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जीवन विकास के लिए सह चिंतन अनिवार्यः आचार्य श्री महाप्रज्ञ

04 Feb 2007      Add comment     Mail     Print     Write to Editor     

Mahapryga JIआचार्य श्री तेरापंथ धर्म संगठन के मुखिया हैं हमारे समय में अहिंसा के पर्याय होते जा रहे हैं अध्यात्म मनीषी आचार्य श्री महाप्रज्ञ १४३ वें मर्यादा महोत्सव आयोजन के निमित बीकानेर में पधारे हुए है।
व्यापक समाज को उन जैसे मनीषियों के मार्ग दर्शन की चाहना रहती है उसी क्रम में खबरएक्सप्रेस ने उनसे हमारे देश की समसामयिक स्थिति पर बातचीत की ।
यह हमारा सौभाग्य रहा कि आचार्य श्री के अपने व्यस्तम समय में से खबरएक्सप्रेस को तैतीस मिनट दिए और अत्यन्त मौलिक से दृष्टिकोण से विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार प्रकट किए।
पिछले लम्बे समय से आचार्य श्री के जो साक्षात्कार प्रकाशित हुए वे या तो अहिंसा केन्दित  या अध्यात्म केन्दित रहे। संभवतः कुछ मुद्दों पर आचार्य श्री ने पहली बार अपने विचार खबरएक्सप्रेस के जरिये व्यापक समाज के सामने रखे है। डॉ. बृजरतन जोशी के साथ हुई लगभग तैतीस मिनट की बातचीत के कुछ मुख्य संपादित अंश इस प्रकार से है-
प्रश्न १. अहिंसा यात्रा का उद्देश्य स्थूल हिंसा या सांप्रदायिक हिंसा को तो मिटाना है ही पर उसके क्या कई अन्य आयाम भी प्रकट हो रहे हैं जैसे आर्थिक क्षेत्र व राजनीतिक क्षेत्र में किया जाने वाला दमन या हिंसा । क्या अहिंसा यात्रा में यह पक्ष भी शामिल है?
उतर. चार शब्द है १. स्वस्थ व्यक्ति २. स्वस्थ समाज व्यवस्था, ३. स्वस्थ अर्थव्यवस्था, ४. स्वस्थ राजनीतिक व्यवस्था।
हम व्यक्ति से समाज की ओर जा रहे  है। हम व्यक्ति में अहिंसा के व्यवहारिक गुण, करूणा, मैत्री, संवेदनशीलता से उसका परिस्कार करना चाहते है।
हम यह भी मानते हैं कि मानवीय एकता ही समाज का आधार हो सकती है। हम ऐसे समाज के निर्माण में रत है जहाँ जातिवाद को कोई स्थान नहीं है। मानवीय एकता ही स्वस्थ समाज सही स्वरूप है। ऐसे समाज में ही परिवार संस्था को तनाव मुक्त करने के अवसर मिलते हैं। जिस समाज में कन्या भ्रुण हत्या, दहेज, तलाक आदि नही होते है। वही स्वस्थ समाज कहा जाता है। उसमें अनुशासन होता है । समाज के अग्रणी लोग ही समाज संचालन करते हैं
मेरा मानना है कि राजव्यवस्था समाज को नहीं चला सकती। उसका कार्य दूसरा है।  समाज को चलाने के लिए सामाजिक नेतृत्व व अनुशासन जरूरी है। अहिंसा यात्रा में यह सब हो रहा है।
वह अर्थव्यवस्था जहां गरीबी और अमीरी की दिशाएँ विपरीत है। इस अर्थव्यवस्था में (वर्तमान की) गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर होता जा रहा है। इसलिए यह अर्थव्यवस्था भी स्वस्थ नहीं है। अहिंसा यात्रा में इस पर नियन्त्रण के उपाय और रफतार शामिल है।
विकल्प भी दिया है -
- Relation Economic System होना चाहिए।
- सापेक्ष अर्थव्यवस्था हो जिसमें  लघु  व वृहद् के बीच सापेक्षता हो।
- वर्तमान परिस्थिति में धर्मगुरूओं को अर्थशास्त्र व अर्थशास्त्रीयो को धर्म का अध्ययन जरूरी हो गया है।
जनतंत्र में विचार भेद स्वाभाविक है अनेक दलों का होना भी स्वाभाविक है। किन्तु दल बदलू होने पर भी राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक दलों में एकता व प्रतिबद्धता हो। वह वर्तमान में नही है। राजनीतिक व्यवस्था के पास सहचिन्ता के लिए अवकाश नहीं है। वरन् शत्रुता का भाव पनप रहा है। हत्यामुक्त राजव्यवस्था होनी चाहिए। सहचिंतन के लिए अवकाश होतो ये सब अहिंसा यात्रा के उद्देश्य में भी है। और इन पर चला भी जा रहा है।
प्रश्न.२ जैन दर्शन अहिंसा प्रधान है। जिसमें सांस लेने तक को हिंसा माना जाता है। तब फिर आधुनिक तकनीक के साथ उसका रिश्ता क्या है। क्या तकनीक को स्वीकारें या नहीं।
उतर. जैन दर्शन अहिंसा का आचार शास्त्र है दर्शनशास्त्र नहीं । जैन दर्शन आत्मकैन्दिरत दर्शन है। अत्याचार पक्ष में अहिंसा प्रधान है। जो एथिक्स है वहॉ अहिंसा की प्रधानता है अहिंसा को लेकर भ्रांति भी है। लोग उसकी समग्रता या व्यवहारिक रूप को नहीं समझते गृहस्थ के लिए सापेक्ष अहिंसा है। वह जो जीविका के लिए करेगा उसके लिए अपनी सुरक्षा के लिए की गई हिंसा भी वरणीय है। गृहस्थ अहिंसा से तात्पर्य है कि अनावश्यक हिंसा न करे । सामाजिक प्राणी के लिए यह नियम लागू है। कि संकल्पपूर्वक ऐसा न करे।  मुनि के लिए दूसरा विकल्प है।
प्रश्न ३ अहिंसा दृष्टि से समाज के पिछडे वर्गों के लिए आरक्षण क्या अहिंसा दृष्टि का ही विस्तार नही है? इस बारे में आपकी क्या राय है।
उतर. आरक्षण राजनीति पक्ष है मानवीय नहीं । समविभागिता नहीं है। समाज में समर्थ का असमर्थ के प्रति आकर्षण नहीं है। यह अल्पसंख्यक/पिछडापन समाज का दोष है। आरक्षण प्राथमिक उपचार है। समस्या का समाधान नहीं । चोट लगने के बाद हम प्राथमिक उपचार के सहारे वेदना को कब तक भोगते रहेंगे।
प्रश्न ४. क्या अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया जाना चाहिए ? इस पर आप क्या सोचते है।
उतर. मै अल्पसंख्यक शब्द को ही त्रुटिपुर्ण मानता हूं । बहुसंख्यक कौन है। सारे तो वे ही है। कोई एक करोड है तो कोई दो अथवा कोई ज्यादा या कम। कोई प्रमाणित तो करें। धर्म की दृष्टि से भी सभी बंटे है
प्रश्न ५ मुस्लिम संप्रदाय व जाति के पिछडेपन के बारे में आफ विचार क्या है।?
उतर. यह तो स्वयं इस समाज को सोचना है। कारणों पर भी स्वयं समाज ही निर्णय करे। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अवरोध जरूर है। आर्थिक दृष्टि  से भी अनुपात कम है।
प्रश्न ६ नदियों को जोडने के बारे में हमारे पर्यावरण विदो की राय है कि यह ठीक नहीं है। वे इसे अनुचित समझते हुए विरोध जता रहे है? इस संदर्भ में आपका सोचना क्या है?
उतर. वैज्ञानिक दृष्टि से तो समाधान है
     पर्यावरण की दृष्टि से समस्या है।
     वर्तमान में जल समस्या ज्यादा है।
यो अच्छाई - बुराई, गुण अवगुण सदा साथ रहते आये है।
प्रश्न .७ भारत के महामहिम राष्ट्रपतिजी आफ  निकट सम्फ में है। आप दोनो  मिलकर एक पुस्तक का प्रणयन भी कर रहे है। वे हिंसक तकनीकि के शिखर पुरूष है। जबकि आप अहिंसा के दूत। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
उतर. मेरा मानना है कि विज्ञान को आध्यात्म से तोडना नहीं है। जोडना है। दोनों में भेद नहीं है। दोनो शून्य जानने की प्रक्रिया में लगे है। प्रश्न इनके उपयोग का है। गलत दिशा में गलत प्रयोग से नकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। सकारात्मक प्रयोग व दिशा से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
प्रश्न ८ देश का एक बडा भू-भाग नक्सलवादी हिंसा की चपेट में है? क्या आपका इरादा उस तरफ जाने का भी है?
उतर. हाल ही के दिनों में मैने अंग्रेजी में इस पर एक लेख लिखा है। जिसमें आफ प्रश्न का समाधान है।
प्रश्न.९गैर सैनिक कार्यो के लिए आणविक शक्ति के उपयोग के बारे में आफ विचार क्या है? क्योंकि उससे पर्यावरण का तो नुकसान होता ही है साथ ही हिंसा भी होती है।
उतर. आप ठीक कर रहे हैं कि पर्यावरण का नुकसान तो होता है। पर आदमी अपने ही बनाए मकडजाल में फंसा है। वह नुकसान से परिचित भी है। विवश है यह तो वह सांप छछूंदर वाला खेल होता जा रहा है।
प्रश्न १० क्या आप जैन समाज के लिए व्यापक समाज से अलग एक अल्पसंख्यक समाज के रूप में उसकी मान्यता चाहते है? जबकि कुछ लोग उसकी मान्यता की बात भी कर रहे है?
उतर. नहीं हम ऐसा नहीं मानते और न चाहते है। मै पहले ही कह चुका हूँ कि यह अल्पसंख्यक शब्द ही अपने आप में त्रुटिपूर्ण है।




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