किसी भी समाज में व्यक्ति का समाजोपयोगी विकास ही वहाँ की शिक्षादृष्टि का परिचायक होता है। विश्वविद्यालय इस दृष्टि के विस्तार केन्द्र होते हैं। विश्वविद्यालय एक प्रकार से समाज में ज्ञान के अपनी तरह अनूठे केन्द्र हो सकते हैं। अगर उनमें शोध व अनुसंधान के साथ जीवन विकास को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने को साम्र्थ्य हो।
नगर बीकानेर को दो से अधिक दशक के संघर्ष के बाद विश्वविद्यालय मिला। स्थापना के बाद आए पहले कुलपति महोदय ने बादे तो बहुत किए पर निभाए कम।
परिणाम स्वरूप प्रदेश में सर्वाधिक छात्र संख्या के जादुई आंकडे पास पहुँचा बीकानेर विश्वविद्यालय केवल परीक्षा विश्वविद्यालय बन कर रह गया।
परिवर्तन की हवा ने विश्वविद्यालय के विकास को भी हवा दी है पर हवा को ग्रहण करने के लिए यातायात जरा तंग थे। नगर के लिए सुखद संकेत है कि यहाँ की प्रतिनिधि संस्था को मुखिया के रूप में डॉ. सी. बी. गैना की नियुक्ति की हुई है।
डॉ. गैना मूलतः विज्ञान संकाय से रहे हैं। अतः वस्तुनिष्ठता उनके दृष्टि के मूल में रहती हैं। वनस्पति शास्त्र के प्राध्यापक के रूप में आपने अनेक शैक्षिक एवं प्रशासनिक योग्यता को साबित कर चुके हैं।
नगर के लोगों के स्वभाव कें बारे में खबरएक्सप्रेस के संपादन ने जब उनसे पूछा तो वे कहने लगे कि यहाँ के लोग बहुत संजीदा, गहरी सोच और शिष्टाचारी हैं। उनका कहना था कि जैसा पानी वैसी वाणी के व्यवहारी है यहाँ के लोग और उनका स्वभाव।
विश्वविद्यालय में अकादमिक वातावरण के निर्माण के बारे पुछने पर वे कहते हैं कि वी.सी. कार्डिनेशन कमेटी की मिटिंग में विश्वविद्यालय ने छह विभागों के लिए छह प्रोफेसर के पद मांगे है। ताकि यू. जी. सी. के अनुसार शैक्षिक मानदण्डों को पूरा किया जा सके।
अपने स्तर पर विश्वविद्यालय के विकास के बारे में उनके प्रयासों के बारे में जानकारी मांगने पर वे कहते हैं कि ऐसा नही है कि केवल सरकार पर आश्रित है। हम अपने स्तर पर भामाशाहाओं से सम्फ कर रहे हैं। विभिन्न समुदायों के धनाचार लोगों से नगर के प्रतिनिधि शिक्षण केन्द्र के विकास के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। सकारात्मक बातचीत हुई है। कुछ आश्वासन भी मिले हैं।
डॉ. गैना के स्वभाव में सरलता, सरसता और सजगता है। वे प्रश्नों की बौछार से परेशान नही होते वरन् उनके सकारात्मक निदान की ओर स्पष्ट सोच वदिया मे साथ आगे बढकर प्रयत्न करते हैं।
किसी भी विश्वविद्यालय में हो रहे शोध उस विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के सूचकांक होते है। बीकानेर विश्वविद्यालय में शोध की दशा दिशा के साथ स्थिति और गति के बारे मे पूछने पर उनका कहना था कि नगर चरित्र को उभारने के लिए उससे संबंधित विषयों को शोध में प्राथमिकता दी जाय। यहां के पर्यावरणीय घटकों को विशेषकर सेवन घास की सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में अनुसंधानात्मक प्रयास हो। इसके अलावा यहाँ भौगौलिक पर्यावरण के अनूकुल लवणोंद्भिद पादपों पर शोध अनुसंधान हों ।पारम्परिक जलव्यवस्था, स्थापत्य और ललित कलाएँ भी शोध का आधार बन सकती हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय अपने स्तर पर तत्पर भी है और ओ भी प्रयास जारी रखेगा।
शोध कार्य के वास्ते जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया में डॉ.गैना के आने के बाद आमूलभूत परिवर्तन हुए है पहले जहाँ साल में दो बार रजिस्ट्रेशन होन की व्यवस्था है शोधार्थियों की ट्यूशन फीस में छूट दी गई है। पहले जहाँ विश्वविद्यालय उनसे यह फीस लेता था वहीं अब यह फीस महाविद्यालय लेता है। क्योंकि बीकानेर विश्वविद्यालय के पास अपना कोई पुस्तकालय, शोध संस्थान या सन्दर्भ कक्ष है ही नहीं तो वह किस हेतु उनसे यह फीस ले। साथ ही अब अन्तर अनुशासनात्मक विषयों में भी पी. एच. डी. की छुट का श्रेय भी डॉ. गैना के खाते में जाता है। इसके अतिरिक्त डॉ. गैना ने अन्य विश्वविद्यालयों के पंजीकृत शोध निदेशकों को यहाँ पंजीकृत होने की छुट भी दे रही है। विश्वविद्यालय के भवन निर्माण संबंधी प्रगति के बारे में उन्होनं कहा कि आर. एस. आर. डी. सी. से एमओयू हस्ताक्षर हो गया है। नक्शा तैयार हैं। ५ करोड के बजट का प्रस्ताव रखा गया है। जिसमें पहले चरण में कुलपति सचिवालय परीक्षा केन्द्र प्रशासनिक भवन के साथ अतिथि गृह के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है प्रथम चरण का यह कार्य १८ माह में सम्पन्न होन करार हुआ है।
छात्रों के लिए रोजगारन्मुखी पाठ्यक्रमों के शुरूआत के विषय में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, नाट्क के साथ रचनात्मक लेखन के पाठ्यक्रम की योजनाएँ प्रस्तावित है।
गेस्ट लेक्चरर के भविष्य और उनके अधिकार की रक्षा पर वे कहते हैं कि मैं स्वयं एक शिक्षक रहा हूँ। शिक्षक की गरिमा और मर्यादा की रक्षा भली भांति जानता हूँ। विश्वविद्यालय ने इसके लिए अपने स्तर पर प्रयास किये है। प्राचार्यों को इस संबंध में कडे आदेश दिए जा चुके हैं। फिर भी कोई शिकायत या मामला आने पर कडी कार्यवाही की जाएगी। खबरएक्सप्रेस के माध्यम से वे देश विदेश में बसे प्रवासी नगरवासियों के साथ सभी वर्गो के नागरिकों को अपील करते हुए उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय का स्वरूप प्रदान करने की प्रक्रिया में सभी का सहयोग, रचनात्मक सूझाव अपेक्षित है।
बातचीत का सार यह हैं कि आने वाले दिन बीकानेर विश्वविद्यालय के विकास के दिन होंगे। कुलपति डॉ. गैना सतत् प्रयासरत है। विकास के लिए प्रतिबद्ध है शिक्षा के लिए सर्मपित।
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