Tuesday 14 Feb 2012 Sign In   New Member: Sign Up  RSS


Home > Article >> Sports
कैरेबियन क्रिकेट के दर्द का महाकाव्य‘‘

09 Jun 2007      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

ब्रायन चार्ल्स लारा का बेमिसाल कैरियर

मनमोहन हर्ष

Cricketer Brain Laraविश्व कप क्रिकेट की चकाचौंध, सफलता का आरोहण करने वाले सितारों व टीमों की चर्चा के बीच आलमी क्रिकेट के एक ऐसे बेमिसाल खिलाडी की विदाई गुमनामी के अंधेरों में खोकर रह गई, जिसने अपने बेमिसाल कैरियर के दौरान खेल के मैदान पर समर्पण के साथ-साथ मुल्क व क्रिकेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का अद्वितीय मुजाहिरा किया ै। जी हाँ, कैरेबियन क्रिकेट के महानायक ब्रायन चार्ल्स लारा का रूतबा कुछ ऐसा ही रहा है, जिसके समक्ष विश्व कप विजेता व व्यक्तिगत स्तर पर लोकप्रियता की हदें छूने वाले नामी क्रिकेटरों की आभा भी कई मायनों में फीकी नजर आती है। घरेलू मैदानों पर वेस्टइंडीज को विश्व विजेता का ताज दिलवाने में नाकामी का दंश झेलकर विश्व क्रिकेट से रूख्सत हुए दिव्य प्रतिभा के धनी लारा ने अपने १७ वर्षों से ज्यादा लम्बे कैरियर में अनेकानेक अवसरों पर बल्ले का ऐसा जलवा बिखेरा, जिसने क्रिकेट के मैदानों पर रोमांच व श्रेष्ठता के अध्याय रचे। आलमी क्रिकेट में लारा की समकालीन सितारों से तुलना करने पर हम देखते है कि जिस प्रकार की विषम विपरीत परिस्थितियों को झेलते हुए लारा ने अपने बल्ले से महासमर लडा, वैसी नाउम्मीदी से भरी घडया Star of Cricketउनके कई समकालीन खिलाडयों को सौभाग्य नसीब नही हुई। ऐसे में लारा के खाते में विश्व कप विजेता बनने की उपलब्धि भले ही दर्ज नही हो पाई हो बावजूद इसके उनका कैरियर महानता व समर्पण की अनोखी व अमिट छाप क्रिकेट के असंख्य चाहने वालों के दिलादिमाग पर छोड गया है, जिसका ओज क्रिकेट की आने वाली पीढयों को रोशन करता रहेगा।
ब्रायन लारा के कैरियर पर निगाह डाले तो हमें अनहोनी को होनी में तब्दील कर देने के सदृश कई महामानवीय प्रदर्शन देखने को मिलते है, जो कैरेबियन व विश्व क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। सेंट जोंस एंटीगा के मुकाम पर २००४ में टेस्ट क्रिकेट में निर्विवाद विश्व श्रेष्ठता की परिचायक ४०० रनों की नाबाद पारी खेलकर लारा ने ऐसा करनामा कर दिखाया था, जिसे छू पाना किसी भी क्रिकेटर के लिए नाको चने चबाने के बराबर होगा। ब्रायन लारा की यह पारी कैरेबियन क्रिकेट के डूबते सूरज के बीच, उसके लिए (कैरेबियन क्रिकेट) सदैव अपना सर्वस्व दाँव पर लगाकर कुछ नया कर गुजरने को प्रतिबद्ध एक सितारे द्वारा गहराते धुंधलको के बीच उम्मीदों को चिराग रोशन कर देने वाला करतब था। Get Cricket, Great Cricketerवक्त के उस मोड पर लारा व बीते जमाने के क्रिकेट बादशाह वेस्टइंडीज नियति के थपेडों को झेलते-झेलते सातवें आसमान से रसातल में धंसने का दंश झेल रहे थे। कहना न होगा कि लारा के कैरियर में नियति ने कमोबेश प्रत्येक मोड पर ऐसी ही अग्नि परीक्षाओं के अवरोध खडे किए, मगर अपनी हाई बैकलिफट व बल्ले से निर्मम प्रहारों की बाजीगरी से चुनौतियों को फतह करने में आनंद की अनुभूति करने वाले लारा ने व्यक्तिगत स्तर पर बारम्बार चौंकाने वाला प्रदर्शन कर कैरेबियन क्रिकेट की प्रतिष्ठा का परचम अकेले दम पर लहराया।
लारा के बल्ले से चार सौ रनों की वह कालजयी पारी उस समय निकली जब लाजवाब बल्लेबाजों व तूफान को भी अपनी रफतार से धता बता देने वाले तेज गेंदबाजों से विश्व क्रिकेट में चहओर अपनी कीर्ति पताका लहराने वाला वेस्टइंडीज उन टीमों के हाथों लाचार व बेबस सा पिटता चला जा रहा था, जिनको सहज ही धूल चटाना कभी कैरेबियन दिग्गजों के लिए बाएं हाथ का खेल हुआ करता था। विध्वंसक तेवरों के बल पर प्रतिद्वंद्वियों को मैदान पर चारों खानें चित्त करने की कैरेबियन परम्परा को जैसे कोई साँप सूंघ गया था। बद से बदतर होते हालात के बीच सदैव चुनौतियों का बीडा उठाकर एक संकटमोचक की तरह रणक्षेत्रा में प्रतिपक्षियों से लोहा लेकर कैरेबियन क्रिकेट की प्रतिष्ठा के क्षरण को थामने के लिए संघर्षरत रहे लारा ने अपनी उस विस्फोटक पारी से वेस्टइंडीज क्रिकेट में प्राणवायु का संचार करने का अद्वितीय प्रयास किया।
कैलिप्सो की धुन पर लाल सुरा की मस्ती के साथ दिल की गहराईयों तक क्रिकेट को चाहने वाले कैरेबियाई क्रिकेट प्रेमी विश्व क्रिकेट में दीवानगी की मिसाल माने जाते है। लेकिन असफलता के अनवरत दौर ने इन दीवानों का भी खेल से मोहभंग कर दिया। कभी रोहन कन्हाई, गैरी सोबर्स, क्लाईड वॉलकॉट, क्लाईव लॉयड, विवियन रिचर्डस, गॉर्डन ग्रीनिज, मैल्कम मार्शल व माईकल होल्डिंग सरीखे एक से एक महान खिलाडयों के पदचि*ों पर का अनुसरण करने की तमन्ना के साथ वहाँ के समुद्र तटों पर जुट जाया करने वाली युवाओं की भीड धीरे-धीरे छंटने लगी। और तो और युवा क्रिकेट को छोड कर बेसबॉल, बास्केटबाल व अन्य खेलों को तरजीह देने लगे। क्रिकेट को जुनून की तरह लेने व जीत के लिए जिद्दी इरादें रखने वाले लारा के लिए इससे अधिक सालने वाली बात और क्या हो सकती थी? ये यब परिस्थितियां उस समय उत्पन्न हुई जब वेस्टइंडीज की कमान व बागडोर ब्रायन लारा के हाथों में रही और न केवल कैरेबियन क्रिकेट बल्कि समूचे विश्व में उसके प्रशंसक लारा की ओर बडी उम्मीद के साथ देखते थे कि ये वामहस्त बल्लेबाज अपनी टीम का भाग्य पलटकर रख देगा! दिग्गजों की निवृति व तेज गेंदबाजों की कुंद होती धार के बीच लारा जैसे सितारे के कंधों पर कैरबियन क्रिकेट का भाग्य आ टिका। कप्तान के रूप में टेस्ट व एक रोजा मैचों में लारा ने कई बार अपनी टीम को बुरे वक्त से गुजरते हुए देखा। इस विश्व कप सहित गत दो विश्व कप मुकाबलों में वे अपने नेतृत्व में कोई करिश्मा नही दिखला पाए। व्यक्तिगत स्तर पर श्रेष्ठता को बारम्बार साबित करने के बावजूद नवोदित पीढी के गेल, गंगा, हिंडस, रिकार्डो पावेल, चंद्रपाल, सरवन, टीनो बेस्ट एडर्वड्स, सिलवेस्टर जोजेफ, डेवोन स्मिथ, सैमुअल्स व ब्रावो जैसे साथियों के प्रदर्शन में सततता व एकजुटता के अभाव में टीम के प्रदर्शन का पूरा दारोमदार लारा पर ही रहा। विरासत को सम्भालने व टीम के प्रदर्शन को पटरी पर लाने के चक्रव्यूह में लारा नैसर्गिक प्रतिभा के धनी होते हुए भी कई बार अपने बल्ले की धार खो बैठे। उन पर टीम को गर्त में धकेलने व Brian Lara, Its all about Cricketअग्रिम मोर्चे से नेतृत्व न कर पाने के आरोप भी मंढे जाते रहे। कैरेबियन क्रिकेट की मुफलिसी पर अपनी प्रतिभा का खजाना न्यौछावर करते रहने के बावजूद लारा के खाते में अपयश ही ज्यादा दर्ज किया जाता रहा। कई बार उनसे नेतृत्व छीनकर उन्हें बलि का बकरा बनाया गया, लेकिन हर बार कैरेबियन क्रिकेट की नैया को पार जगाने के लि लारा से बेहतर खेवनहार की तलाश अधूरी ही रही और कप्तान के रूप में लारा की वापसी होती रही।
लारा की अपने कैरियर के दौरान ये खुसूसियत रही की उन्होंने कई अवसरों पर अकेले दम पर ऐसा विस्मयकारी खेल दिखाया जिसने न केवल उनको क्रिकेट इतिहास में अमर कर दिया बल्कि साथी खिलाडयों की बेरूखी व असफलता के बावजूद उन्होंने टीम की जीत की इबारत लिख डाली। चार सौ रनों की उस ऐतिहासिक पारी के अलावा लारा ने जब १९९४ में सर्वप्रथम १९९४ में सोबर्स के ३६५ रनों के ३५ वर्ष पुराने कीर्तिमान को ३७५ रन बनाकर ध्वस्त किया तथा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी ५०१ रनों की नाबाद पारी खेलकर विश्व रिकॉर्ड बनाए तब भी उनके जेहन में अपने प्रदर्शन से कैरेबियाई क्रिकेट को प्रतिष्ठा के उस मुकाम पर पुनः ले जाने की तमन्ना हिलोरे मार रही थी। लारा के कैरियर के कुछ और यादगार लम्हों का प्रत्यास्मरण करे तो १९९८-९९ में बहैसियत कप्तान उन्होंने धरेलू मैदानों पर दो लगातार टेस्ट मैचों में २१३, ८, १५३ नाबाद व १०० रनों की बेमिसाल पारियां खेलते हुए वाल्श व एम्ब्रोस जैसे पुछल्ले बल्लेबाजों में जीवट भर ऑस्टेलिया से टेस्ट सीरीज बराबर करवाई थी। वर्ष २००१-२००२ में भारतीय उपमहाद्वीप के दौरे पर उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ भी बल्ले का खूब जौहर दिखाया। न केवल एक टेस्ट में २२१ व १३० रनों की पारिया उनके बल्ले से निकली बल्कि पूरी श्रृंखला में उन्होंने ६८८ रन बनाए जो वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों द्वारा पूरी श्रृंखला में बनाए गए रनों का ४२ प्रतिशत थे। लारा ने नवम्बर २००५ में एडीलेड टेस्ट में एलन बोर्डर के ११ हजार १७४ रनों के कीर्तिमान को पीछे छोडकर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इतना सब कुछ अर्जित करने के बावजूद इस विश्व कप से उनकी खामोश विदाई व वेस्टइंडीज की उनके नेतृत्व में एक और असफलता को लारा के साथ नियति के अन्याय की संज्ञा दी जा सकती है। उन जैसे प्रतिभावान सितारे की झोली किस्मत और साथी खिलाडयों के साथ से और समृद्ध हो सकती थी।

ब्रायन लारा के कैरियर व उनकी चंद अद्वितीय पारियों को साहित्यिकता के रंग में रंगने की गुस्ताखी माफ हो तो मुझे उनका कैरियर कैरेबियन कि्रकेट के दर्द का एक महाकाव्य व लारा उसके महानायक नजर आते है । गोया लारा बच्चन (डॉ. हरिवंशराय) हो गए हों और अपने बल्ले से मधुशाला की कुछ अमर पंक्तियों को कुछ इस अंदाज में क्रिकेट जगत के समक्ष कह गए हों - ‘‘ लाल सुरा की धार लपट सी, कह न इसे देना ज्वाला, फेनिल मदिरा है, इसको मत कहना उर का छाला, दर्द नशा है इस मदिरा का (मेरा कैरियर व इस दौरान The face of Cricketखेली गई विस्मय कारी पारियां कैरेबियन क्रिकेट के दर्द को भीतर तक महसूस करने की देन है । लारा के जेहन में यह दर्द इन पारियों के दौरान नशे की तरह मौजूद था), विगत स्मृतियां साकी हैं (विरासत को न संभाल पाने की पीडा व अतीत की अजेय यात्राा ने प्रेरित किया), पीडा में आनंद जिसे हो आए मेरी मधुशाला (जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर उसी में आनंद की बयार पैदाकर, उत्कर्ष की ओर बढने की राह खोज सकता है, वह आए और मेरे द्वारा प्राप्त किए गए चिर आनंद को आत्मसात करे) ।

 ब्रायन चार्ल्स लारा
जन्म - तिथिः २ मई १९६९, जन्म स्थान - कैन्टारो, सांताक्रूज (ट्रिनिडाड)
पहला टेस्टः-  विरूद्ध पाकिस्तान, लाहौर,  ६ से ११ दिसम्बर १९९०
अंतिम टेस्टः-  विरूद्ध पाकिस्तान, कराची, २७ नवम्बर से १ दिसम्बर २००६
पहला वनडेः- विरूद्ध पाकिस्तान, कराची, ९ नवम्बर २००६
अंतिम  वनडेः- विरूद्ध इंग्लैंड ब्रिजटाउन, २१ अप्रैल २००७

कैरियर पर एक नजरः-

 

मैच

पारी

रन

औसत

उच्च स्कोर

शतक

अर्द्धशतक

टेस्ट

131

232

11953

52.88

400 नाबाद

34

48

वन डे

299

289

10405

40.88

169

19

63

प्रथम श्रेणी

260

439

2193

51.38

501 नाबाद

64

87




 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 




Jewellery Accounting Software by Pelagian Softwares

Latest Articles
» 

» 

» 

» 

» 


Articles By Writers Most Read Articles
» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 

» 


Jain Calendar Launched at Terapanth Bhawan, Gangasahar
More Photo

India Yellow Pages - rajb2b.com

Insight : 
Home | Business | Entertainment | Celebrity | Sports | Education | Health | Sci-Tech | National | World | Article | Photo Gallery | Video Gallery | E-card | Forums | Camel Festival | Vartmaan Sahitya | Nagar Ek - Nazaare Anek
Company : 
About Us | Feedback | Advertise with us | Terms of use | Privacy Policy | Archives | Site Map | Can't See Hindi? | News Ticker | RSS
Our Network : 
RajB2B.com
UniqueIdea.net
PelagianDictionary.com
PelagianSoftwares.com
HindiNotes.com
Follow us on : 
         
Copyright @ 2010 Natraj Infosys All rights reserved