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RSSFriday, May 24, 2013




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Being HUMAN, Being a WOMEN

My small little brain starts thinking from the heart, when the word "WOMEN" strikes my cerebrum. In ancient English women was addressed as "wifmon" which means [with man] as if, she had no identity of her own. Up to 1000 A.D there was no separate personal pronoun in English that referred to a women . She was addressed as "heo" from masculine "he" . Now in efflorescent world no doubt women are getting better opportunities to portray what they are and, have been capable of achieving. In fact they are doing much better than men in...

A good act does not wash out the bad, nor a bad act the good. Each should have its own reward

How well these words of George R.R. Martin exemplifies Sanjay Dutts life, the day Supreme Court awarded a five-year sentence to Sanjay Dutt in 1993 serial blasts case, Rumour mills got abuzz with the amount of money at stake on Bollywood projects involving him. According to trade analysts, around Rs 250 crore are riding on Sanjay Dutt. Many came in the support of the star that he has two small kids and hundreds of crores are at stake in Bollywood even leaders, Bollywood actors and justice Katju came out in strong support, Sanjay Dutt who is...

सांस्कृतिक उत्सव है होली

भारत त्यौहारों का भंडार है। हिन्दु -मुस्लिम, सिख-ईसाई सभी देशवासियों को अपना त्योहार मनाने की पूरी आजादी है। प्रत्येक त्यौहार हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है व सभी पर्व प्रेम-प्यार में अभिवृद्धि के घोतक माने जाते है। धुलण्डी से पूर्व फाल्गुन शुक्ल को होलाष्टक प्रारंभ होते हैं जो आठ दिन चलते है, पुराणों में होलिका के सबंध में बताया गया है कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप अंहकार और सत्ता के मद में तीनों लोक में स्वंय को...

उपभोक्ता रखे आंख कान नाक खुली

15 मार्च  विश्व उपभोक्ता दिवस पर विशेष वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति इस सांसारिक जीवन में जन्म से ही किसी न किसी प्रकार से किसी न किसी का उपभोक्ता है। इसलिये उपभोक्ताओं को सामान एवं वस्तु से संबधित आने वाली पेरशानियों से बचानें के लिए ही भारतीय संसद द्वारा  उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक 9 दिसम्बर 1986 को पारित किया गया। इस अधिनियम के लाभ भारत के जम्मू कश्मीर क्षेत्र को छोडकर प्रत्येक क्षेत्र के निवासियों को...

अफजल की फाँसी, छोड गई कुछ प्रश्न

हमारे देश की सरकार ने कल आतंक के पर्याय बने और देश की सम्प्रभुता संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरू को तिहाड जेल में फाँसी के फँदे पर लटका दिया। जैसा कि होता है कि इस घटना की पूरे राष्ट्र में प्रशंसा हो रही है और ऐसा ठीक भी है। हम इस देश के कानून व सर्वोच्च न्यायालय सहित राष्ट्रपति के निर्णय का सम्मान करते हैं और मेरा व्यक्तिगत तौर पर ऐसा मानना है कि राष्ट्र की सम्प्रभूता, एकता और अखण्डता से...

एक था 22111113

आज मेरे घर का टेलीफोन कनेक्शन हमने हटवा दिया। चार दिन के इंतजार के बाद भी जब टेलीफोन विभाग से कोई लाइनमैन नहीं आया तो अपने पडस में बन रहे मकान निर्माण कार्य में बाधा न हो इसलिए अपने हाथों से मैंने लाइन का तार हटा दिया। टेलिफोन कनेक्शन का यह तार हटाते वक्त मेरे मन में वो पहला दिन याद आ गया जब मेरे घर पर काफी माह के इंतजार के बाद यह लेण्डलाइन फोन लगा था। उस वक्त इसका नम्बर 5411113 हुआ करता...

Tribute to Braveheart

  As her violent demise stuns us into silence, and as we hang our head in shame, it also awakens our dead instincts into a quiet but determined uprising, demanding what should have been rightfully ours—a respectable place in society where the dignity of women is not violated day in and...

नया साल मुबारक

हे सखी ! नया साल प्रारम्भ हो गया है।  मेरा मन काँप रहा है, क्याेंकि नया साल शुरू हो गया है। लोग हैं कि नव वर्ष पर शुभकामनाएँ देते हुए थक नहीं रहे हैं। शुभकामना देने में अपने बाप का जाता भी क्या है? इस तर्ज पर भारतवासी एक-दूसरे को शुभकामनाएं दे रहे हैं। मैंने भी शुभकामनाओं के ढेर सारे रंग-बिरंगे कार्ड मेज पर सजा रखे हैं, ताकि आने वाला देख ले कि भाई लोग मुझे बधाई देने से चूक नहीं रहे हं। हे सखी ! बीता साल लेखा-जोखा करने को प्रेरित करता...

स्वराज में तो ऐसा नहीं होता

जनता का शासन जनता लिए कहने, सुनने, बोलने और पढ़ने को ही है। वास्तव में शासन राजनेता और अफसर कर रहे हैं और जनता की स्थिति गुलामों जैसी ही है, इससे भी बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि वास्तविक प्रजातंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य करने वाला दूर तक कोई नज़र भी नहीं आ रहा। संविधान में नागरिकों को दिए गये अधिकार और शक्तियां महत्वहीन हो गई हैं। वास्तव में शक्ति का दुरुपयोग कर...

एक सफल व सार्थक आयोजन: अंतर्राष्ट्रीय बाल आनन्द महोत्सव

22 नवम्बर से 28 नवम्बर तक बीकानेर के धरणीधर स्पोट्स काॅम्पलेक्स में राष्ट्रीय युवा योजना व आंतर भारती ट्रस्ट इंदौर के संयुक्त तत्वाधन में अंतर्राष्ट्रीय बाल आनन्द महोत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन बीकानेर के लिए एक शानदार व अपने आप में पहला आयोजन था। बीकानेर अपनी विविध संस्कृति व भाईचारे तथा साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए पूरे भारत में विशिष्ट पहचान रखता है तो इस लिहाज से बीकानेर नगर की संस्कृति व स्वभाव के अनुरूप यह आयोजन बीकानेर के लिए विशेष महत्व रखता है। इस आयोजन में उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, केरला, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, बंगाल...

एक जमाना टीवी का

दोस्तों आज आफ साथ कुछ पुरानी शानदार यादें बांटने का मन हो रहा है। मैं आज जब अपने दोस्त के घर गया तो उसके भतीजे ने टीवी के रिमोट से टीवी के विभिन्न कार्यक्रमों को देखने लगा। मेरे दोस्त ने कहा कि यार जब हम छोटे थे तो टीवी का क्या क्रेज था ओर दोस्तों यहीं से शुरू हुआ मेरे यादों का सिलसिला। वो भी क्या जमाना था जब घर में टीवी होना बडे गौरव की बात...

संस्कारों का ह्रास गिरता जीवन मूल्य

भारतीय सभ्यता और संस्कर्ति अपने संस्कारों के लिए पूरे विश्व में जानी जाती है। भारतीय संस्कारों का ही परिणाम था कि एक समय भारत विश्व गुरू की पदवी धारण किए हुए था। यहाँ में लेखक होने के नाते यह स्पष्ट कर देता ह कि मेरा यहाँ संस्कारों से तात्पर्य सनातन धर्म के 16 संस्कारों से नहीं है वरन् दैनिक आचरण व जीवनशैली से जुडे उन संस्कारों से है जिनके चारों ओर हमारा जीवन जुडा हुआ है। हमारे देश की संस्कर्ति बहुधर्मी है और यहाँ...

जल संकट के वर्तमान हालात और उपाय

जल ही जीवन है। जल जीवन का सार है। प्राणी कुछ समय के लिए भोजन के बिना तो रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अतः जल जीवन की वह ईकाई है जिसमं जीवन छीपा है। वर्तमान में इस जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जल की कमी ने मानव जाति के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। जल के लिए दुनिया के कईं राष्ट्रों में हालात विकट...

आपसी टकराहट के बीच रोजगार भीख तो नहीं !

हाल ही में राहुल गाधी ने उत्तरप्रदेष की एक चुनावी सभा में प्रष्न खड़ा किया है कि यूपी के युवा कब तक महाराष्ट्र जाकर भीख मांगते रहेंगे। चुनावी सियासत में इस प्रष्न पर भारी बवाल मचा हुआ है। कोई यह यूपी का अपमान बता रहा है तो कोई इसे युवाओं का अपमान कह रहा है परन्तु वास्तव में अगर गौर किया जाए तो वर्तमाान समय में यह एक बड़ी समस्या है कि इस देष का युवा बेराजगार है और वह रोजगार की तलाष में यहा वहा दर दर की ठोकरें खा रहा है। हालात ऐसे पैदा...

एक अनशन जनता के लिए

  अभी हाल ही में कुछ दिन पहले अण्णा हजारे ने अनशन किया और मान गए और अब बाबा रामदेव अनशन कर रहे हैं। ये सब अनशन और आंदोलन और धरना प्रदर्शन जो हमारे देश में होते हैं वे सिस्टम के खिलाफ होते हैं और सब लोग मिलकर सारा दोष सरकार व सरकार चलाने वाले नेताओं पर मढ देते हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार के प्रदर्शन कर अपना विरोध प्रदर्शित करते हैं। इन सब प्रदर्शनों को देखकर ऐसा लगता है कि...

हम जानते हैं पर मानते नहीं

हमारे समाज में और आस पास के माहौल में काफी दोहरे मह वाले लोग रहते हैं। लोग कहते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं। व्यक्ति के कहने और करने में बिल्कुल भिन्नता रहती है। यही प्रवृति आज समाज में सारी और दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ये समझ पाना मुश्किल हो गया है कि कौन कैसा है और पता नहीं कब किस रूप में सामने आ जाए। चारों...

सपना पूरा! भ्रष्टाचार हुआ खत्म!

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध का बिगुल क्या बजाया, सभी लोग अपना अपना समर्थन दे रहे है। ऐसा लग रहा है ऊपर से लेकर नीचे तक सबने ठान ली है कि अब भ्रष्टाचार मुक्त होना ही है। सरकार भी हिल गई है, हजारे साहब की बाते मानने की ओर है लगता है जैसे बस आजकल मे ही भ्रष्टाचार एकदम से समाप्त हो जायेगा। सोच कर ही मन मे सुकुन आ रहा है कि...

टूटते परिवार दरकते रिश्ते

एक समय था जब लोग समूह में और परिवार में रहना पसंद करते थे। जिसका जितना बडा परिवार होता वो उतना ही सम्पन्न और सौभाग्यशाली माना जाता था और जिस परिवार में मेल मिलाप होता था और सम्पन्नता होती थी उसके पूरे क्षेत्र में प्रतिष्ठा रहती थी। यह ऐसा समय था जब समाज में परिवारों का बोलबाला था और समाज में सम्पन्नता की निशानी परिवार की प्रतिष्ठा से लगाई जाती थी। उस दौर में व्यक्ति की प्रधानता नहीं थी...

बजट से जुडे कुछ रोचक तथ्य

भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 के अन्तर्गत बजट पेश किया जाता है। इसके अनुसार शासकीय आय व्यय का लेखा जोखा सरकार संसद के पटल पर प्रस्तुत करे।        भारत में बजट पद्धति की शुरूआत करने का श्रेय ब्रिटीश भारत के पहले वायसराय लार्ड केनिंग को जाता है जो 1856 से 1862 तक भारत के वायसराय रहे।  भारत का पहला बजट जेम्स विल्सन ने वायसराय परिषद में 18 फरवरी 1860 को...

वर्तमान हालत और नेतृत्व का अभाव

वर्तमान में भारत का जो राजनैतिक दृश्य है उसे देखकर यह लगता है कि हमारे देश में एक केन्द्रीय नेतृत्व का अभाव है। एक ऐसा नेता जिसकी राष्ट्रव्यापी क्षवि हो और जिसे छ लाख गाँवों में भी वैसी ही पहचान मिली हो जैसी इस देश के गुने चुने महानगरों में। एक ऐसा नेतृत्व जिसकी आवाज आम आवाम के दिलो दिमाग पर असर करे और जिसका प्रभाव आमजन तक हो।  एक समय था जब इस देश में महात्मा गाँधी, पंडित...

पुष्करणा सावा: एक दृष्टिकोण

बीकानेर एक ऐसा शहर जहाँ परम्पराओं का निवास है, जहाँ के लोग अपनी संस्कृति और अपने रिवाजों के लिए जाने जाते हैं और उन्हीं रिवाजों और परम्पराओं में से एक है बीकानेर में रहने वाले पुष्करणा समाज के लोगों का सामूहिक विवाहोत्सव - सावा। जी हाँ, सावा परम्परा!  सावा जिसमें पुष्करणा समाज की सैकडों शादियाँ एक ही दिन सम्पन्न होती है। इस परम्परा के अंतर्गत के समाज के लोग एक दिन निश्चित कर अपने बेटे बेटियों की शादियाँ उसी दिन सम्पन्न कर देते हैं।...

मृगतृष्णा है प्यार

वेलेन्टाइन विशेष   वेलेन्टाइन डे मना, था मैं भी तैयार। चला प्यार की ओट में, करने नया शिकार।। देख इक सुन्दर लडकी। भावना मेरी भडकी।।    मैंने लडकी से  कहा, देकरके इक फूल। आजा मेरी माधुरी, मैं तेरा मकबूल।। मेरे सपनों की रानी। बनाएँ प्रेम कहानी।।   नाना जी उसने कहा, खूब पडेगी मार।

यह क्या हो रहा है !

लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में जनता द्वारा शासन को सुचारू चलाने के लिए एक तंत्र का निर्माण किया जाता है और आमजन अपने इस तंत्र से उम्मीद करता है कि वह आमजन की परेशानी को समझे और उसको दूर करने के उपाय करे। लेकिन जब राज चलाने वाला यही तंत्र राज काज में विफल हो रहा हो तो आमजन किसकी तरफ देखे और फिर किससे उम्मीद करे। वर्तमान में जो हालात है उस पर गौर करें...

जनता से दूर जनता का राज

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। विश्व के सबसे बडे इस लोकतंत्र मे तंत्र का निर्माण लोक द्वारा किया जाता है और जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए शासन का निर्माण होता है। परन्तु वर्तमान में जो तस्वीर नजर आती है उससे ये लगता है कि लोक अपने तंत्र का निर्माण तो करता है परन्तु निर्माण के बाद यही लोक इस तंत्र में इतना उलझ जाता है कि अपने ही बनाए जनप्रतितिनिधियों से वो एक मुलाकात...

कितने रावण मार दिए कितने अभी बाकी है

कल विजयादशमी का त्यौंहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक, अमर्यादित शक्तियों पर मर्यादित शक्ति के प्रतीक इस त्यौंहार को हर साल बडे उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाता है। इस दिन रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतलों का दहन कर तालियाँ बजाई जाती है और अगले दिन भारत भर के समाचार पत्र रावण के मरने, रावण का दंभ खत्म होने जैसी खबरों को प्रमुखता से छापते हैं। 
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