Home > Article >> Short Stories | गंधर्वसेन
| |
19 May 2008 Add comment Mail
Print Write
to Editor |
एक दिन नवाब के दरबार में वजीर जोर-जोर से रोता हुआ आया। नवाब ने उससे वजब पूछी। वजीर बोला, गंधर्वसेन मर गया, जहांपनाह! सुनकर नवाब भी रो पडा। आह, गंधर्वसेन मर गया! मरहूम के लिए इकतालीस दिन का मातम मनाने का फरमान जारी हुआ। नवाब हरम में गया तब भी उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेगमों ने रोने की वजह पूछी। नवाब ने रूंधे गले से बताया कि गंधर्वसेन मर गया। बेगमें छाती पीट-पीट मर मातम मनाने लगीं। पूरे जनाने में मातम का आलम था। बडी बेगम की नौकरानी को ये गुलगपाडा समझ में नहीं आया। उसने बडी बेगम से पूछा, मोहतरमा सब रो क्यों रहे है? बेगम ने कहा, बेचारा गंधर्वसेन मर गया। कौन गंधर्वसेन? क्या वह नवाब साहब का बहुत नजदीकी रिश्तेदार था? अरे, यह तो पता नहीं बेगम भागी-भागी नवाब के पास गई। उसनेनवाब से पूछा कि यह गंधर्वसेन कौन था। जिसकी मौत पर सब रो-रोकर मातम मना रहे है। नवाब भागा-भागा दरबार में गया और वजीर को पूछा, यह गंधर्वसेन कौन था, जिसकी मौत पर दुखी हो रहे है? वजीर ने कहा, माफ करें हुजूर, मैं भी नहीं जानता कि वह कौन था। मैंने कोतवाल को रोते देखा कि हाय, गंधर्वसेन मर गया, तो उसका साथ देने के लिए मैं भी रोने लगा। नवाब बरस-पडा, जाओ, पता करो कि गंधर्वसेन कौन था। वजीर तेजी से भागता हुआ कोतवाल के पास गया। उसने कोतवाल से पूछा कि गंधर्वसेन कौन था। कोतवाल ने बताया कि वह भी नहीं जानता कि गंधर्वसेन कौन था? उसने जमादार को रोते सुना कि गंधर्वसेन मर गया, तो वह भी रोने लगा। मैंने वजीर को सूचना दे दी। वजीर और कोतवाल दोनों ने जमादार को पकडा और कोतवाल दोनों ने जमादार को पकडा और उससे पूछा कि वह किसके लिए रो रहा था? जमादार ने जवाब दिया, हुजूर, मैं क्या जानूं कि वह कौन था! मैंने अपनी बीवी को गंधर्वसेन की मौत पर रोते देखा तो उसके दुख से मेरा दिल पसीज गया। किसी को हंसते या रोते देखकर हमें भी उसकी छूत लग जाती है और हम भी हंसने या रोने लगते है। मैं भी बीवी को रते देख रोने लगा। तीनों मिलकर जमादारनी के पास गए। वह भी गंधर्वसेन से अनजान थी। उसने तो तालाब पर कपडे धोने वाली को फूट-फूटकर रोते और कहते सुना कि उसका गंधर्वसेन मर गया।
अब चारों उसके घर गए और उससे पूछा कि वह सुबह क्यों रों रही थी और गंधर्वसेन उसका क्या लगता था? यह सुनकर कपडे धोने वाली फिर रो पडी, मेरा कलेजा फटा जा रहा है। गंधर्वसेन हमारा पालतू गधा था। उसे मैं बेटे से भी ज्यादा चाहती थी। कहते-कहते वह दहाड मारकर रोने लगी। चारों बहुत शर्मिदा हुए और तेजी से चले गए। वजीर महल में गया और नवाब के पैर पकडकर हकीकत बताई कि गंधर्वसेन पालतू गधा था। जब यह खबर हरम में पहुंची, तो नवाब और दरबारियों के काम काज के तरीके पर सभी खूब हंसे।
|
| |
|
|
 |
Latest Articles | |
»
»
»
»
»
| |
|
|
 |
Jain Calendar Launched at Terapanth Bhawan, Gangasahar | | More Photo |
|
|