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मित्रता दिवस: एक दृष्टि

30 Jul 2010      Add comment     Mail     Print     Write to Editor      Other Articles By This Writer

Shyam N Rangaमनुष्य एक सामाजिक प्राणी ह। इस नाते वह भावानाओं के साथ जीता है और भावनाओं में ही खुद को अभिव्यक्ति करता है। जब से मनुष्य से समुदाय में रहना सीखा है तब से उसने रिश्तों को बनाना और निभाना भी सीखा है। कुछ रिश्ते मनुष्य के जंन्म के साथ ही उससे जुडे रहते हैं और कुछ रिश्ते मनुष्य खुद अपनी समझ से बनाता है या यूं कहे की बन जाते हैं। ऐसा ही एक रिश्ता है दोस्ती या मित्रता।

 

क्या है दोस्ती या कौन है मित्र यह कह पाना एक मुश्किल काम है परंतु वर्तमान में देखे तो हमारे बहुत से लोगों के पास दोस्तों की फौज होती है। कुछ दोस्त स्कूल के कुछ कॉलेज के कुछ मौहल्ले के कुछ इंटरनेट के और कुछ दोस्तों के दोस्त। मतलब एक ऐसा कुनबा जो लगातार बढाने की मंशा अधिकांश सामाजिक मनुष्यों की रहती है। इस मुश्किल काम को वर्तमान में बहुत आसान बना दिया गया है। आईये देखते हैं कि क्या है दोस्त और दोस्ती 

वास्तव में दोस्त किसी भी मनुष्य के खुद की पहचान का हिस्सा है। दोस्ती जन्म से बना रिश्ता नहीं होती है दोस्ती होती है या की जाती है। दोस्त वही बनता है जिसके साथ आफ विचार या आपकी राय मेल खाए। विपरीत विचारों वाले लोगों में दोस्ती नहीं हो सकती । हाँ यह जरूर है कि दोस्ती आर्थिक स्थिति या सामाजिक स्थिति देखकर होती है लेकिन इसका प्रतिशत बहुत कम है। ऐसी दोस्ती वास्तव में दोस्ती नहीं होकर किसी प्रलोभन में बनाया रिश्ता होती है जो बहुत कम उम्र की होती है। वास्तव में दोस्ती विचारों का मिलन है, भावनाओं का संगम है जहाँ पर आकर व्यक्ति स्वयं को प्राप्त करता है। जहाँ एक दोस्त दूसरे में अपने को देखता है वहीं पर दोस्ती की नींव पडती है।

सच्चा दोस्त वह है जो आफ जीवन के प्रत्येक आयाम को छूए और उसे प्रभावित करने की क्षमता रखें और प्रभाव भी ऐसा कि जिससे आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए। एक सच्चा दोस्त गरीब सुदामा को भक्त सुदामा बनाकर अमर कर देता है। एक सच्चा दोस्त कृष्ण बनकर अर्जुन को गीता का उपदेश देता है और धर्म और सत्य का मार्ग दिखाता है। एक सच्चा दोस्त ठुकराए हुए विभीषण को राजा विभीषण बना देता है। एक सच्चा दोस्त सुग्रीव बनकर भगवान राम को सीता से मिलवाता है और अपने सारे साधन इसके लिए झोंक देता है। मतलब यह है कि दोस्त एक ऐसा व्यक्ति है जो आफ जीवन के सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, नैतिक, चारित्रिक सहित सभी पहलुओं से आपको साथ लेता है और साथ देता है। दुनिया में ऐसे बहुत से उदाहरण है जहाँ दोस्ती ने जीवन की दशा और दिशा बदल दी।
 
वर्तमान में दोस्ती से तात्पर्य यह लगाया जाता है कि जो साथ रहे जिसके साथ आप अपने गर्ल फ्रेंड और बाँय फे्रंड की बातें शेयर कर सकें और जो आफ साथ फिल्म देखने चलें, पिकनिक मनाएं और जिसके साथ आप अपने दिन के समय में ढेर सारी बातें मोबाइल पर करें। क्या वास्तव में यह दोस्ती है क्या वास्तव में यह वे कार्य हैं जिनसे आप अपने जीवन की दिशा बदल पाएंगे।  क्या ऐसे दोस्त आफ जीवन को कोई आयाम दे पाएंगे। शायद नहीं। वास्तव में ये दोस्ती नहीं बस समय पूरा करने का एक साधन है।
 
दोस्ती में समर्पण होता है, दोस्ती पूर्णता की निशानी होती ह। दोस्ती में गिला होता है शिकवा होता है, रूठना होता है लेकिन दोस्ती में छोडने का भाव नहीं होता। कोई दोस्त अपने दोस्त से नाराज हो सकता है लेकिन उसे छोडकर जाने की नहीं सोचता। दोस्त एक दर्पण है जहाँ पर आप स्वयं को पाते हैं। दोस्त एक एक ऐसा व्यक्ति है जिसके साथ आफ अहं का टकराव नहीं होता है। दोस्त के साथ आपका भाव मैं से हम म बदल जाता है। वास्तव में दोस्ती समाज के उस वर्ग का नाम है जहाँ पर विचार और जीवन मिलकर नए रास्ते का निर्माण करते है।

पाश्चात्य सभ्यता ने इस दिवस को मित्रता दिवस के रूप में मनाने का प्रचलन किया है। शायद यह समय की मांग हो कि किसी दिन को जन्म दिन और मरण दिन और किसी त्यौंहार की तरह मनाया जाए लेकिन दोस्ती के मामले में ऐसा हो यह मेरी राय में जरूरी नहीं है। दोस्ती तो रोज पलती है रोज फलती फूलती है उसे एक दिन की क्या जरूरत है दोस्ती अनवरत है ओर इसी अनवरतता ने इसे स्थिर बनाया है। जरूरत मित्रता दिवस मनाने की नहीं बल्कि ऐसे मित्रों की है जो देश, काल, परिस्थिति के अनुसार समाज में आमूलचूल परिवर्तन लाए और ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ कृष्ण, सुदामा, राम, सुग्रीव, विभीषण जसे उदाहरण पैदा हो।  


Comments to this Article
Good artical in current time. I think yours openion is aggressive but ture in present time.
, mahesh saran (2010-08-01 11:42:35)
SIR APNE LIKHA BILKUL SAHI HAI LEKIN IS ME TYPING GALAT KE HUI HAI AP KI STHAN PAR AF LEKHA HAI , RAVI KUMAR VYAS (2010-07-31 23:03:39)
रंगाजी बिलकुल सही लिखा है। आलेख में अपना मुददा सशक्‍त रूप से उठाया है ।, मनीष कुमार जोशी (2010-07-30 20:58:57)
NICE ARTICLE RANGA G VASTAV ME AAJ SACHE DOSTO KI KAMI HAI OR YE ARTICLE EKDAM SATEEK HAI KEEP IT UP , PRAMOD SHARMA (2010-07-30 17:38:04)
nice..... thought on friendship, prem bissa (2010-07-30 17:40:35)
bahut hi achhha
dosti karo to easi dudh aur pani jaisi
, santosh vyas (2010-08-02 15:54:02)
nice article on friendship , viju (2010-08-28 12:25:04)
VERY GOOD , DOSTI KA SAHI MATLAB BATAYA HAI , DOSI KA AAINA DIKHAYA HAI, DOSTI HAI HI EK AISA RISHTA JO SABHI SE HATKAR HAI , NO THANKS & NO SORRY , , AMIT KATHURIA (2010-09-17 10:02:19)
Very nice ranga ji very nice !!!!!!!!!!, Subodh Saini (2010-11-16 02:35:57)
dosti pooja h aur dost farista h, sangeeta bamne (2010-11-20 01:10:27)
B, B (2010-11-30 02:24:40)
good essay.i liked it, payal (2011-02-20 08:02:10)

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