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26
Feb
इतिहास आस्था का विषय नहीं: प्रो. इनायत अली जैदी
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Prop.Enayat-Aliप्रो. इनायत अली जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में मान विकी संकाय के अधिष्ठाता हैं।

इतिहास के ख्यातनाम प्रो. इनायत अली जैदी पिछले दिनों बीकानेर प्रवास पर थे। प्रो. जैदी इन दिनों जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में मानविकी संकाय के अधिष्ठाता हैं। वे कॉमनवैल्थ फेलो भी रह चुके हैं। इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी, हालैण्ड, आदि कई देशों की यात्रा कर चुके है। इन दिनों वे पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्धन पर अनुसंधानों को दिशा देने का नवाचार इतिहास विषय में कर रहे है।
सत्तावन वर्षीय प्रो. इनायत स्वभाव से हंसमुख, मिलनसार, सहज और नेक इंसान है। वे असहमति भी पूरी शिष्टता व विनम्रता से जताते है। अकादेमिक लोगो का संर्दभ उन्हें छू भी नहीं पाता। इसीलिए वे बात बात में अर्ज कर रहा हूँ। जैसे शिष्ट और सम्मानीय भाव से लबरेज पद बोलते है। खबरएक्सप्रेस ने इन दिनों सत्ताप्रतिष्ठानों द्वारा इतिहास अपनी तरह से किये जाने वाले पाठ के बारे में जब उनसे पूछा तो उन्होंने  कहा कि हर कार्य का एक प्रयोजन होता है। उदाहरण के लिए अकबर को ही लें। अकबरकालिन इतिहास हमें बदाचूनी भी देता है। और अबू फजल भी फर्क इतना है कि अबू उदार सोच से युक्त है तो बदाचूनी रूढग्रस्त एवं संकुचित सोच का सरकारों का यह ध्यान में रखना होगा कि इतिहास आस्था से नहीं वरन् तथ्यों से चलता है। वह आस्था का विषय नहीं है। धर्म, जाति आदि के लोग हमारी मजबूरी है। हमें अपनी सोच को उदात,
व्यापक करके चलना होगा।
पहले प्रो. मुरलीमनोहर जी और अर्जुनसिंह जी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को संम्हाले हैं दोनों के विचारों में भारी अन्तर है दोनो ही विचार विशेष के प्रति प्रतिबद्ध है,
इस पर जब उनके विचार प्रकट करने को कहा गया तो वे सहज भाव से कहने लगे कि समाज व्यक्ति विशेष का या विचार विशेष का नहीं है। वरन् सामूहिक सोच का परिणाम है। अतः अगर किसी विशेष विचार पर भी चलना हो तो समूचे समाज के हितों  को ध्यान में रखकर चलना ही समाज के हक में होगा।
राजस्थान सरकार के शिक्षामंत्री इतिहास के पुनर्लेखन पर जोर दे रहे है। उनके इस मंतव्य पर उनसे बातचीत में जब हमने उनके विचार पूछे तो उनका उत्तर था कि इतिहास का पुनर्लेखन अच्छी कोशिश है लेकिन असल मसला यहा है कि इस पुनर्लेखन का विशलेषण कौन करेगा । कहीं ये तथ्यों का संकलन भर तो नहीं । सबकी सोच व्यापक हो और सही दिशा में हो यह आवश्यक है।
जमिया मिलिया में इन दिनों शोध दिशा के बारे में पूछने पर उनका उत्तर था कि हम इतिहास की नई शाखाओं  पर अनुसंधान करवा रहे है। जेन्डर हिस्ट्री, डेमोग्रेफीपर (जननांक अध्ययन) स्वास्थय एवं चिकित्सा, ट्रेन्डस ऑफ हिस्ट्रोग्राफी,
ज्वनते ंदक ज्तंअमस उंदंहमउमदज आदि नए अनुसंधानों में अध्ययन अध्यापन एवं अनुसंधान हो रहे है ।
आगे कि योजना के बारे में जानकारी चाहने पर वे कहते है कि हम पर्यावरण, पर्यटक, और इकोलोजी के जरिये इतिहास अनुसंधान की दशा और दिशा को नया मोड देने की चाहना है। ताकि वर्तमान स्थिति और गति में परिवर्तन आये।




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