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पद्मभूषण प्रो विजयशंकर जी व्यास

02 Oct 2006      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

पिछले सदी का पाँचवा दशक(1950-60) देश मे विकास के दौड की शुऊआत थी। आजादी के बाद देश मे योजनाबंध विकास का माहौल बना था।
इस नये वातावरण मे सरकार के साथ अन्य संगठन ने तथा भिन्न विचारधारा के चिन्तको ने भी अपना योगदान प्रारंभ कर दिया था। सरकार से भिन्न सरकार के सहयोग से विकास के कार्य को आगे बढाने वालो मे गांधी विचार से जुडे व्यक्तियो एव संस्थाओ की प्रमुख भूमिका थी।

यदि नाम गिनाना चाहे तो आचार्य विनोबा भावे एव श्री जयप्रकाश नारायण का नाम सबसे ऊपर है। इनसे जुडे रचनात्मक सस्थाओ की भूमिका भी उल्लेखनीय है। उसी दशक मे आचार्य विनोबा ने भूदान-ग्रामदान आन्दोलन चलाया और इसका प्रकाश पूरे देश मे फैला। योजनाबध विकास मे विचार की भूमिका प्रभावी थी क्योकि उन दिनो विचार आधारित विकास की शुऊआत हो चुकी थी। समाजवाद एव गाधी विचार की धारा को नयी दिशा देने का कार्य श्री जयप्रकाश नारायण ने किया और उन्होने योजनाबध विकास की दिशा मे विश्व भर मे किये जा रहे प्रयोग एवं प्रयासो के ज्ञान का लाभ लेने की प्रकिया प्रारम्भ की। गांधी विचार से जुडे सामाजिक कार्यकर्ताओ, अर्थशास्त्रीयों के दलों का गठन कर विश्व में हो रहे प्रयोगो के जानकारी प्राप्त करने की योजना बनी।वर्ष १९५९-६० में जयप्रकाश नारायण की पहल पर क्रर्षे के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयोगो को देखने-समझने के लिये अध्ययन दल जापान,युगोस्लाविया,इजराईल आदि देशो में भेजने का निर्णय लिया गया।प्रो विजयशंकर व्यास उन दिनो मुंबयी में पी एच डी का अध्ययन पूरा कर अध्यापन कार्य में लगे थे।उनकी रूचि समाजवादी विचारधारा एवं उसकी गतिविधियों में थी इस नाते उस समय के विचारको से संपर्क स्वाभाविक था। राजस्थान के होने के कारण यहां के वरिष्ट गांधी विचारक श्री सिधराज ढडढा ने इन्हे उपरोक्त देशो के अध्ययन दल में शामिल होने का प्रस्ताव रखा जिसे श्री जयप्रकाश नारायण ने स्वीकार किया।अध्ययन दल मे उस समय के वरिष्ठ लोगो में श्री आर के पाटिल, श्री आलू दस्तूर, सुश्री विमला ठकार, श्री चर्तुभुज रेसानी शामिल थे। प्रो व्यास का देश के बाहर के प्रयोगो को देखने-समझने का यह् पहला अवसर था। प्रो विजयशंकर व्यास का जन्म २१ अगस्त १९३१ को बीकानेर में हुआ। प्राथमिक एवं स्नातक की शिक्षा बीकानेर में प्राप्र्त की।उच्च शिक्षा के लिए मुंबयी गये जहां अर्थशास्त्र में एम ए तथा बाद में पी एच डी की उपाधि प्राप्त् की।  अद्यययन् का मुख्य विषय कृषि अर्थशास्त्र था।  उच्च अध्ययन के बाद  मुम्बईं अध्यापन कार्य प्रारम्भ किया। प्रो. व्यास द्वारा ग्रामीण विषयों के व्यापक अध्ययन की परियोजनाओ उस समय प्रारम्भ की गयी जब उन्होंने सरदार बल्लभाई पटेल विश्वविधालय, बल्लभ विधानगर के अर्थशास्त्र विभाग मे प्रोफेसर का कार्य भार संभाला। बल्लभ विधानगर में "एग्रोइकनामिक रिसर्च सेंटर" गुजरात, राजस्थान की स्थापना हुई जिसके प्रमुख प्रो. व्यास को बनाया गया। एग्रोइकनामिक रिसर्च सेंटर के अन्तर्गत राजस्थान एव्ं गुजरात के ग्रामीण विकास एवं गांव की समस्याओ के विभिन्न मुददो पर् अनेको अध्ययन किये गये। इन अध्ययन् का महत्व राज्य एवं राष्टीय स्तर पर् स्वीकार किया गया। एग्रोइकनामिक रिसर्च सेंटर के कार्य के दौरान् गांव् की समस्याओ की गहराई में जाने का अवसर मिला और् इस  विषय में तग्यता प्राप्त की। परिणाम स्व्ररुप प्रो. व्यास को इस विषय में  राष्टीय स्तर पर स्वीक्ति मिली। मुझे वर्ष १९६८-६९ मे  बल्लभ विधानगर में चर्चा का अवसर मिला। कुमारप्पा ग्रामस्वराज्य संस्थान की स्थापना के बाद भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद I.C.S.S.R. के सहयोग से ली गयी अध्ययन परियोजनाओ में प्रो. व्यास एवं बल्लभ विधानगर  के अध्येताओं पूरा सहयोग मिला। बाद में प्रो. व्यास भारतीय प्रबन्ध संस्थान्, अहमदाबाद I.I.M.-A से जुडे गये तथा अध्यापन एवं वर्षो तक निदेशक की जिम्मेदारी निभाई। यहाँ कार्य करते हुए कृषि अर्थशास्त्र के अध्ययन एवं अध्यापन के उनके योगदान को अन्तरराष्टीय स्तर पर मान्यता मिली। भारतीय प्रबन्ध संस्थान् में उनके कार्यकाल में वहाँ जाने क अवसर मिला और् यह् उल्लेख करते खुशी होती है कि प्रबन्धन शिक्षा में कृषि एवं ग्रामीण विषय को शामिल करने में इनकी प्रमुख भूमिका है। यही कारण हे कि भारतीय प्रबन्ध संस्थान्,I.I.M.-A में कृषि ग्रामीण विषय विकास संबंधी विषयों का विस्तार् हुआ है। भारतीय प्रबन्ध संस्थान् के उपरांत उनकी अन्तरराष्टीय स्तर पर ली जाने लगी। वर्षो तक प्रो. व्यास ने विश्व बेंक् में कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठ सलाहकार के रुप में सेवायें दी। इस दौरान उन्हें विश्व के अनेक देशो की ग्रामीण व्यवस्था एवं कृषि की सिथति को समझने का अनुभव मिला और् इस अवसर क उपयोग उन्होंने सलाहकार के रुप मे किया।विश्व के ग्रामीण परिवेश को देखते हुए अफ्रीकी देशो की दयनीय सिथति सर्वविदित है, इन देशो के अध्ययन उसपर् आधारित विकास योजनाओ के निर्माण में इन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।इसी प्रकार चीन जेसे देश में हुए ग्रामीण विकास का अध्ययन-विश्लेषण में इनके योगदान को सराहा एवं स्वीकार किया गया। विश्व स्तर पर इनके योगदान कि स्विकर्ती को आगे बढाते डा. अवध प्रसाद
विनोबा ज्ञान मंन्दिर     
बी-190 युनिवर्सिटी मार्ग
बापु नगर, जयपुर्- 3002015
 

हुए अनेक अन्र्तराष्टीय  सन्स्थाओ मै इनकी सह्भागिता बढी जिन सन्स्थाओ से प्रो व्यास का जुडाव रहा उनमै मुख्य है, एशिया विकास बैक (मनीला) के दुसरे कृषि सर्वे दल के प्रमुख, अन् र्तराष्टीय खाद्यय नीति शोध संस्थान आदि अनेक संस्थान हे। राष्टीय स्तर पर कृषि एवं ग्रामीण विकास की संस्थाओं में उनका योगदान  उल्लेखनीय है। इस द्र्ष्टि से रिजर्व बैंक द्वारा गठित नाबार्ड के लिए ग्रामिण साख की राष्टीय कमेटी के प्रमुख रहे। आज भी रिजर्व बैंक के राष्टीय बोर्ड में सदस्य हैं। राजस्थान  एवं गुजरात में तो अनेक समितियों एवं सस्थाओं के प्रमुख एवं सदस्य के रुप में मार्गदर्शन प्रो। व्यास का राजस्थान में आने की भी एक संयोग है । राजस्थान में आने के अनेक अवसर इन्होंने छोडे । मुझे ऐसा लगता है  कि इन्हे गुजरत से कुछ ज्यादा ही लगाव था- आज भी है ही। जयपुर में विकास अध्यन संस्थान की स्थापना हुई ओर इसका प्रारंभिक्  कार्यालय बापू नगर मे था । विकास अध्ययन संस्थान के संस्थापक प्रो एस पी वर्मा सरल स्वभाव के विद्वान थे। उनसे अनेक बार मिलना होता था, बे स्वंय विनोबा ज्ञान मन्दिर मे आ जाते थे ।  जवाहर नगर अपने निवास पर भी मुझे बुला लेते थे। प्रो। व्यास जयपुर कैसे आयें इसका जिक्र उन्होंने कई बार किया । तय हुआ कि "उनके जयपुर आने पर मुझे बुला लेना ।" प्रो व्यास के  जयपुर आने पर प्रो एस पी वर्मा ने कुमारप्पा संस्थान कार्यालय मे आकर उनसे लम्बी चर्चा की ।
बाद मे परिणाम सामने आया और उन्होने विकास अध्ययन संस्थान का काम सम्भाला ।  उनके कार्यकाल मे संस्थान का जो विकास हुआ यह सर्व विदित है।  प्रो व्यास का राजस्थान के विकास कार्य मे  महत्वपूर्ण योगदान है ।  क्रषि, पशुपालन एवं जल संसाधनो के विकास मे उनका चिंतन स्पषट एवं व्यावहारिकता से जुडा हुआ है ।वर्तमान स्थिति को स्वीकार करते हुए सीधा एवं सरल सुझाव देना उनका स्वभाव है । मुझे साफ तोर पर दिखता है की प्रो व्यास सीखने- समझने  के लिए  तत्पर रहते है ।सार्वजनिक सेवा संस्थाओं से उनका जुडाव उल्लेखनीय है ।
चि. अजित के आकस्मिक निधन के बाद  अजित फाउण्डेशन की स्थापना और  उसके माध्यम से बीकानेर से गहरा लगाव होना उल्लेखनीय है।अजित फाउण्डेशन  द्वारा बीकानेर में किये जा रहे कार्यों का प्रभाव देखा जा सकता है। शिक्षा, संस्कृति,आपसी विचार विमर्श तथा मरु संस्कृति को प्रस्तुत करने में अजित फाउण्डेशन कि पहचान बन गई।

वे अपने ७५ वर्ष की जीवन यात्रा में जो कुछ सीखा-समझा उसे उदारता पुर्वक दुसरों को देने के लिए हमेशा तत्पर हैं। उनका ज्ञान, उनकी सहलाह लोक हित में सामान्य जन के लिए कैसे हितकारीहो, कल्याणकारी  हो यही उनके चिंन्तन एवं कार्य की दिशा है।अर्थशास्त्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने पिछले वर्ष 2005 पद्म्भुषण से सम्मानित  किया। राजस्थान में ग्रामीण अर्थशास्त्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म्भुषण का सम्मान प्राप्त करने वाले एकमात्र अर्थशास्त्री है।

 डा. अवध प्रसाद
विनोबा ज्ञान मंन्दिर     
बी-190 युनिवर्सिटी मार्ग
बापु नगर, जयपुर्- 3002015




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