नही सरकारी सहारा - गांधीनगर निगम की हुई हंगामेदार बैठक युवक ने की खुदकुशी जर्जर सडक पर बैठक, चक्काजाम जाम का निर्णय लाभान्वित प्रसूताओ का होगा भौतिक सत्यापन शिक्षक संघ प्रगतिशील की बैठक आयोजित मदरसो का किया भौतिक सत्यपान मनरेगा में बने आरयूबी का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री कोष में भेजा धुलाई भत्ता माँ त्रिपुरा भाग्य से भी बढकर देती है- कल्ला |