बी जी बिस्सा
बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव अब अपनी रंगत पर आ गया है। चुनाव के पहले दौर मे कॉग्रेस प्रत्याशि डा बीडी कल्ला जहां सघन जनसम्प र्क के दौरान घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधा सम्प र्क साध रहे थे वहीं अब बदली हुई रंगत में वे मौहल्ला स्तर पर नुक्कड सभाएं आयोजित कर अपने लिए समर्थन जुटाते हुए दिखई दे रहे है। दुसरी ओर भारतीय जनता पाटीं के प्रत्याशी डा गोपाल कृष्ण जोशी मौहल्ला स्तर पर जनसम्फ कर मतदाताओं से रूबरू हो रहे है। आम मतदाताओं से सम्प र्क करने की दृष्टि से देखे तो डा कल्ला डा जोशी के मुकाबले काफी आगे बढे हुए है। कारण कि एक तो डा. जोशी को पार्टी का टिकट देरी से मिला और दुसरा उन्हे टिकट लिए दावेदार बने पार्टी नेताओं की राजी-नाराजगी से निपटने में भी वक्त जाया करना पडा।
रोचक मुकाबला
इस बार बीकानेर शहर पश्चिम क्षेत्र का चुनावी मुकाबला रोमांचकारी बन गया है। पुष्करण बाहुल्य इस क्षेत्र से दोनों राजनैतिक दलों के उम्मीदवार पारिवारिक और सामाजिक रिश्तेदारी मे गूंथे हुए है। 1980 में पहली बार डा कल्ला डा. जोशी के स्थान पर कॉग्रेस का टिकट लाकर विधायक बने है तब से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने तक डा.जोशी कॉग्रेस मे डा कल्ला के प्रतिद्वंन्दि नेता के रूप मे सदैव डिसीडेन्ट गतिविध संचालित करते रहे है। इस बार चुनाव मे लगभग ढाई दशक से अधिक समय के दो राजनैतिक प्रतिद्वन्दीयों को पहली बार आमने सामने ताल ठोकने का अवसर मिला हैं। इसलिए स्थानीय लोगों मे दोनो के मुकाबले को रोमांचकारी माना जा रहा है।
कद्दावर नेतृत्व
लगातार 6 बार जीतने और सात बार चुनाव लडने वाले डा.बीडी कल्ला बीकानेर कॉग्रेस के पहले नेता है जिन्होने इतनी लम्बी पारी तय की है। प्रदेश की कॉग्रेस राजनीति मे समय के साथ उभरने वाले डा कल्ला वर्तमान मे प्रदेश कॉग्रेस कॉग्रेस में कद्दावर नेतृत्व क्षमता वाले अग्रिम पंक्ति के नेताओं मे प्रमुख माने जाते है। उनका सदाबहार व्यक्तित्व मिलनसारिता और सहज उपलब्धता एवं कार्यकर्ताओं व आम नागरिकों से लगाव उन्हे सदैव सीढी दर सीढी आगे बढाने मे सहायक रहा है। यही कारण रहा है कि डा बी डी कल्ला पहाडिया, जोशी, माथुर और गहलोत की सरकारों मे सदैव सम्मिलित रहे है। प्रदेश कॉग्रेस अध्यक्ष और राज्य विधान सभा मे प्रतिपक्ष नेता और कॉग्रेस सरकारों में काबीना मंत्री के रूप मे उनकी जो भूमिका रही है उससे स्वयं डा कल्ला का राजनैतिक वर्चस्व बढा है वहीं बीकानेर का आम मतदाता राज्य स्तर पर उनकी नेतृत्व क्षमता को देखकर अपने आप को गौरान्वित महसूस करता है। यही सबसे बडी वजह है कि जो डा कल्ला के नाम के साथ आम मतदाता को बांधते दिखाई देती है। बीकानेर मे जन-चर्चाओं मे यह सुनने को मिलता है कि वोट कल्ला की शक्ल को नही नाम को देंगे। कारण की यह वह शख्शियत है कि जिसने लोकनायक जयनारायण व्यास के बाद राजस्थान की राजनीति मे पुष्करणा समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए बीकानेर के मतदाताओं का गौरव बढाया है।
परिसीमन का लाभ
यद्यपि इस आम चुनाव से पूर्व बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का भी परिसीमन किया जा चुका है। बावजूद इसके इसके डा कल्ला इस क्षेत्र मे जुडे नए इलाके यथा गंगाशहर, भीनासर, श्रीरामसर, सुजानदेसर, करमीसर, मुक्ताप्रसाद नगर, सर्वोदय बस्ती, बंगलानगर आदि क्षेत्रों में सघन जनसम्फ के बाद प्रबल जनसमर्थन जुटाने में कामयाब होते दिखाई दे रहे हैं बल्कि डॉ कल्ला के समर्थन में चार निर्दलीय प्रत्याशियों गुलाम मुस्तफा, सत्यनारायण, अब्दुल गफफार, मनव्वर अली, अशोक हर्षवाल अपने नामांकन वापिस ले चुके हैं। इन नए ईलाकों के मतदाताओं में सर्वाधिक पढे लिखे मतदाताओं का मानना है कि परिसीमन से हमें नारकीय जीवन से मुक्ति मिली है और डॉ कल्ला जैसे सफल नेतृत्व के साथ जुडने का अवसर मिला है जो इलाके के विकास एवं लोगों के लिए हितकर होगा।
अल्पसंख्यकों का व्यापक समर्थन
अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से डॉ कल्ला को इस बार व्यापक समर्थन मिल रहा है यद्यपि डॉ जोशी गैर संघी होलने के नाते अल्पसंख्यकों के समुदासय को जोडने हेतु प्रयासरत है। नगर निगम के महापौर ंव उपमहापौर क्रमशः मकसूद अहमद एंव मोहम्मद हारून राठौड प्रदेश क्रागेस के प्रदेश सचिव ताज खॉ, डॉक्टर जोशी के निकटतम रहे एंव शहर क्रागेस के पूर्व अध्यक्ष नूर मोहम्मद गौरी जैसे अनेक नेता क्रागेस के पक्ष मे जुटे हुए है।
डॉक्टर बी. डी कल्ला जहॉ अपने 23 वर्षो के कार्यकाल के दौरान बीकानेर मे करवाये गए विकास कार्यो एंव उपलब्धियो के नाम पर जन समर्थन मांग रहे है वही डॉ जोशी वसुन्धरा सरकार द्वारा किये गए कार्यो के आधार पर मतदाताओ के बीच खडे है। डॉक्टर कल्ला मानते है कि उनके 23 वर्षो का कार्यकाल उत्कृष्ट कोटि का रहा है। विधानसभाओ की बैठको मे उनकी सकि्रय भागीदारी और जनहित के मुद्दे उठाने मे सदैव सकि्रयता रही है।
कल्ला का आरोप
डॉक्टर बी.डी कल्ला का कहना है कि गहलोत सरकार के समय नगरीय विकास मंत्री के रूप मे बीकानेर की नगरीय समस्याओ के निराकरण के लिये 182 करोड रूपये की राशि मंजूर दी थी। इसमे सूरसागर समस्या को हल करने हेतू 1441 लाख रूपये की स्वीकति के साथ तत्कालीन राज्यपाल आशुमान सिंह जी के कर कमलो से शिलान्यास करवाया था किन्तु वर्ष 2003 मे भाजपा सरकार बनने के बाद इस कार्य की कोई सुधबुध नही ली गई। चुनाव की निकटता और भाजपा की बीकानेर मे कमजोरी का अदांजा लगने के बाद वसुन्धरा सरकार ने बीकानेर पर ध्यान देकर ए.डी.बी के तहत स्वीकृति परियोजनाओ को कि्रयाशील कर विकास की वाह वाही लूटने की कोशिश की है और जनता सब जानती है चुनाव के मुद्दे पर जनता हमारा साथ देगी।
मिलेगी सौगात
बीकानेर का चुनाव परिदृश्य रंगत भरा किन्तु अपने में खामोशी समेटे हुए है भाजपा जहां अपने परम्परागत वोट के साथ पुष्करणा समाज के विभाजन को आधार मान रही है वहीं बी डी कल्ला विचार धारा के अलावा समग्र समाज में अपने नाम और काम से बनी पहचान को ही जीत का आधार मान रहें है। चुनावी ऊंट किस करवट बैठे यह तो अभी कहना समय से पूर्व होगा। किन्तु डा कल्ला को सघन जनसम्फ के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से मिले आम आवास के रूझान को देखे और सच्चाई के साथ कहे तो कहना होगा कि डा कल्ला के कद्दावर नेत्त्व को बीकानेर के मतदाताओं की सौगात मिलेगी। |