www.khabarexpress.com : The news portal of North India
www.khabarexpress.com
Google
 
Education Special

Education Directory
Exam Results
Who is Who

Article
Tutorial
Information
Quote

Can't see Hindi ?
Welcome Guest Sign In  New user! Sign Up Now| My Favourites (new)
Search Photo  
RSS Feed
16 May 2008
Forum | Wallpapers | Photo Gallery | Business | Entertainment | Education | Sports | Article | City |
Free News on your website

25
Dec
घर का न घाट का 
Add comment     Mail     Print     Write to Editor

 

एक चरवाहा था, नन्दू। उसके पास बहुत सी बकरीयां थी। वह बडी सावधानी से उनकी देखभाल करता था।
एक बार उस इलाके में भयंकर अकाल पडा। पशुओं के लिए चारा मिलना दुर्लभ हो गया। आखिर चन्दू बकरियों के साथ चारें की खोज में गांव से निकल पडा।
चलते-चलते नन्दू एक घाटी में जा पहुंचा। वहां चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। नन्दू ने वही रहने का फैसला किया। वहां एक पुरानी झोपडी भी थी। नन्दू ने मरम्मत करके उसे अपने रहने लायक बना लिया। बकरियों के लिए भी उसने एक बाडा बना दिया।
एक-दो दिन बारिश हुई। घास-पात में खूब मच्छर हो गए। नन्दू ने एक उपाय सोचा,’लकडया एकत्रित करके जगह-जगह आग जला दी।‘ खूब धुंआ हुआ। धुंए से मच्छर भाग गए। अब तो वह रोज यही करने लगा। आसपास के गड्ढो को भी भर दिया। इस तरह धीरे-धीरे मच्छर खत्म हो गए। अब बकरिय को कोई तकलीफ न थी।
एक दिन नन्दू फल-फूल की तलाश में जंगल में गया। वहां  सुनहरी रंग के हिरण एक समूह में आने लगे। हिरणों को देखकर नन्दू के मन में लोभ आ गया। सोचने लगा-क्यों न इन्हें पकड कर राजा को उपहार में दिया जाए। ऐसे खूबसूरत हिरण पाकर राजा बहुत खुश होंगे। हो सकता है, मुझे बढया ंइनाम भी मिल जाए। राजा धन देंगे, तो मेरी मौज हो जाएगी। अब नन्दू को अपनी बकरियों की परवाह न रही। वह नित्य हिरणों को आकर्षित करने के तरीके सोचता रहता। उसने वहीं नई झोंपडी बना ली। वह अपनी बकरियों को लगभग भूल ही गया। देख-रेख के बिना बकरियों कमजोर और बीमार रहने लगी। उनमें से कुछ चरते-चरते राह भूलकर भटक गई। कुछ मर गई। धीरे-धीरे मौसम बदलने लगा। बारिश और ठंड के बाद गर्मी आ गई। हिरण वहां से घने जंगल में भाग चले गए। नन्दू हिरणों की खोज में फिरने लगा। लेकिन हिरण कहां मिलतें।
अंत में वह समझ गया, अब हिरण नहीं आएंगे। तब उसे बकरियों की याद आई। वह भारी मन से अपनी पुरानी झोपडी में लौट आया। लेकिन उसे बाडे में एक भी बकरी दिखाई नहीं दी। नन्दू ने पछता कर अपना सिर पीट लिया। लालच के कारण वह घर का रहा, न घाट का।




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article
acchi hai,  (29/11/2007 15:35:05)
  Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 

Top Story of The Day
Breaking News
Latest Articles
Artilces
 
Education Special
Special Edition : Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Bikaner Udyog Craft Mela
All right reserved by Khabarexpress.com ( Bikaner Rajasthan News Website )
Natraj Infosys, C-223, M D Vyas Nagar, Bikaner- 4 (Rajasthan) India Phone: 91-151-2210444,  9351790468, 9829578343
Send your press release at: editor@khabarexpress.com