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सम्पादकीय

01 Oct 2006      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

Dr Braj Ratan joshiप्रकृति के पालने मे पलते परिवर्तनों की  धारा का नाम ही जीवन है केवल एक  जैविक घटना ही नही है वरन् जगत के कारण कार्य श्रंखला की लम्बी कहानी भी है। जीवन का विस्तार  उससे जुडे विविध पक्षो वं समय की मांग के अनुसार होता जा रहा है|
 
हम एक ऐसे समय में जी रहे है जो इतिहास में अपने तीव्रतम परिवर्तनों के कारण विशेष महत्व रखता है| एक अनुमान के अनुसार हर चार वर्ष मे ज्ञान दो गुणा होने की गति से बढता जा रहा है| कम्प्यूटर व इससे जुडे क्षेत्रों में तो यह समय अवधि और भी कम है| भाषाशास्त्रयों के एक समूह की राय है। कि भाषा ने पिछले पचास वर्षों अपनी उर्जा प्रोग्रामिंग एवं कम्प्यूटर से जुडे विविध क्षेत्रों के विकास मे लगाई है। आज कम्प्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हो गया है| एक अनुमान के अनुसार आज धरती पर हर पच्चीसवॉ व्यक्ति किसी न किसी रूप में कम्प्यूटर से जुडा है| इंटरनेट ज्ञान के अथाह समुद्र के रूप में सामने आ रहा है| सूचनाओं का सैलाब ज्ञान विधि  का स्थाई अक्षय कोक्ष बनता जा रहा है|
यह होने का नही, लगने का समय है यह करने का नही कहने का समय, है । यह सुनने का नही बोलने का समय है । ऐसे विकट समय में जब हर चीज एक् उत्पाद बनती जा रही है । मूल्यों, विश्वास और भावनाओं का अंत अत्यन्त ही निकट जान पडता हैं तब हम एक छोटे से शहर जिसे वैश्वीकरन की दीपावली में एक छोटा गाँव ही कहेंगे में इंटरनेट के माध्यम से हमारे समय के संगत असंगत पक्षो पर संवेदना की भाषा के माध्यम से अनुभव के उस उजले अक्ष को तलाश कर तराशने की कोशिश में है जिसमें मनुष्यता अपने संपूर्ण रूप में विद्ययमान हो।
हम जानते है कि यह् कठिन है । मंजिल के और छोर का पता नहीं है पर इतना अवश्य ही मालूम है कि हमें अपने नगर अपने परिवेश्, अपने राष्टª की छवि को अपनी कलम, अपनी संवेदना से एक नया जीवन् एक् नया जीवन एक नया रूप देना है।पत्रकारिता के क्षेत्र में पेशे की नैतिकता को ध्यान रखते हुऐ स्वस्थ और मन को छु जाने वाले शब्द संसार की सृष्टि हमारा लक्ष्य है। हम हमारे ही नही वरन पाठक समाज के उन सपनों को साकार करने की कोशिश करेंगे जो सच्चाई के रूप में सामने हो सकें।
नगर की वैशिवक छवि बने, नगर विकास की रूपरेखा प्रवासियो को देते रहे साथ ही हमारी लोक परम्परा एंव संस्कृति के समस्त अवयव हमारे अपने व प्रवासी भी प्राप्त कर सकें ऐसी  हमारी कोशिश रहेगी।
आज मीडिया के महासागर में हमारी उपस्थिति बस उपस्थिति भर ही है पर हम इस सच से भी वाकिफ है कि अगर व्यक्ति का छोटा प्रयास सही दिशा और दशा में तो उसकी स्थिती और गति स्वयं ही महासागरों के संसार किसी प्रमुख सागर से कम नही होगी।


सहयोग की आशा और विश्वास के साथ शुभकांमना के साथ,
डॉः ब्रजरतन जोशी

 



Comments to this Article
well since a long time ur articles has been read by me , and i find it prosperous to enrich our intelect ..this title really makes alive the slothful public ..well keep rockin, kunj bihari joshi (2007-07-03 03:07:40)
u shoud start a blog where people of bikaner can discuss there suggestions for developement of our city n can share problems of public interest which can be presented to NAGAR PRASHAASAN i.e. UIT N MUNICIPALITY N COLLECTOR...., Dr.vinay (2007-07-20 11:29:11)

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