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| RSS | 21 March 2010 |
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दक्षिण के महान् संत तिरूवल्लुवर क्रोध को जीत चुके थे और सभी के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करते थे। उन दिनों जब वे अपनी आजीविका चलाने के लिए कपडे की दुकान करते थे तो उद्द्ण्ड स्वभाव के एक युवक ने उन्हें परेशान करने की सोची और निश्चय किया कि वह उन्हें क्रोधित करके ही छोडेगा। एक दिन वह युवक तिरूवल्लुवर की दूकान पर गया ओर एक धोती अपने हाथ में लेकर पूछने लगा, इसका मूल्य क्या है? तिरूवल्लूवर ने कहा, पांच रूपए। उस युवक ने उसी क्षण धोती को फाडकर उसके दो टुकडे कर दिए और फिर पूछा, बताओं, इसका मुल्य क्या हैं? Discuss this article on KhabarExpress Forum Comments to this Article good story. |
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