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| RSS | Tuesday, May 21, 2013 |
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Inspiration Context
थॉमस एल्वा एडीसन उन दिनो स्टोरेज बैटरी बनाने के कार्य में जुटे थे। इस कार्य में उन्हें २५ बार विफलता का मुंह देखना पडा। २६वी बार उन्हें सफलता मिल गई।
एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, स्टोरेज बैटरी बनाने मे आन २५ बार विफल रहे। इतना समय आपका निरर्थक ही रहा, आपको क्या मिला?
एडीसन ने तुरंत कहा, मुझे २५ तरीके हासिल हुए जिनसे स्टोरेज बैटरी बन ही नही सकती।
... उस समय भारत पर अंग्रेजी हुकूमत थी। अंग्रेज गवर्नर ने सुप्रसिद्व साहित्यकार मुंशी प्रेंमचंद को उपाधि देने का ऐलान किया।
जब प्रेमचंदजी ने सुना तो वह दुखी हो गए। उन्हें दुखी देखकर उनकी पत्नी बोली, जब उपाधि मिल रही है तो ले लो। इसमे दुखी होने जैसी कौन सी बात है?
मुंशी जी बोले, यदि मैं उपाधि ग्रहण करता हूं तो फिर सरकार का जरखरीद हो जाऊंगा। अब तक मै स्वछंद रूप से जनसामान्य के लिए ही लिखता रहा हूं।
उन्होने गर्वनर को एक पत्र लिखा, मुझे आपकी नही बल्कि जनसामान्य की ही रायसाहबी कुबूल है।... अमेरीका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन एक बार अपने मित्र की घोडाबग्गी में बैठकर घूमने निकले। अभी कुछ दूर निकले ही थे कि मार्ग में एक श्रमिक ने उन्हें झुककर प्रणाम किया। प्रत्युतर मे लिंकन ने उससे भी अधिक झुककर प्रणाम किया।
लिंकन को ऐसा करते देख उनके मित्र ने पूछा, आपने उस श्रमिक को इतना झुककर प्रणाम क्यो किया?
तब लिंकन ने कहा कि मै अपने से अधिक नम्र किसी को नही देख सकता
... सुप्रसिद्व साहित्यकार जॉर्ज बनार्ड शॉ को एक महाशय ने भोज पर आमंत्रित किया। चूकि वह महाशय मांसाहारी थे, अतः शॉ ने उनको पहले ही बता दिया था कि वह मांसाहारी भोजन नही करेगे।
अगले दिन जब शॉ उनके यहां भोजन करने गये तो देखा कि शाकाहारी भोजन की भी व्यवस्था है। वह शाकाहारी भोजन की मेज पर रखे सलाद को चटखारे लेकर खाने लगे।
तभी एक मांसाहारी सज्जन ने उन पर व्यंग्य कसते हुए कहा,जनाब मुर्गा खाइये इस घास फूस मे रखा क्या है?
शॉ से रहा नही गया और उन्होने हाजिरजवाबी का परिचय देते हुए कहा,...
गांधीजी एक बार किसी गांव में भाषण देने गये। गांववासियो ने उनके स्वागत के लिए फूलो की माला तैयार कर रखी थी।
गांधीजी ने फूलमालाएं देखी तो भाषण के प्रारंभ मे बोले- यदि आप लोगो ने फूलो के हार पहनाने के बजाय सूत का बना हार मुझे पहनाते तो मै बहुत प्रसन्न होता क्योकि सूत से बाद मे वस्त्र बन सकते थे, जबकि पुष्प व्यर्थ चले जाएंगे। इनकी शोभा तो वृक्षो के संग है इनको तोडना ठीक नही। पुष्पों को तोडना सूक्ष्म हिंसा है।
... नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से किसी ने कहा, नेताजी आप इस तरह कब तक कुवांरे रहेगे? शादी क्यो नही करते?
नेताजी ने कहा शादी तो मै तब करूंगा जब कोई मनचाहा दहेज दे।
वह व्यक्ति बोला- कोई भी आपको मनमाफिक दहेज दे सकता है।
नेताजी बोले, लेकिन दहेज मे मुझे मेरे देश की आजादी चाहिए। है कोई देने वाला?
इतना सुनकर वह व्यक्ति हक्का बक्का रह गया।... ईसा मसीह अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस गांव सें पूर्व ही मार्ग मे उन्हें 15-20 गड्ढे खुदे हुए मिले। ईसा मसीह के एक शिष्य ने उन गड्ढो को देखकर जिज्ञासा प्रकट की।
ईसा मसीह बोले,पानी की तलाश में किसी व्यकित ने इतनें गड्ढे खोदे है। यदि वह धैर्यपूर्वक एक ही स्थान पर गड्ढा खोदता तो उसे पानी अवश्य मिल जाता, आशय यह है कि व्यक्ति को परिश्रम करने के साथ-२ धैर्य भी रखना चाहिए।... एक व्यकित को अपने किसी कार्य सें संतष्टि नही होती थी। उसे ऐसा लगा करता था कि कही न कही त्रुटि रह गई है।
एक बार वह बेंजामिन फ्रेंकलिन के पास गया और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताया।
उस व्यकित की समस्या सुनकर फ्रेकलिन बोले, संसार में यदि कोंई बडी गलती है तो वह है- निठल्ला बैठना। जो व्यक्ति यह गलती नही करता, उससे यदि छोटी मोटी गलतियां हो भी जाए तो बुरी बात नही है। व्यक्ति को सदैव कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।... चर्चिल किसी सभा को संबोधित कर रहे थे। तभी उनके एक मित्र ने उनसे कहा, देखिये आपकी लोकप्रियता इतनी अधिक है कि १० हजार लोग आपका भाषण सुनने के लिए एकत्रित हुए है।
तब चर्चिल बोले, दरसल यह सब तमाशबीन है। यदि मुझे फांसी देने की घोषणा हो तो ७० हजार लोग एकत्र हो जाएंगे। यह तो तुम्हारा भ्रम मात्र है कि ये सब मेरे प्रश्ंासक है।... सुप्रसिद्ध नाटककार ऑस्कर वाइल्ड का एक नाटक जब पहली बार खेला गया तो वह फ्लॉप हो गया। जब नाटक समाप्त हुआ तब कुछ पत्रकार वाइल्ड की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनके पास गये और पूछा, आपका नाटक फ्लॉप रहा, इसके बारे मे आपकी क्या प्रतिकि्रया है?
तब वाइल्ड मुस्कराकर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बोले, आपको गलतफहमी हुई है। नाटक तो पूरी तरह सफल रहा लेकिन दर्शक ही फ्लॉप हो गए।... एक कट्टर धार्मिक संस्था ने गांधीजी को मोटी रकम दान में देनी चाही। लेकिन शर्त यह रखी कि वह यह रकम हरिजन व मुसिलमो के लिये खर्च नही करेगे।
गांधीजी बोले, भई यह राशि मै नही ले सकता क्योकि मै तो खर्च ही इन वर्गो के लिए करता हूं। इस राशि के लिए आप किसी अन्य गांधी की तलाश करे।... |
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